Connect with us

पानीपत

मिलिए पानीपत की कैप्‍टन बेटी से, राजपथ पर शिल्‍का इनके हवाले, इतनी खतरनाक है ये गन

Published

on

Advertisement

मिलिए पानीपत की कैप्‍टन बेटी से, राजपथ पर शिल्‍का इनके हवाले, इतनी खतरनाक है ये गन

गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर भारतीय सेना अपनी ताकत दिखाएगी। परेड में आर्मी की एंटी एयरक्राफ्ट गन अपग्रेडेड शिल्का को पहली बार शामिल किया गया है। इसी के साथ महिलाओं का शौर्य क्षितिज पर दिखेगा। पानीपत वासियों के लिए अधिक गौरव की बात यह कि सेना ने शिल्का की कमांड गांव बिंझौल की बेटी एवं 140 वायु रक्षा रेजिमेंट की कैप्टन प्रीति चौधरी को सौंपी है।

प्रीति चौधरी के पिता इंद्र सिंह आर्मी से रिटायर्ड कैप्टन हैं। पैतृक घर गांव बिंझौल में है। सर्विस के दौरान पिता की पोस्टिंग कई जगह होने के कारण बारहवीं तक उन्होंने आठ स्कूल बदले। सेवानिवृत्ति के समय इंद्र सिंह ने चंडीगढ़ के नजदीक गांव जीरकपुर में घर बना लिया।

Advertisement

पानीपत के गांव बिंझौल की बेटी कैप्‍टन प्रीति चौधरी।

प्रीति ने चंडीगढ़ के कालेज जीजीजी-11 से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। कालेज में ही उन्होंने एनसीसी ज्वाइन की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सर्विस सलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) का टेस्ट क्लीयर किया था। इसके बाद आफिसर ट्रेनिंग कैंप चेन्नई में ट्रेनिंग पूरी की। 10 मार्च 2018 को चेन्नई कैंप में हुई पासिंग आउट परेड में प्रीति (उस समय लेफ्टिनेंट) को प्रतिष्ठित स्वार्ड आफ अवार्ड से सम्मानित किया गया था। पिता इंद्र सिंह ने दैनिक जागरण को बताया कि वर्तमान में कैप्टन प्रीति की पोस्टिंग अंबाला में है।

Advertisement

Preeti Republic day

अकेली महिला कमांडर

Advertisement

एंटी एयरक्राफ्ट गन की कमान संभालने वाली प्रीति चौधरी सेना की ओर से अकेली महिला टुकड़ी कमांडर हैं। पिता के माध्यम से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि रेजिमेंट का उपकरण होने के चलते उन्हें यह गौरव हासिल हुआ है, जैंडर के कारण नहीं।

 

शिल्का की 2.5 किमी तक मार

एंटी एयरक्राफ्ट गन को भारत इलेक्ट्रोनिक्स ने अपग्रेड किया है। इसके ड्यूल इंजिन को आधुनिक बनाया गया है। आधुनिक कंप्यूटर डिफेंस प्रणाली से लैस है। जमीन पर दो किमी. तक दुश्मन के ठिकानों को टारगेट कर सकती है। हवा में इसकी मार 2.5 किमी. तक है।

पिता को मानती हैं आदर्श 

प्रीति ने अपने पिता को हमेशा वर्दी में देखा। पिता के अनुशासन, वर्दी में उनकी चाल-ढाल ने उसके दिमाग पर छाप छोड़ी। नतीजा, उसने भी सेना में जाने का निर्णय लिया। उसी हिसाब से तैयारी भी की। मां सुनीता शिक्षिका हैं। बड़ी बहन साफ्टवेयर इंजीनियर है। छोटा भाई बीटेक करने के बाद किसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी कर रहा है।

 

Advertisement

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *