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पानीपत के 12 हजार में से 600 उद्योग में मंडरा रहा बड़ा खतरा

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पानीपत के 12 हजार में से 600 उद्योग में मंडरा रहा बड़ा खतरा

टेक्सटाइल नगर पानीपत में आए दिन उद्योगों में आग लग रही है। शनिवार को सिवाह में जैनिथ टेक्सटाइल में आग लगी। सोमवार को बिंझोल रोड पर वीरेंद्र ट्रेडिंग के शैड में आग लग गई। आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की साथ गाड़ियां लगी। चार घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। पिछले दो माह मे उद्योगों में आग लगने से करोड़ों का नुकसान हो चुका है। हर माह किसी न किसी उद्योग में आग लग रही है। आग को रोकने के लिए उद्योगों में फायर हाइडेंट लगा होना चाहिए। अंडर ग्राउंड और ऊपर टैंक की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि आग लगने पर पानी की व्यवस्था हो सके। ज्यादातर उद्योग फायर ब्रिगेड के नियमों पर खरा नहीं उतर रहे। जिन उद्योगों में आग लगी है उनमें से कईंयों के पास फायर ब्रिगेड की एनओसी तक नहीं मिली। आग लगने के हादसे नहीं रुक पा रहे हैं।

पानीपत में आग का खतरा मंडरा रहा है।

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पानीपत में कपास के साथ-साथ पोलियस्टर कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है। अर्थात शहर बारूद के ढेर पर काम कर रहा है। उसके बावजूद भी आग के खतरों को रोकने का प्रबंध नहीं है।

बीते माह के दौरान सबसे बड़ी आग जाटल रोड स्थित एक्सपोर्ट हाउस में लगी। जिससे 12 परिवारों की घर से बेघर होना पड़ा। उद्योग के आसपास बने घरों तथा दुकानों को भी आग लगने से क्षति उठानी पड़ी। गनीमत यह रही की आग लगने से कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। उसके बाद ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में जिंदल स्पिनिंग मिल, चौटाला रोड पर बालाजी टेक्सटाइल में आग लगी। वर्ष 2007 में आरआर टेक्सटाइल मे आग लगने से 10 से अधिक श्रमिकों की जान गई थी। आग लगने के हादसा हर वर्ष बढ़ते जा रहे हैं।

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12000 हजार टेक्सटाइल उद्योग 600 पर एनओसी

पानीपत में 12 हजार से अधिक टेक्सटाइल उद्योग लगे हुए हैं। यहां 70-80 हजार करोड़ का कारोबार होता है। जिसमे से 15 हजार करोड़ का टेक्सटाइल निर्यात होता है। इन 12 हजार उद्योगों में 600 उद्योगों के पास ही फायर विभाग की एनओसी है। फायर विभाग की एनओसी उन्हीं उद्योगों को मिलती है जिनके यहां पानी का टैंक छह इंची पाइप लाइन बना हुआ। साथ आग बुझाने के यंत्र लगे हों। उद्योगों में पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। पोलिस्टर धागा कच्चे में माल में प्रयुक्त होने के कारण आगजनी के हादसे अधिक हो रहे हैं।

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जिन उद्योगों में एनओसी नार्मस पूरे नहीं

जिन उद्योगों को फायर ब्रिगेड ने एनओसी दी हुई है उनमें ज्यादातर में फायर ब्रिगेड के नार्मस पूरे नहीं होते हैं। तंगी गलियों में उद्योग लगे हुए है। दमकल की गाड़ियां यहां आ जा पा नहीं रही।

एक एकड़ की एनओसी पानीपत में 5 एकड़ की पंचकुला से मिलती है

फायर विभाग की एनओसी (नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेना महाभारत से कम नहीं है। एनओसी देने वालों के रेट निर्धारित है। इसी लिए एनओसी लेने वाले उद्योगों में भी नार्मस पूरे नहीं होते। आग लगने पर काबू नहीं पाया जकता। पानीपत में फायर विभाग ने तीन अधिकारी है। पहले एक अधिकारी था। उससे बाद भी समस्या ज्यों कि त्यों बनी हुई है।

दो चरण में मिलती है एनओसी

फायर की एनओसी दो चरण में मिलती है। पहले नक्शा, ड्राइंग आदि की एनओसी लेनी होती है। उसके बाद फैक्टरी बनने के बाद अलग से एनओसी लेनी होती है। दोनों मामले में सुविधा शुल्क अलग से देना होता है। इसी वजह से पानीपत में उद्यमी कम एनओसी ले पा रहे हैं। फायर विभाग के नार्मस पूरे नहीं कर पा रहे।

35 हजार लीटर क्षमता का टैंक लगाना होगा

नए नियमों के तहत 150000 लाख लीटर के स्थान पर 35 हजार लीटर का टैंक बनान होगा। 6 इंची पाइप लाइन लगानी होगी। एनओसी लेने वाले उद्यमी मोनो ब्लाक पंप लगाकर एनओसी ले लेते हैं। बड़े उद्योगों में फायर सिस्टम के लिए 30 लाख रुपये का खर्च होता है।

फायर सिस्टम अपनाने में खर्च अधिक

फायर ब्रिगेड के नए नियमों के अनुसार उद्योगों को पंप हाउस लगाना होता है। जिस पर 15 लाख रुपये का खर्च आता है। इसीलिए भी उद्योग एनओसी नहीं ले रहे हैं। एनओसी में सुविधा शुल्क की दरें ज्यादा होने पर फायर आफिसर ने बताया कि यह सब आरोप है। यह शिकायतें लगातार हो रही है। उद्यमी एनओसी स्वयं नहीं ले रहे। उन पर आरोप लगाए जाते हैं।

क्या बोले फायर आफिसर

कम उद्योगों में एनओसी होने के कारण का जवाब देते हुए फायर आफिसर रामेश्वर ने बताया कि पुराने एनओसी जिन उद्योगों ने ली हुई है। उनमें नार्मस पूरे नहीं हुए होंगे। नई एनओसी जिन उद्योगों दी जा रही है। उनमें नार्मस पूरे करवाकर ही एनओसी दी जा रही है।

एनओसी न लेने वालों को 600 नोटिस जारी 

फायर आफिसर रामेश्वर ने बताया कि फायर ब्रिगेड विभाग ने एनओसी न लेने वाले 600 उद्योगों को नोटिस जारी किया है। 30 दिन का समय पहले नोटिस में होता है। उसके बाद दूसरा , तीसरा नोटिस जारी होता है। यदि फिर भी एनओसी नहीं ली जाती तो उच्च अधिकारियों को लिखा जाता है। तीसरे नोटिस के बाद कार्रवाई की जाती है एक एकड़ मे फायर ब्रिगेड की एनओसी के लिए सुविधा शुल्क का एक लाख रुपये का रेट होने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ये आरोप गलत है। अनेक शिकायतें हमारी हो चुकी है। फायर सिस्टम न लगाने वाले उद्यमी ही ऐसे आरोप लगाते हैं।

 

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