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पानीपत

क्या ज़बरदस्ती Positive रिपोर्ट दी जाती है ? टेस्टिंग वैन देख भाग जाते लोग, बंद कर देते है दुकानें

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क्या ज़बरदस्ती Positive रिपोर्ट दी जाती है ? टेस्टिंग वैन देख भाग जाते लोग, बंद कर देते है दुकानें

 

करनाल में कोरोना संक्रमण और इससे मौत के आंकड़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में बीमार होने पर केमिस्ट या झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में न पड़ें। यह कहना है करनाल के सिविल सर्जन डा. योगेश शर्मा का।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों में आइएलआइ के लक्षण होते हैं, वे केमिस्ट से दवाई ले लेते हैं या फिर किसी झोलाछाप डॉक्टरों के संपर्क आते हैं। धीरे-धीरे मरीज की स्थिति खराब होती चली जाती है। वह उस स्टेज में हमारे पास आता है, जब वह उसके बचने की संभावना न के बराबर हो जाती है। सिविल सर्जन ने कोरोना को लेकर समाज में फैली कई भ्रांतियों पर भी बातचीत की। आइये जानते हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल : कोरोना के केस लगातार बढ़े हैं? उसके क्या कारण हैं?

जवाब : इसके दो कारण हैं। पहला कारण-हमने टेस्टिंग के दायरे को बढ़ा दिया। रोजाना औसत 1500 सैंपलों की जांच की जा रही है, दूसरा कारण- लोगों की आवाजाही बढ़ी है। इससे भी कोरोना संक्रमण के मामले ज्यादा सामने आए हैं।

सवाल : कोरोना की चेन तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग क्या कदम उठा रहा है?

जवाब : स्वास्थ्य विभाग ने टेस्टिंग बढ़ाई है, इससे काफी हद तक कोरोना नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। सरकारी तंत्र के साथ-साथ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का भी स  हयोग मिला है। प्राइवेट टेस्टिंग भी शुरू हो गई है। जिले के 10 एनएबीएच अस्पतालों की जिम्मेदारी बढ़ाई है। दो कोर लैब भी टेस्टिंग कर रही हैं।

सवाल : बाजार में सैंपलिंग की जा रही है, वैन देखते ही दुकान बंद कर देते हैं ऐसा क्यों?

जवाब : यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसा हो रहा है। क्योंकि लोगों के सहयोग के बिना इस महामारी से नही जीता जा सकता। इमरजिंग हॉटस्पॉट पर हमारी वैन जाती है और वहां से सैंपल लेती है। जहां पॉजिटिव केस मिलता है, दुकानों को बंद नहीं करते, बल्कि सैनिटाइज कराकर उसे खुलवा दिया जाता है। पॉजिटिव केस को होम आइसोलेट कर दिया जाता है।

सवाल : एक अफवाह फैली हुई है? कि जबरदस्ती पॉजिटिव लिख दिया जाता है? इसमें कितनी सच्चाई है?

जवाब : यह कोरी अफवाह है। ऐसा संभव नहीं है। रैपिड एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट बिल्कुल ठीक है। जिसमें वायरल लोड अधिक होता है वह संक्रमण मिल रहा है। जो इस टेस्ट में पॉजिटिव आता है उसे एनटीपीसीआर कराने की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसा नहीं है कि एंटीजन टेस्ट में पॉजिटिव और आरटीपीसीआर में नेगेटिव रिपोर्ट आएगी।

सवाल : कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा अचानक क्यों बढ़ गया?

जवाब : लोगों को आइएलआइ के लक्षण होते हैं वे केमिस्ट या फिर झोलाछाप से दवाई ले लेते हैं। जिससे तबीयत बिगड़ती चली जाती है। वह उस स्टेज में हमारे पास आता है, जब उसके बचने की संभावना न के बराबर हो जाती है। इसलिए लोगों से आग्रह है कि वे चिकित्सक की सलाह से ही दवाई लें। सांस लेने में तकलीफ है तो तुरंत अस्पताल में संपर्क करें।

सवाल : कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में बेड नहीं मिलने की कई घटनाएं सामने आई हैं, ऐसा क्यों?

जवाब : कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में 450 बेड उपलब्ध हैं। सभी पर ऑक्सीजन की सुविधा है। बेड की कोई कमी नहीं है। पारदर्शिता के लिए जिला प्रशासन की वेबसाइट पर बेड की उपलब्धता दिखाई जाए, इसके लिए डीसी से आग्रह किया गया है। इसके अलावा आइसीयू में 30 बेड हैं, जिसे बढ़ाया जा रहा है। अमृतधारा अस्पताल में 40, पार्क अस्पताल में 10 व सिग्नस अस्पताल में 15 बैड की व्यवस्था भी कराई गई है।

सवाल : होम आइसोलेट मरीजों की देखरेख न करने के आरोप विभाग पर लगे हैं? इसे कैसे देखते हैं?

जवाब : आइएमए की टीम भी होम आइसोलेट मरीजों को फोन कर हालचाल जान रही है। इन मरीजों का घर पर जाकर चेकअप किया जा रहा है। इन्हें मेडिसिन किट भी उपलब्ध कराई जा रही है। 50 वर्ष की आयु से अधिक मरीजों को पल्स ऑक्सीमीटर भी दिया जा रहा है, ताकि वे जांच करते रहें। मरीजों के घर पर विजिट करने के लिए टीमों का गठन किया गया है।

सवाल : लोग कह रहे हैं कि कोरोना के टेस्ट के पैसे लिए जा रहे हैं क्या ऐसा है?

जवाब : नहीं ऐसा नहीं है। सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में आरटीपीसीआर व एंटीजन की फ्री टेस्टिंग हो रही है। जिन्हें कोविड नहीं है और उन्हें कोविड की रिपोर्ट चाहिए, चाहे वह नौकरी की ज्वाइनिंग के लिए हो, या फिर विदेश जाना हो उसके लिए हम अलग काउंटर खोल रहे हैं, ताकि कोरोना मरीजों से इन्हें अलग रखा जाए। इनके लिए आरटीपीसीआर के लिए 1600 रुपये व एंटीजन टेस्ट के लिए 650 रुपये की राशि निर्धारित की गई है।

 

 

Source : Bhaskar

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