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रोडवेज़ बस के किराए में बड़ा बदलाव, लोकल हो या लोंग रूट किराया एक बराबर

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रोडवेज़ बस के किराए में बड़ा बदलाव, लोकल हो या लोंग रूट किराया एक बराबर

 

कोरोना महामारी में यात्रियों की कमी से जहां परिवहन व्यवस्था बेपटरी है, वहीं रोडवेज बसों में लांग रूट और लोकल रूट के किराये में अंतर यात्रियों और परिचालकों में झगड़े करा रहा। सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के बाद ही टिकट पर पांच पैसे प्रति किमी अतिरिक्त किराया वसूला जाए, लेकिन कई जगह लोकल यात्रियों से भी अधिक किराया वसूला जा रहा। इसके अलावा खुले पैसों को लेकर बसों में विवाद के चलते अब पांच के गुणक में किराया निर्धारित करने की तैयारी है। कैबिनेट की अगली बैठक में राउंड फिगर में किराये का प्रस्ताव पारित होगा।

राउंड फिगर में होगा बस किराया, लांग रूट और लोकल रूट के किराये में अंतर से विवाद

सौ किलोमीटर तक की यात्रा पर एक रुपये और इससे अधिक सफर पर एक रुपये पांच पैसे प्रति किमी किराया

प्रदेश सरकार ने 30 मार्च को साधारण बसों के किराये को 85 पैसे प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 100 किलोमीटर तक एक रुपये प्रति किलोमीटर तथा इससे अधिक दूरी की यात्रा के लिए एक रुपये पांच पैसे प्रति किलोमीटर निर्धारित किया था। कई परिचालकों को नियम की सही से जानकारी नहीं होने से अलग-अलग किराया लिया जा रहा। लांग रूट की बसों में बीच के स्टेशन से चढऩे-उतरने वाली सवारी से भी एक रुपये पांच पैसे प्रति किमी वसूले जाने से यात्रियों को परिचालक से उलझते देखा जा सकता है।

उदाहरण के लिए एक बस पहले फतेहाबाद से सिरसा जाती है और उसके बाद सिरसा से चंडीगढ़ या जयपुर। फतेहाबाद से सिरसा तक पहले जाते हुए 47 रुपये किराया है और उसी बस में वापस आने पर 49 रुपये किराया हो जाता है। हालांकि किराया राउंड फिगर में कर दिया जाए तो सारी समस्या खत्म हो जाएगी।

राउंड फिगर में ऐसे लगता किराया

मार्च तक रोडवेज बसों में राउंड फिगर में किराया लिया जा रहा था। यानी किसी रूट पर 42 रुपये किराया लगता था तो यात्री से 40 रुपये लिए जाते थे और किराया 43 होने पर 45 रुपये। इससे खुले पैसों का झंझट नहीं पड़ता था। मौजूदा समय में यह सिस्टम खत्म करने से काफी दिक्कतें आ रही हैं।

पंजाब-हिमाचल और जम्मू-कश्मीर नहीं दे रहे अनुमति, राजस्थान ने भी रोकी एंट्री

 

पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हरियाणा रोडवेज की बसों को चलाने की अनुमति नहीं मिल पा रही। बुधवार को राजस्थान ने भी सीमाएं सील कर बसों की एंट्री रोक दी। परिवहन निदेशालय के अधिकारी लगातार दूसरे राज्यों के अफसरों से संपर्क में हैं, लेकिन हरी झंडी नहीं मिल पा रही। यात्रियों की कमी से आलम यह है कि किलोमीटर स्कीम की 485 बसों सहित रोडवेज की 4294 बसों में एक चौथाई भी नहीं चल पा रहीं। पहले रोडवेज बसें रोजाना लगभग 10.38 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर 9.65 लाख लोगों को गंतव्य तक पहुंचा रहीं थी, लेकिन फिलहाल यात्रियों की संख्या नाममात्र है।

नहीं ले सकते अधिक किराया : दहिया

” कोई भी परिचालक यात्रियों से अधिक किराया नहीं ले सकता। चाहे बस कहीं से आ रही हो, 100 किलोमीटर की दूरी से कम सफर पर 100 पैसे प्रति किलोमीटर किराया लगेगा और इससे अधिक यात्रा पर 105 पैसे प्रति किलोमीटर। राउंड फीगर में किराया लेने के लिए हमने सरकार से सिफारिश की है। उम्मीद है कि कैबिनेट की अगली बैठक में इसे मंजूरी मिल जाएगी। जहां तक अंतरराज्यीय रूटों पर बस सेवा का सवाल है, हम दूसरे राज्यों के अधिकारियों से संपर्क में हैं। वहां से हरी झंडी मिलते ही बस सेवा बहाल हो जाएगी

– डॉ. वीरेंद्र दहिया, परिवहन निदेशक, हरियाणा।