Connect with us

पानीपत

Weather Update: पानीपत सहित आसपास के जिलों में बूंदाबांदी से ठिठुरन बढ़ी, जानिए 6 जनवरी को कैसा रहेगा मौसम

Published

on

Advertisement

Weather Update: पानीपत सहित आसपास के जिलों में बूंदाबांदी से ठिठुरन बढ़ी, जानिए 6 जनवरी को कैसा रहेगा मौसम

 

देर रात को तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। मंगलवार सुबह तक बूंदाबांदी चलती रही। हवा और बूंदाबांदी से एक साथ ठिठुरन बढ़ गई। सुबह के समय दैनिक कार्य को जाने वाले लोग भी देरी से निकल पाए।

Advertisement

कई दिन की तेज धुंध के बाद पिछले दो दिन से बूंदाबांदी आने से कुछ राहत मिली थी। सोमवार को दिनभर धूप खिली रही। इससे अधिकतम तापमान एकाएक बढ़ गया था। लोगों ने ठंड से कुछ राहत ली थी। सोमवार देर रात को तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। यह रातभर चलती रही।

वहीं कुरुक्षेत्र में भी बूंदबांदी जारी रही। मंगलवार सुबह भी बूंदाबांदी चलती रही। मंगलवार को अधिकतम तापमान 22 और न्यूनतम तापमान 14 दर्ज किया गया।

Advertisement

Weather

कैथल में रातभर हुई बरसात

Advertisement

सोमवार शाम के समय हुई बरसात के बाद मंगलवार सुबह पांच बजे फिर बरसात शुरू हो गई। जो तड़के सात बजे तक जारी रही। बरसात के बाद न्यूनतम तापमान में फिर गिरावट आई है। इस बरसात से जहां सुबह के समय पड़ने वाली धुंध छंटी है। वहीं, इससे गेहूं की फसल को भी कोई नुकसान नहीं है। जबकि सब्जियों की फसल को नुकसान हो सकता है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 11 डिग्री रहा था, जो मंगलवार सुबह के समय नौ डिग्री दर्ज किया गया है। जिले में कुल बरसात तीन एमएम दर्ज की गई। सोमवार को दिन में तो अधिकतम तापमान सबसे अधिक 21 डिग्री दर्ज किया गया था। मौसम विभाग के अनुसार अभी अगले दो दिन तक लगातार बरसात होने की संभावना बनी है। बरसात के बंद होने के बाद मौसम में फिर से गहरी धुंध छाएगी।

पानीपत में देर रात से बूंदबांदी शुरू हो गई।

अधिक बरसात हुई सब्जियाें को होगा नुकसान

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानित डा. रमेश चंद वर्मा ने बताया कि इस बरसात से गेहूं को सरसों की फसल को कोई नुकसान नहीं है। जबकि सब्जियों में आलू और टमाटर की फसल को नुकसान हो सकता है। वर्मा ने बताया कि इस समय आलू की फसल पककर तैयार हो जाती है। जिसे इस समय उगाए गए आलू की फसल को निकालने का कार्य किया जाता है। जिस कारण अधिक बरसात होने से इसका अधिक नुकसान होने की संभावना है। किसानों से आग्रह है कि वह सिंचाई करने से पहले कृषि वैज्ञानिक की सलाह लें। ऐसा करने से वह नुकसान से बच सकेंगे।

 

Source : Jagran

Advertisement

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *