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उफ यह बेबसी… बेटी ऑक्सिजन के लिए रातभर लाइन में लगी रही, उधर मां चल बसी

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कोरोना संक्रमण के बीच ऑक्सिजन की किल्लत ने मरीज के साथ उसके परिवार को भी लाचार बना दिया है। अपनों की जान बचाने के लिए लोग घंटों लाइन में खड़े होकर ऑक्सिजन सिलिंडर का इंतजाम कर रहे हैं लेकिन फिर भी कई बार खाली हाथ रह जा रहे हैं। ऐसे ही दिल्ली से एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहां एक बेटी अपनी बीमार मां के लिए ऑक्सिजन सिलिंडर को रिफिल कराने एक गैस एजेंसी के बाद मंगलवार रात से खड़ी रही। आज सुबह जब उसकी बारी आई तो अचानक फोन घनघनाने लगा। दूसरी ओर से किसी ने बताया कि मां अब नहीं रही। दुख और बेबसी का आलम ऐसा कि वह बेटी वहीं घुटनों के बल बैठकर जोर-जोर से रोने लगी। दिल्ली की यह तस्वीर सभी को रुला गई।

बेटी रातभर लाइन में लगी रही, लेकिन मां नहीं बच सकी


दिल्ली की श्रुति साहा शायद आज खुद को दुनिया की सबसे ज्यादा बेबस बेटी मान रही होंगी। उनकी मां कई दिन से ऑक्सिजन सपोर्ट पर थी। वह अपनी मां के लिए एक वर्कशॉप पर सिलिंडर रिफिल कराने मंगलवार रात को पहुंची थी। उधर मां की सांसें लगातार उखड़ती जा रही थी और इधर श्रुति का सब्र भी जवाब दे रहा था। आखिरकार जब बुधवार सुबह उनकी बारी आई तो किसी ने बताया कि मां अब नहीं रही। यह सुनते ही श्रुति पूरी तरह टूट गईं और घुटने के बल बैठकर जोर-जोर से चीखने लगीं।

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अस्पताल में बेड नहीं तो ऑटोरिक्शे में इंतजार

यह तस्वीर अहमदाबाद की है। अमीन बानो मेमन को कोरोना के लक्षण हैं। उनका ऑक्सिजन लेवल गिरता जा रहा है। स्थिति बिगड़ते देख घरवाले अस्पताल लेकर गए लेकिन वहां बेड न होने की बात बोलकर इंतजार करने को कहा गया। मुंह में ऑक्सिजन मास्क लगाए अमीन एक ऑटोरिक्शा में ही बैठकर इंतजार करने लगीं।

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ऑक्सिजन सिलिंडर के लिए मारामारी


कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ऑक्सिजन को लेकर सबसे ज्यादा मारामारी है। लोग एक बार किसी तरह अपनों के लिए ऑक्सिजन सिलिंडर का जुगाड़ कर ले रहे हैं तो दूसरी बार उसे रिफिल कराने में संघर्ष करना पड़ रहा है। दिल्ली के एक रिफिलिंग फैक्ट्री में लोग ऑक्सिजन सिलिंडर को रिफिल कराने के लिए लाइन में लगे रहे।

डेढ़ साल की बच्ची ने ऐंबुलेंस में तोड़ दिया दम

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अगली तस्वीर आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से हैं। यहां एक डेढ़ साल की बच्ची ने इलाज के अभाव में ऐंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। बच्ची कोविड पॉजिटिव थी और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उसके माता-पिता लगातार एक घंटे तक इलाज की गुहार लगाते रहे। बच्ची के पिता ऐंबुलेंस में ही ऐंबु बैग से ऑक्सिजन पंप करते रहे। आखिरकार जब भर्ती कराने की बारी आई तो बच्ची की सांसें हमेशा के लिए बंद हो गई।

Source : NavBharat

 

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