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पानीपत

टीडीआई, एल्डिको और सेक्टर-40 निगम एरिया से बाहर, लेकिन प्रॉपर्टी आईडी मांग रहा सॉफ्टवेयर इसलिए नहीं हो रहीं रजिस्ट्रियां

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टीडीआई, एल्डिको और सेक्टर-40 निगम एरिया से बाहर, लेकिन प्रॉपर्टी आईडी मांग रहा सॉफ्टवेयर इसलिए नहीं हो रहीं रजिस्ट्रियां

रजिस्ट्री के लिए नया सॉफ्टवेयर क्या बना, प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों की मुसीबत बढ़ गई। जुलाई के आखिर से रजिस्ट्री शुरू हो गई, पर प्रॉपर्टी खरीदारों व बेचने वालों की मुसीबत कम नहीं हो रही है। वैसे तो सॉफ्टवेयर की कमियों से पूरे जिले के लोग परेशान हैं, लेकिन दोनों टीडीआई (सेक्टर-23 और फरीदपुर), सेक्टर-40 निजामपुर और एल्डिको की रजिस्ट्री पूरी तरह बंद हैं।

यहां कोई 1.50 करोड़ देकर फंसा है तो कोई स्टाम्प ड्यूटी खरीदकर बैठा है। सॉफ्टवेयर की कमियों से रजिस्ट्री के लिए टोकन हीं नहीं मिल रहा है। तहसील में प्रॉपर्टी आईडी की वजह से टोकन नहीं निकल रहा। नगर निगम से प्रॉपर्टी आईडी लेकर आओ। वहीं, निगम के अफसर कहते हैं कि ये निगम एरिया से बाहर है तो आईडी कहां से दे दूं।

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सॉफ्टवेयर की कमियों और लोगों को हो रही परेशानियों को आप इस तरह से समझिए

स्टाम्प ड्यूटी शहरी, ग्रामीण एरिया में हैं कॉलोनियां

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टीडीआई, एल्डिकाे या सेक्टर-40 एरिया। जब खरीदारों से स्टाम्प ड्यूटी लेने की बारी आती है तो शहरी एरिया के हिसाब से रजिस्ट्री के वक्त स्टाम्प ड्यूटी ली जाती है। शहर में जमीन खरीदने पर पुरुष से 7% और महिला से 5% स्टाम्प ड्यूटी। इसी तरह से गांव में पुरुष से 5% और महिला से 3% ली जाती है। सरकार ने इन कॉलोनियों को शहरी एरिया में तो डाल दिया, लेकिन रकबा ग्रामीण में आता है। जैसे चांदनी बाग थाना के पास सेक्टर-23 में बन रहे टीडीआई का रकबा रिसालू में आता है। अब सॉफ्टवेयर में टोकन के लिए आवेदन करता है तो शहर के हिसाब से प्रॉपर्टी आईडी मांगता है, लेकिन यह निगम एरिया से बाहर है। इसलिए इनका कोई प्रॉपर्टी आईडी है ही नहीं। इसलिए मामला फंस रहा है।

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सॉफ्टवेयर से पहले रजिस्ट्री हुईं, अब नहीं हो रहीं

सेक्टर-23 टीडीआई को ही ले लीजिए। नया सॉफ्टवेयर बनने से पहले लोगों की रजिस्ट्री हो रही है। 100 से अधिक लोगों ने टीडीआई से प्लाॅट खरीदकर तहसील से रजिस्ट्री कराई। लॉकडाउन के दौरान रजिस्ट्री रुकी, फिर नया सॉफ्टवेयर आया तो रजिस्ट्री रुक गई। लोगों का पैसा डेड हो गया है।

दो खरीदारों से जानिए कैसे परेशान हैं

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रजिस्ट्री नहीं होने से 1.50 करोड़ फंस गए : माटा

सेक्टर-23 टीडीआई में प्लॉट के लिए कंपनी को 1.50 करोड़ दिया था। 7 लाख की स्टाम्प ड्यूटी भी खरीद ली। अब रजिस्ट्री नहीं हो रही है। पैसे लगाकर फंस गए।
-ओपी माटा, सेक्टर-12 निवासी

साॅफ्टवेयर से नुकसान ही नुकसान : वरुण दुआ

टीडीआई में प्लॉट लिया। कंपनी वाले मेंटीनेंस चार्ज भी ले रहे हैं, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो रही है। रजिस्ट्री हो तो सरकार को पैसा मिलेगा। नया सॉफ्टवेयर बनाक नुकसान ही नुकसान किया है।
-वरुण दुआ, सेक्टर-12 निवासी

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सॉफ्टवेयर में बदलाव के लिए भेजा लेटर : तहसीलदार

सॉफ्टवेयर में कमियों की वजह से टीडीआई, एल्डिको सहित कुछ अन्य एरिया की जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो रही है। साॅफ्टवेयर में बदलाव के बिना यह नहीं होगा। डीसी के माध्यम से सॉफ्टवेयर को ठीक करने के लिए सरकार को लेटर भेज दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही चंडीगढ़ से सॉफ्टवेयर ठीक हो जाएगा। –डॉ. कुलदीप, तहसीलदार

 

दोनों विधायक चंडीगढ़ लेवल पर कराएंगे निदान, कमिश्नर दूर करेंगे निगम की तरफ से आ रही कमियां

आईडी है तो नाम गलत दिख रहा, नाम है तो प्रॉपर्टी आईडी दूसरी कॉलोनी की दिख रही

रजिस्ट्री में आ रही दिक्कत को देखते हुए दोनों विधायक शहर से प्रमोद विज और ग्रामीण महीपाल ढांडा ने सोमवार को नगर निगम और तहसील के अफसरों की संयुक्त मीटिंग बुलाई। विधायकों ने दोनों से जाना कि आखिर रजिस्ट्री क्यों नहीं हो रही है। अब तक तहसील नगर निगम तो निगम तहसील की कमियां बताता रहा है। इस कारण से यह बैठक बुलाई गई। बैठक में निगम के कमिश्नर सुशील कुमार ने निगम से जुड़ी कमियां, मसलन- प्रॉपर्टी आईडी तो है लेकिन नाम गलत है, नाम है तो प्रॉपर्टी आईडी दूसरी कॉलोनी की आ रही है।

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ऐसी की कमियों को कमिश्नर ने दूर करने का भरोसा दिया, जिस कारण से रजिस्ट्री नहीं हो पा रही हैं। वहीं तहसीलदार डॉ. कुलदीप ने कहा कि निगम से बाहर जो एरिया है, उसकी आईडी संबंधी कमियां चंडीगढ़ से ही ठीक होगी। इस पर विधायकों ने कहा कि चंडीगढ़ लेवल पर अफसरों से वे लोग बात करेंगे। बैठक में निगम के चीफ इंजीनियर महिपाल सिंह, ईओ बलबीर सिंह, पार्षद लोकेश नांगरू व रविंद्र भाटिया, पूर्व पार्षद अशोक छाबड़ा, अजमेर शर्मा व नरेंद्र जिंदल आदि उपस्थित रहे।

 

 

 

Source: Bhaskar

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