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पानीपत

कामगारों की बल्ले-बल्ले, एसी बस भेज बुला रहे किसान

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कामगारों की बल्ले-बल्ले, एसी बस भेज बुला रहे किसान

 

कोरोना महामारी के बाद बदले हालातों ने इस साल धान की रोपाई को भी संकट में डाल दिया है। लेकिन जिला के किसानों ने हार नहीं मानी है। बल्कि खेती को जारी रखने के लिये हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। बेशक किसान खुद नोवा गाड़ी की सवारी न कर सकें। परंतु कामागारों को बिहार से लाने के लिए नोवा गाड़ी से लेकर बसें तक भेजी जा रही हैं। जिन पर प्रति कामगार किसान को अढ़ाई से पांच हजार रुपये तक महंगा पड़ रहा है। खैर इससे कामगारों का भी हौसला बढ़ा है।

कामगारों की बल्ले-बल्ले, एसी बस भेज बुला रहे किसान

तीन बसों को भेजा गया था बिहार 

गांव जलबेहड़ा के सुखविंद्र सिंह ने बताया कि उनके गांव से तीन बसों को बिहार भेजा गया था। उनमें से एक बस बिहार के मधेपुर जिला में गई थी। जिसके चलते बस में 45 कामगारों को लाया गया है। इनमें उन्हें अढा़ई हजार रुपये प्रति कामगार का किराया देना पड़ा है। किसी एक किसान पर बोझ न पड़े तो इसके लिए चार-चार किसानों का ग्रुप इकट्ठा होकर कामगारों के लिए बसें भेजते हैं। उन्होंने जय सिंह, तेजिंद्र, ओमकार, बलदेव सभी ने मिलकर व्यवस्था बनाई।

किसानों ने कामगारों को नोवा की करवायी सवारी

किसानों कामगारों को लाने के लिए बसें तो भेज ही रहे हैं, लेकिन बस न मिलने की स्थिति, महंगी होने या फिर कामगार कम लाने के लिए किसान किराये पर कर नोवा गाडिय़ां भी भेज रहे हैं। जलबेहड़ा गांव के जसबीर सिंह ने बिहार से कामगारों को लाने के लिए दो नोवा गाड़ी भेजी थी, जिसमें प्रति कामगार के पांच हजार रुपये किराया भरना पड़ा। उनके पास दो गाडिय़ों में 12 लोग आये तो उन 60 हजार रुपये का खर्च आया है।

धान की रोपाई होने पर आधा-आधा होगा किराया

धान की रोपाई से पहले किसान किराये का खर्च खुद किसान उठा रहे हैं, लेकिन जब कामगार धान की रोपाई करने के बाद कमाई कर लेंगे तो किराये को आपस में आधा-आधा बांट लिया जाएगा। ताकि जो खर्च आया है वह किसी एक पर न पड़े। इतना ही नहीं कामगारों को लाने वाले किसानों के अलावा जो किसान इन कामगारों से अपनी धान की फसल की रोपाई करवाएंगे उन पर भी प्रति एकड़ किराये का बोझ डाला जाएगा।