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एक करोड़ लोगों की मौत हो सकती है – दिल्ली हाईकोर्ट, बड़ा संकट

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एक करोड़ लोगों की मौत हो सकती है – दिल्ली हाईकोर्ट, बड़ा संकट

 

 

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लॉकडाउन जारी रहा तो सब कुछ ठप हो जाएगा और ऐसी स्थिति में इस्पात, पेट्रोल और डीजल की क्या जरूरत होगी… ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि आर्थिक हित मानव जीवन से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं। कोर्ट ने आगे कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए इस्पात और पेट्रोलियम उत्पादन में कमी करने का सुझाव दिया है।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान क्या विकास होगा। अदालत ने केंद्र से सवाल किया कि ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए 22 अप्रैल तक का इंतजार क्यों किया जा रहा है।

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कोर्ट ने कहा, ‘कमी अभी है। आपको अभी ऐसा करना होगा। इस्पात और पेट्रोलियम उद्योगों से कुछ ऑक्सीजन लेने की ओर देखिए। उनके पास बड़े ‘पॉकेट’ और बड़ी ‘लॉबी’ हैं, लेकिन उन्हें बताएं कि अगर उन्हें उत्पादन में कटौती करनी है, तो वे उत्पादन में कटौती कर सकते हैं। जीवन को बचाना होगा।’

पीठ ने केंद्र सरकार के एक वकील के उदाहरण का हवाला दिया, जिनके पिता अस्पताल में ऑक्सीजन पर थे, लेकिन इसकी कमी के मद्देनजर इसे बचाने के लिए कम दबाव में ऑक्सीजन दिया जा रहा था। अदालत ने सवाल किया, ‘क्या आप उन्हें 22 अप्रैल तक रुकने को कह सकते हैं?’

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हम एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहे…
पीठ ने कहा कि अगर कुछ नहीं किया गया, तो हम एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहे हैं… लगभग एक करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। क्या हम इसे स्वीकार करने को तैयार हैं। पीठ ने उन अस्पतालों में कोविड बेड बढ़ाने का भी सुझाव दिया, जिनके पास अपनी ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता है।

अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की जब केंद्र ने एक हलफनामे में कहा कि फिलहाल दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है और ऑक्सीजन के औद्योगिक इस्तेमाल पर 22 अप्रैल से रोक लगा दी गई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अदालत को बताया गया कि 20 अप्रैल तक की स्थिति के अनुसार मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता में 133 प्रतिशत की असामान्य बढ़ोतरी का अनुमान है। दिल्ली द्वारा बताई गई मांग का प्रारंभिक अनुमान 300 मीट्रिक टन का था जिसका संशोधित अनुमान बढ़कर 700 मीट्रिक टन हो गया। केंद्र ने हाईकोर्ट को यह जानकारी भी दी कि उसने दिल्ली सरकार के अस्पतालों को करीब 1,390 वेंटिलेटर मुहैया करवाए हैं।

उद्योग इंतजार कर सकते हैं मरीज नहीं
इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया था कि क्या उद्योगों की ऑक्सीजन आपूर्ति कम करके उसे वह मरीजों को मुहैया कराई जा सकती है। पीठ ने केंद्र सरकार से कहा, ‘उद्योग इंतजार कर सकते हैं। मरीज नहीं। मानव जीवन खतरे में है।’

गंगाराम अस्पताल में क्या हो रहा….
पीठ ने कहा कि उसने सुना है कि गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों को कोविड-19 के मरीजों को दी जाने वाली ऑक्सीजन मजबूरी में कम करनी पड़ रही है क्योंकि वहां जीवन रक्षक गैस की कमी है

 

 

Source : NavBharat

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