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पानीपत

चिप लगाकर रिमोट से चला रहे थे बिजली मीटर

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चिप लगाकर रिमोट से चला रहे थे बिजली मीटर

 

शक के आधार पर उतारे गए मीटरों की लैब में जांच हुई तो बिजली चोरी का हाईटेक तरीका सामने आया। इसे देख अधिकारी भी हैरान रह गए। मीटर में चिप लगाकर रिमोट से बिजली को कंट्रोल किया जा रहा था। सेंसर तकनीक पर चिप लगे मीटरों के मिलने के बाद महकमा हरकत में आ गया है। उपभोक्ताओं पर जुर्माना लगाया गया है। दोबारा से ऐसा करने पर एफआइआर भी दर्ज हो सकती है।

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गौरतलब है कि सब अर्बन सब डिवीजन के गांव भैंसवाल में बिजली निगम ने लाइन लॉस कम होने पर म्हारा गांव, जगमग गांव योजना के तहत 24 घंटे बिजली सप्लाई शुरू कर दी है। कोई चोरी न कर सके, इसको लेकर विभागीय टीम लगातार नजर रखे हुए है।

चिप लगाकर रिमोट से चला रहे थे बिजली मीटर

इतनी सतर्कता के बावजूद उपभोक्ताओं ने बिजली चोरी करने के लिए अब नया तरीका ईजाद कर लिया है। एसडीओ आदित्य कुंडू ने बताया कि करीब पंद्रह दिन पहले उन्हें भैंसवाल गांव में कुछ उपभोक्ताओं द्वारा मीटरों के साथ छेड़छाड़ कराने का इनपुट मिला था। उस आधार पर गांव से करीब पच्चीस उपभोक्ताओं के मीटर उतारे गए। जिनमें से कई की स्क्रीन आदि में दिक्कत मिली। बारह मीटर को जांच के लिए करनाल लैब भेजा गया। वहां जांच के दौरान सात मीटर में चिप लगाकर रिमोट से बिजली कंट्रोल करना सामने आया है। उक्त सभी उपभोक्ताओं पर करीब साढ़े तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एसडीओ ने कहा कि यदि दोबारा से कोई उपभोक्ता ऐसा करता है तो उनके खिलाफ केस भी दर्ज कराया जाएगा।

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मीटर के पीछे से किया सुराख

एसडीओ ने बताया कि उपभोक्ताओं ने मीटर के पीछे से होल कर करंट वायर के बीच में सेंसिग तकनीक पर आधारित चिप लगा रखी थी। रिमोट चिप की मदद से मीटर को संचालित किया जा रहा था। होल को एलफी से बंद कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि करंट वायर के साथ में लगी चिप मीटर के अंदर करंट को कम जाने देती है। ऐसे में यूनिट कम निकलती है। एसडीओ ने बताया कि चिप व रिमोट के जरिये मीटर कंट्रोल होने पर करीब 60 फीसद यूनिट कम निकलती हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले भी भैंसवाल में ऐसे हा मामला पकड़ा गया था।

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उपभोक्ता कर सकते हैं मदद

एसडीओ ने कहा कि उपभोक्ता चाहें तो विभाग की मदद कर सकते हैं। मीटर के अंदर छेड़छाड़ करना संभव नहीं है। रिमोट आधारित चिप भी यहां नहीं मिल रही है। ऐसे में उसे कहां से मंगाया गया और इसे लगवाने में कितने रुपये खर्च किए हैं। इस गुत्थी को सुलझाने में यदि उपभोक्ता विभाग की मदद करते हैं तो ऐसा करने वालों को भी पकड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग का कोई कर्मचारी इसमें संलिप्त मिला तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।

 

 

 

 

Source : Jagran

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