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पानीपत

मंदी के दौर में टाउन प्लानिंग की दमनकारी कार्यवाही का खौंफ़ – कैसे चलेगा पानीपत

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“आज इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की वर्किंग कमेटी की और अन्य एसोसिएशन के प्रधानों के साथ मीटिंग हुई जिस जिसमें फैसला किया गया अगर प्रशासन डीटीपी की कार्रवाई के विरुद्ध कोई कोई फैसला नहीं लेता तो अगले सप्ताह सभी फैक्ट्री मालिक अपनी फैक्ट्री की चाबीया विधायक जी को या एम पी महोदय को सौंप देंगे “

आख़िर क्यों लेना पड़ा ये फ़ैसला ?

पानीपत शटल लैस एसोसिएशन के प्रधान भीम सचदेवा की फैक्ट्री तोड़ने के विरोध में शहर की औद्योगिक व व्यापारिक एसोसिएशनों की बैठक हुई थी। उद्यमियों ने कहा कि यदि डीटीपी का तबादला नहीं किया जाता है तो उद्यमी अपनी फैक्टरियों की चाबियां जनप्रतिनिधियों विधायक, सांसद को सौंप देंगे। उद्यमियों ने कहा कि जिले में कोई नया औद्योगिक सेक्टर नहीं बनाया जा रहा है। 30-40 साल पहले अपनी मेहनत से उद्योग खड़े किए गए, उन्हें क्यों तोड़ा जा रहा है। शहर में कॉलोनाइजर से मिलकर अवैध कालोनियां बनाई जा रही है।

व्यापारी काम करना चाहता है, उद्योग लगाना चाहता है ताकि वह खुद भी आत्मनिर्भर बन सके और पानीपत व देश को विश्व के मानचित्र पर उभार सकें। मगर पानीपत में सब साधन, लेबर, कारीगर होने के बावजूद बस इंडस्ट्री के प्लॉट नहीं है, तो ऐसे में बाहरी सीमा से लगते इलाक़ों में लोग फ़ैक्टरी बनाते है और वहाँ हज़ारों लोगों को रोज़गार देते है। मगर सीएलयू एक ऐसा रोड़ा बन जाता है जिसको हासिल करने तो कोई अंबानी या अडानी चाहिए जिसकी “सबसे भ्रष्ट विभाग – टाउन प्लानिंग” में जड़ तक पकड़ हो।

तभी तो अम्बानी का जीयो, और अडानी की गैस पाइपलाइन पूरे शार्क को खोद जाति है कोई उफ़ नहीं करता, यहाँ शहर को बनाने वाले उद्योगपति की फ़ैक्टरी सिर्फ़ इसलिए तोड़ गए क्यूँकि एक जमाबंदी का सरकारी काग़ज़ फ़ाइल में कम था।

जनाब एक आम व्यापारी के किए पटवारी से लेकर टाउन प्लानिंग के अफ़सरों और क्लर्क तक कितना चढ़ावा देना पड़ता है, फ़ाइल पर वजन रख-रख कर व्यापारी का वजन उस बेबुनियाद काग़ज़ जैसा हो जाता है जिसपर विधायक व सांसद अपने वादे लिखकर आपका वोट माँगने आए थे।

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