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हाईवे से कब्जा हटाने का फिर प्रयास शुरू, एनएचएआई ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट, शिकायत पर कार्रवाई

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हाईवे से कब्जा हटाने का फिर प्रयास शुरू, एनएचएआई ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट, शिकायत पर कार्रवाई

  • सर्वे कर जिस कंपनी ने 153 कब्जे बताए थे, अब उसे रिव्यू की जिम्मेदारी
  • 13 सालों में एलएंडटी ने करोड़ों कमाए, कार्रवाई न के बराबर की

शहरवासियों के लिए जाम का पर्याय बने नेशनल हाईवे से अतिक्रमण हटाने का प्रयास फिर शुरू हो गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और लोकायुक्त के आदेश के बाद भी हाईवे किनारे से अब तक कब्जे नहीं हटे। अतिक्रमण हटाने के लिए जिम्मेदार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), पानीपत जिला प्रशासन और 13 सालों से टोल कमाई में लगी एलएंडटी कंपनी ने तो आदेश को दबा दिया, लेकिन शहर के एक व्यक्ति ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के पास इसकी शिकायत कर दी।

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शिकायत के बाद एनएचएआई मुख्यालय ने अम्बाला जोन एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने इंजीनियरिंग कंपनी टीपीएफ जेटिन्सा यूरो स्टूडियोज को अतिक्रमण के रिव्यू की जिम्मेदारी दी है। साथ ही कंपनी यह भी बताएगी कि अतिक्रमण की स्टेटस रिपोर्ट क्या है।

इसी कंपनी ने सर्वे कर बताया था कि दिल्ली-अम्बाला साइड में शहर में हाईवे किनारे 153 कब्जे हैं। यह और बात है कि 3 साल बाद भी अतिक्रमण नहीं हटा। कोरोना के लॉकडाउन से अफसरों को मामला दबाने का मौका भी मिल गया। लेकिन अब याचिकाकर्ता हाईकोर्ट जाएंगे।

 

पहले जानिए… अब तक क्या हुआ है इस मामले में

शहर के कुछ वकील जोगेंद्र पाल राठी समेत रोहित, प्रदीप, रामप्रसाद जैन और पवन गर्ग ने पहले यहां कोर्ट में केस किया था। एनएचएआई पर दबाव बना तो शहर में हाईवे किनारे सर्वे कराया। फिर, जब एक एडवोकेट अमित कुमार ने आरटीआई से जानकारी मांगी तो दिल्ली-अंबाला रूट पर ही 153 कब्जे मिले। दूसरी साइड की रिपोर्ट एनएचएआई ने नहीं दी।

इधर, समालखा से आरटीआई कर्ता पीपी कपूर ने लोकायुक्त में केस कराया तो पानीपत और समालखा में हाईवे पर अतिक्रमण को लेकर एनएचएआई और पानीपत जिला प्रशासन से इसकी रिपोर्ट मांग ली। समालखा में तो कुछ अतिक्रमण हटाए भी गए, लेकिन शहर में एनएचएआई, पानीपत जिला प्रशासन और एलएंडटी ने कोई कार्रवाई नहीं की।

लॉकडाउन के कारण दो साल दबा रहा केस

लोकायुक्त के रिपोर्ट मांगने के बीच एनजीटी का भी आदेश आ गया कि हाईवे किनारे से अतिक्रमण हटाया जाए। समालखा में कार्रवाई शुरू हुई तो कुछ लोग 2019 में हाईकोर्ट चले गए। बाद में दो साल से कोरोना का लॉकडाउन लगा तो केस दब गया।

अब अचानक से कैसे जागा एनएचएआई

एक शहरवासी ने केंद्रीय परिवहन मंत्री से मामले की शिकायत कर दी कि एनजीटी और लोकायुक्त के आदेश पर पानीपत में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अफसरों की नींद टूटी है। अब मुख्यालय से रिपोर्ट मांगी तो अंबाला के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने इंजीनियरिंग कंपनी से वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट मांगी है। जिसमें यह भी बताना होगा कि 153 अतिक्रमण जो बताए थे, उसका क्या हुआ।

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कंपनी ने सर्वे में यह बताया था
इंजीनियरिंग कंपनी ने सर्वे कर बताया था कि दिल्ली-अम्बाला लेन पर शहर में 153 कब्जे हैं। एनएचएआई ने जीटी रोड की दिल्ली लेन की 96 से 86 किमी. तक की पैमाइश रिपोर्ट जारी की थी। इसमें 153 मकानों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की पैमाइश दिखाई है। वीवो मोबाइल शॉप का 5.79 मीटर एरिया जीटी रोड में आया है। ग्रांड होटल का 345, नात्थू स्वीट्स का 40.32, सिंगला हाउस 517.41, कलाकृति मोबाइल स्टोर का 120.12 मीटर, देश प्रेमी ढाबा 129.02 मीटर, सेमसंग कस्टमर केयर 136.96, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का 136.80 मीटर, पालीवाल हाउस-1 1327.72, पालीवाल हाउस-2 1641.92, आकाश इंस्टीट्यूट का 292.81 मीटर, जैन संस्था शॉप का 299.69 मीटर, राजेश ट्रेड टावर का 733.12 मीटर, मानसरोवर शॉप का 81.47 मीटर और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का 243.28 मीटर एरिया आता है।

National Highways Authority of India - Wikipedia

एक साइड में ही 153 जगह अतिक्रमण
2004 में जब एनएचएआई के साथ एलएंडटी कंपनी का करार हुआ तो एनएचआई ने उस वक्त 27 कब्जे बताए थे। समझौता डॉक्यूमेंट में बकायदा इसका जिक्र है। लेकिन, एलएंडटी को इन 13 सालों में सिर्फ कमाई पर जोर रहा। इस दौरान कंपनी ने 670 करोड़ रुपए कमाए हैं। लेकिन यह भी सच है कि इस दौरान शहर में अतिक्रमण भी सिर्फ एक साइड में 153 जगह हो गए।

अफसर बोले कब्जे पर इंजीनियरिंग कंपनी से रिपोर्ट मांगी हैं, इस पर अमल क्यों नहीं हुआ या क्या दिक्कत हुई। इस बारे में कागज देख ही बता पाएंगे। -वीरेंद्र सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, अंबाला एनएचएआई

हाईवे से अधिक्रमण हटाने के लिए पहले क्या प्रयास हुए हैं, इसके बारे में जानकारी नहीं है। पुराने अफसर यहां हैं नहीं। जो हैं, उन्हें इनकी जानकारी नहीं है। -योगेश शुक्ला, मैनेजर, एलएंडटी

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