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पानीपत

139 कराेड़ प्राॅपर्टी टैक्स में से 6 माह में मात्र 9.74 कराेड़ की रिकवरी, कमिश्नर सस्पेंड हाेते ही 3 माह में वसूले 7.10 कराेड़

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139 कराेड़ प्राॅपर्टी टैक्स में से 6 माह में मात्र 9.74 कराेड़ की रिकवरी, कमिश्नर सस्पेंड हाेते ही 3 माह में वसूले 7.10 कराेड़

 

नगर निगम ने वित्तीय सत्र 2020-21 में प्राॅपर्टी टैक्स रिकवरी टारगेट 139 कराेड़ रुपए रखा है। इसमें अप्रैल से सितंबर तक मात्र 9.74 कराेड़ रुपए ही रिकवर हुए ताे निगम के लिए विकास कार्य कराना ताे दूर अपने अधिकारियाें व कर्मचारियाें का वेतन तक देने के लाले पड़ गए। इसका पता चलते ही गृहमंत्री अनिल विज ने 22 अक्टूबर काे तत्कालीन कमिश्नर के निलंबित की सिफारिश कर दी।

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इस पर संज्ञान लेते हुए हरियाणा के चीफ सेक्रेट्री विजय वर्धन ने तत्कालीन निगम कमिश्नर सुशील कुमार को सस्पेंड किया ताे टैक्स निगम अधिकारी टैक्स रिकवरी में जुट गए। अब मात्र 3 माह में ही 7.10 कराेड़ रुपए रिकवर कर डाले। हब 16.84 कराेड़ रुपए रिकवर हाे चुके हैं। सबसे ज्यादा दिसंबर के 19 दिनाें में 5.50 कराेड़ रुपए रिकवर हुए।

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कैंप भी फायदेमंद

नगर निगम ने पहली बार प्राॅपर्टी टैक्स रिकवरी के लिए कैंप लगाए। अब तक अलग-अलग 6 कैंप लग चुके हैं। इनमें माैके पर ठीक हाेने वाले बिल सही किए जाते हैं और कैश जमा लिया जाता है। साथ ही शनिवार व अन्य छुट्टी वाले दिन कैश काउंटर खाेलना भी अच्छा रहा।

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बड़े डिफाॅल्टाराें पर कार्रवाई से मिला फायदा

शहर में 1.50 लाख से ज्यादा हाउस हैं। इनमें संस्थान भी हैं। 195 ऐसे बकाएदार हैं जिन पर 5 लाख रुपए से अधिक टैक्स बकाया है। जाेकि 194 करोड़ रुपए बनता है। पूरे शहर की बात की जाए ताे 259 करोड़ बकाया हैं। अब निगम बड़े प्राॅपर्टी टैक्स मालिकाें काे नाेटिस देकर सील भी कर रहे हैं। मित्तल मेगा माॅल, बिग बाजार, सर्राफा माल व राॅयल एनफील्ड समेत बड़े शाेरूम सील हुए शहरवासी टैक्स जमा कराने के लिए दाैड़ पड़े।

पुराने जमा बिलाें का रिकाॅर्ड नहीं, आईडी भी गलत

माइक्राे इंडस्ट्रियल वेल्फेयर एसाेसिएशन कार्यकारी प्रधान प्रमाेद शर्मा व सचिव संदीप महाजन ने कहा कि उन्हाेंने 2018 में प्राॅपर्टी टैक्स जमा कराए थे। उनकी जमा हुई राशि का अब काेई रिकाॅर्ड नहीं। अगर किसी के स्लिप नहीं ताे पैसे जमा कराने हाेंगे। हमारी फैक्ट्रियाें काे शाेरूम दिखा रखा है। प्राॅपर्टी आईडी भी गलत है। 3 लाख रुपए का बिल ठीक हाेकर 10 हजार 305 ही रह गया। ऐसी गलतियाें से परेशानी बढ़ी है।

 

 

 

Source : Bhaskar

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