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पानीपत

कोरोना वायरस संक्रमण के साइड इफेक्‍ट, सावधानी बरतें, हृदय की मांसपेशियों में आती हैं सूजन

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कोरोना वायरस संक्रमण के साइड इफेक्‍ट, सावधानी बरतें, हृदय की मांसपेशियों में आती हैं सूजन

 

अगर आप कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित हो चुके हैं या संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं तो सावधान रहने की जरूरत है। संक्रमण से उबरने के बाद हृदय की मांसपेशियों में सूजन आ रही है।

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कोरोना वायरस संक्रमण के साइड इफेक्‍ट, सावधानी बरतें, हृदय की मांसपेशियों में आती हैं सूजन

कुछ अध्ययनों में पता चला है कि कोरोनो वायरस से संक्रमित रोगियों में मायोकार्डिटिस की प्रस्तुति पायी गयी है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है, जिससे हृदय असामान्य रूप से कार्य करने लगता है। यह बातें नागरिक अस्पताल छावनी के हार्टसेंटर में मेडिट्रीना अस्पताल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डा. राघव शर्मा ने कही।

इस तरह की समस्‍या ज्‍यादा

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उन्होंने बताया कि ऐसी संभावना है कि कोरोनो से संक्रमित मरीज दिल से संबंधित लक्षण जैसे कि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, ईसीजी में बदलाव और टॉक्सिन के स्तर में वृद्धि कर सकते हैं। कोरोना वायरस ऐसी बीमारी है जिससे इंटरल्यूकिन और साइटोकिन एंजाइम के रिलीज के माध्यम से सूजन का कारण बनता है।

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हृदय को प्रभावित कर रहा

यह हृदय की मांसपेशियों की सूजन पैदा करके हृदय को प्रभावित कर सकता है, जिसे मायोकार्डिटिस के रूप में जाना जाता है। यह धमनियों में बाधा भी पैदा कर सकता है, जिससे दिल का दौरा पड़ सकता है। यह अच्छी बात है कि संक्रमण के कम होने या चले जाने के साथ ही हृदय पर कोविड संक्रमण के हानिकारक प्रभाव अपने आप कम होने लगते हैं। सामान्य रूप से एक स्वस्थ हृदय के साथ अपना मरीज जीवन यापन कर सकता है।

 

विश्व हृदय संघ कहता है कि यदि आप पहले से ही किसी तरह के अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थिति से अगर प्रभावित है। जैसे कि हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप या मोटापा, कोविड आपको अपनी अन्य नियमित जांच करवाने से नहीं रोकता है। जरूरत पड़ने पर आपातकालीन सेवाओं का उपयोग करने से हिचकिचाए नहीं, क्योंकि चिकित्सक एवं मेडिकल टीम पूरी सुरक्षा के साथ आपकी देखभाल करने के लिए तत्पर रहती हैं।

मायोकार्डिटिस का कारण

मायोकार्डिटिस के तहत सूजन संबंधी एटियलजि के साथ हृदय की मांसपेशियों की बहुत सारी विषाणुओं का अर्थ होता है, जो कि दिल की मांसपेशियों के विभिन्न घावों और विकारों से प्रकट होता है। इस बीमारी के सबसे अधिक कारणों में से एक है सभी तरह के संक्रमण, जैसे कि हेपेटाइटिस बी और सी, इन्फ्लूएंजा , हर्पीस , एडेनोवोरस। इसके अलावा बीमारी के विकास में बैक्टीरिया, कवक और परजीवी, अर्थात् साल्मोनेला, कोरीनोबैक्टेरिया डिप्थेरिया, स्ट्रेप्टोकोकी, रिक्टेटिया, स्टेफिलोकोकस और क्लैमाइडिया की एक किस्म को भड़काना पड़ सकता है; कैंडिडा और एस्पेरिगाला; इचिनोकोकी और ट्रिचिनाला, और अन्य।

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