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पानीपत

कंपनी की गलतियों का खामियाजा भुगत रहे उपभोक्ता

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कंपनी की गलतियों का खामियाजा भुगत रहे उपभोक्ता

 

कंपनी द्वारा की गई गलत रीडिग और बिलिग का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। कंपनी की गलती ने काफी उपभोक्ताओं को विभाग की डिफाल्टर सूची का हिस्सा बना दिया है। डिफाल्टरों के प्रति बिजली निगम ने सख्ती बरतनी शुरू की तो इससे बचने के लिए उपभोक्ताओं को गलत बिल ठीक कराने के लिए कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। हर सब डिवीजन में प्रतिदिन काफी संख्या में उपभोक्ता गलत बिलों को ठीक कराने के लिए पहुंच रहे हैं।

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कंपनी की गलतियों का खामियाजा भुगत रहे उपभोक्ता

बिल लाखों में आए

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सेक्टर 12स्थित इंडस कंपनी का टेलीफोन टावर है। उसका 20 किलोवाट का कनेक्शन है। कंपनी ने अगस्त माह में पौने दो लाख रुपये का बिल जमा किया। रीडिग व बिल बांटने वाली कंपनी के कर्मचारियों ने अक्टूबर माह में 35 लाख 32 हजार 211 रुपये का बिल बनाकर भेज दिया। विभागीय कर्मचारियों द्वारा ठीक कराने पर वो केवल 67 हजार 949 रुपये बना। सेक्टर 1 निवासी महेश कुमार का सितंबर माह तक का 4 लाख 41 हजार 750 रुपये बिल भेज दिया गया। उपभोक्ता ने ज्यादा बिल भेजे जाने की शिकायत दर्ज कराई तो बिजली निगम कर्मियों ने मीटर व रीडिग की जांच की। रीडिग के आधार पर बिल 1 लाख 47 हजार 250 रुपये का बना।

इसी तरह सेक्टर 12 स्थित एक बैंक बिल्डिंग का भी 24 लाख रुपये से ज्यादा का बिल बनाकर भेज दिया गया। बाद में जब इसे ठीक कराया गया तो यह तीन लाख से भी कम हो गया।

निगम ने तैयार की डिफाल्टर उपभोक्ताओं की लिस्ट

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निगम ने डिफाल्टर उपभोक्ताओं से वसूली को लेकर सख्ती शुरू कर दी है। इसको लेकर छोटे व बड़े डिफाल्टरों की सूची तैयार की जा रही है। सनौली रोड सब डिवीजन में भी एक लाख से ज्यादा बिल बकाया वाले डिफाल्टर उपभोक्ताओं की संख्या सौ से ज्यादा है। हालांकि उनमें से ज्यादा उपभोक्ता कंपनी की गलत रीडिग व बिलिग का शिकार हैं।

 

 

Source : Jagran

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