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खबर जरूरी, क्योंकि 17 दिन में हो चुके 4 हादसे

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प्लानिंग रेड-ऑरेंज जोन इंडस्ट्री को ही बाहर करने की, पर आग तो ग्रीन जोन में भी लग रही, खतरा बरकरार

  • ताकि सेफ रहें लोग, रिहायशी क्षेत्रों की इंडस्ट्रीज को बाहर करने के लिए 2014 में हुआ था सर्वे का आदेश
  • रिहायशी क्षेत्रों में चल रही इंडस्ट्रीज पर लटकी है बंद होने की तलवार
  • 7 साल बाद जो सर्वे पूरा हुआ, उसे भी इंडस्ट्रीज विभाग खुद ही कर चुका खारिज

एक दिन पहले बापौली रोड पर आग से एक स्पिनिंग मिल जलकर खाक हो गई। क्योंकि आग से सुरक्षा के एक भी मानक पर अब तक कोई काम नहीं हुआ है। न इंडस्ट्री वालों से नियमों का पालन कराया गया और न ही सरकार ने आग बुझाने के आधुनिक इंतजाम किए। सिर्फ बयानबाजी हुई और भरोसा दिया गया।

शायद यही कारण है कि शहर में न तो कोई इंडस्ट्री सुरक्षित है और न ही उन रिहायशी कॉलोनियों के लोग जहां पर बड़े स्तर पर इंडस्ट्रीज चल रही हैं। सरकार और जनप्रतिनिधि पिछले 7 सालों ने इंडस्ट्रियल सर्वे का लॉलीपॉप दे रही है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2014 में हरियाणा सरकार ने इंडस्ट्रीज के सर्वे का आदेश दिया था। जो अब जाकर पूरा हुआ, लेकिन एजेंसी की रिपोर्ट को इंडस्ट्रियल विभाग ने ही खारिज कर दिया। सर्वे पूरा नहीं होने से एक तो रिहायशी कॉलोनियों में बनी इंडस्ट्रीज पर डीटीपी की कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है, दूसरे आग की घटनाओं से कॉलोनी वासियों की सांसें।

पहले समझिए, इंडस्ट्रीज को लेकर सरकार की क्या है प्लानिंग

  • सुप्रीम कोर्ट का आदेश

7 साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि रिहायशी कॉलोनियों में चल रही रेड व ऑरेंज जोन की इंडस्ट्रीज हटाई जाएं। साथ ही ग्रीन जोन की इंडस्ट्रीज को हटाने के लिए 2 साल का वक्त दिया था। सरकार ने 2014 में सर्वे का आदेश दिया था।

  • 11,500 इंडस्ट्रीज की पहचान

सर्वे एजेंसी पानीपत में सिर्फ 11,500 इंडस्ट्रीज की ही पहचान कर पाई। जिसमें चारों औद्योगिक सेक्टरों भी शामिल हैं। रिपोर्ट को गलत बताकर इंडस्ट्रीज विभाग ने खारिज कर दिया और एक माह में फिर से सर्वे करने का आदेश दिया था।

  • इंडस्ट्रीज को बाहर शिफ्ट करेंगे

सरकार की प्लानिंग है कि रेड और ऑरेंज जोन की वे इंडस्ट्रीज जो प्रदूषण फैलाती हैं। उसे रिहायशी कॉलोनियों से बाहर किया जाए। इसके साथ ही ग्रीन जोन की इंडस्ट्रीज भी बाहर जाएगी। लेकिन 7 साल में सर्वे भी पूरा नहीं हुआ है।

  • लोगों को शिफ्ट किया जाएगा

असिस्टेंट डायरेक्टर इंडस्ट्रीज क्षितिज ने कहा कि अगर किसी रिहायशी कॉलोनी में 70 फीसदी से ज्यादा ग्रीन कैटेगरी की इंडस्ट्रीज है तो उसे इंडस्ट्रियल जोन बना दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में वहां रह रहे लोगों को शिफ्ट किया जाएगा।

बड़ा सवाल, ग्रीन इंडस्ट्रीज का क्या होगा, जो सबसे ज्यादा हैं

रेड और ऑरेंज सभी इंडस्ट्रीज रिहायशी कॉलोनियों से शिफ्ट होंगी, लेकिन ग्रीन इंडस्ट्रीज का क्या होगा। क्योंकि, पानीपत की रिहायशी कॉलोनियों में ग्रीन इंडस्ट्रीज की संख्या ज्यादा है। इनमें आग के बड़े-बड़े हादसे हो रहे हैं। अगर इनकी संख्या 70 फीसदी से कम हुई तो यह नहीं हटेगी। ऐसे में बड़ा सवाल है कि यहां रहने वाले लोग कैसे बचेंगे।

आग से सुरक्षा के एक भी मानक पर नहीं हुआ काम

आग से बचाव के एक भी मानक पानीपत में पूरे नहीं हैं। रिहायशी कॉलोनियों में चल रही चाहे वह रेड, ऑरेंज हो या ग्रीन इंडस्ट्रीज हो, बिल्डिंग का नियम पूरा नहीं है। आग लग जाए तो बचाव के सारे रास्ते बंद पड़े हैं। ऊपर से आग से बचाव के साधन ही आधुनिक नहीं है। इसलिए, सरकार को पानीपत की इंडस्ट्रीज और रिहायशी कॉलोनी वासियों को बचाना है तो गंभीर प्रयास करने होंगे।

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