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पानीपत में जीटी रोड पर स्थित “रेफ़रल अस्पताल”, ईलाज़ नहीं सिर्फ़ रेफ़र करते है

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पानीपत में जीटी रोड पर स्थित “रेफ़रल अस्पताल”, ईलाज़ नहीं सिर्फ़ रेफ़र करते है

 

राजकीय बीमा कर्मचारी चिकित्सालय (ईएसआइ) के हालात बहुत बदतर हैं। लगभग 49 साल पहले स्वीकृत पदों में मामूली वृद्धि हुई है। बीमाधारकों की संख्या पांच गुना हो चुकी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। स्त्री रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ नहीं होने से गर्भवती को करनाल के लिए रेफर किया जाता है।

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ईएसआइ अस्पताल का उद्घाटन 16 जून 1971 को प्रदेश के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री खुर्शीद अहमद ने किया था। उस समय बीमा धारकों की संख्या लगभग 30 हजार थी। उसी हिसाब से मेडिकल आफिसर, सीनियर स्पेशलिस्ट, जूनियर स्पेशलिस्ट, मेडिकल आफिसर, नर्सिंग स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी के पद स्वीकृत किए थे। अब माडल टाउन और गांव नांगलखेड़ी में डिस्पेंसरी भी है।

पानीपत का राजकीय बीमा कर्मचारी चिकित्सालय (ईएसआइ)।

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खाताधारकों की संख्या बढ़कर करीब 1.40 लाख तक पहुंच गई है। सबसे दु:खद पहलू यह कि अस्पताल में शिशु रोग, गायनोलॉजिस्ट, फिजिशियन और छाती रोग विशेषज्ञ तक अस्पताल में नहीं है। मेडिकल आफिसर, जूनियर स्पेशलिस्ट, आयुर्वेदिक डाक्टर, असिस्टेंट मेट्रन, नर्सिंग सिस्टर, स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट के भी कुछ पद रिक्त चल रहे हैं। नतीजा, फिलहाल अस्पताल रेफरल केंद्र बना हुआ है।

 

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आपरेशन थियेटर-एसएनसीयू भी नहीं

ईएसआइ अस्पताल में आपरेशन थियेटर, स्पेशल न्यू बोर्न चाइल्ड केयर यूनिट (एसएनसीयू) तक नहीं है। गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को भर्ती नहीं करने का यह भी बड़ा कारण है।

यह स्थिति तब है जब जिले से हर माह करोड़ों रुपये की धनराशि कारपोरेशन के खाते में पहुंचती है।

 

गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर करनाल के पैनल वाले निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है। एंबुलेंस की सुविधा दी जाती है। किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त बीमा धारक व उनके स्वजन को पैनल वाले प्रेम अस्पताल में भेजा जाता है।

 

डा. शिव कुमार, चिकित्सा अधीक्षक

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