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पानीपत

पति नरेश ने बीवी रामरति को बाथरूम में बंधक रखा, पड़ोसियों को थी जानकारी – पानीपत

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पति नरेश ने बीवी रामरति को बाथरूम में बंधक रखा, पड़ोसियों को थी जानकारी – पानीपत

सनौली के गांव रिसपुर में रामरति को पति नरेश शौचालय में बंधक रखता था। उसके साथ मारपीट करता था। इलाज नहीं कराया जा रहा था। भोजन समय से नहीं दिया जाता था। हरियाणा राज्य महिला आयोग की सदस्य नम्रता गौड़ के नेतृत्व में जांच कमेटी पीड़िता के घर पहुंची तो एक वृद्धा ने बिना डरे यह बयान दिए। पीड़िता के छोटे बेटे ने भी मां को बंधक रखने की जानकारी कमेटी को दी। रामरति फिलहाल पीजीआइ रोहतक में भर्ती है। एसपी मनीषा चौधरी के कार्यालय पहुंची नम्रता गौड ने दैनिक जागरण को यह जानकारी दी।

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रामरति शौचालय में बंधक रखी गई, मुहल्ला वासियों को थी जानकारी

जांच कमेटी में शामिल एडिशनल डिस्ट्रिक्ट अटार्नी, बाल कल्याण समिति से डा. मुकेश आर्य, महिला थाना प्रभारी किरन नैन, जिला महिला संरक्षण अधिकारी रजनी गुप्ता को भी बुलाया गया। सिविल सर्जन डा. संतलाल वर्मा, सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. आलोक जैन, मनोचिकित्सक डा. मोना नागपाल और सनौली थाना प्रभारी सुरेंद्र भी बैठक में रहे। सभी ने अब तक की कार्यवाही व जांच रिपोर्ट आयोग की सदस्य को सौंपी। इसके बाद टीम गांव रिसपुर पहुंची। शौचालय को खोला गया तो काक्रोच चल रहे थे। पति नरेश, उसकी बड़ी बेटी व छोटे पुत्र से भी टीम ने बात की। ग्रामीणों से पूछताछ में एक महिला ने बताया कि तीन साल पहले नरेश के पिता की मौत हुई थी। इसके बाद से रामरति को घर के बाहर नहीं देखा गया। उसे शौचालय में बंद करके रखा जाता था, यह पूरे गांव को पता है।

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स्कूल में लगाया शिविर

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नम्रता गौड ने ग्राम पंचायत की मदद से एक स्कूल में जागरूकता शिविर भी लगाया। ग्रामीणों को घंटी बजाओ कार्यक्रम की जानकारी दी गई। महिलाओं को कहा गया कि अपने अधिकारों को जानें। अत्याचार बर्दाश्त न करें, किसी का उत्पीड़न होता देखें तो हस्तक्षेप करें। पुलिस, सरपंच को सूचना दें।

 

यह सौंपी अब तक की कार्यवाही रिपोर्ट

मनोचिकित्सक डा. मोना : महिला लंबे समय से बीमार थी। शारीरिक रूप से बहुत कमजोर थी। मानसिक स्थिति का पता लगाने के लिए कुछ टेस्ट होने थे। इनके लिए 14 अक्टूबर को ही उसे पीजीआइ रेफर कर दिया था। रिपोर्ट देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

सीडब्ल्यूसी सदस्य डा. मुकेश : रामरति के तीनों बच्चों की दो बार काउंसलिग की गई है। बेटी कहती है कि वह मां की देखभाल करती थी। छोटा बेटा कहता है कि मां को बंद रखा गया। तीसरी बार काउंसिलिग होनी है।

 

महिला संरक्षण अधिकारी रजनी गुप्ता

रामरति की कस्टडी उसके चचेरे भाई सुनील को दी गई है। सोमवार को उसने ही बहन को पीजीआइ में भर्ती कराया है। दूसरे भाई अनिल से बात हुई तो उसने बताया कि छह माह पहले वह रिसपुर गया था, बहन टायलेट में बंद थी। पुलिस अधिकारी : महिला थाना प्रभारी किरन और सनौली थाना प्रभारी सुरेंद्र ने बताया कि आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। कोर्ट से उसे जमानत मिल गई है। जांच की जा रही है। रामरति का पति नरेश : पत्नी को टायलेट में बंद नहीं रखा जाता था, उसका ध्यान भी रखा जाता था। शादी के बाद से ही उसकी मानसिक हालात ठीक थी। बच्चों की देखभाल भी उनकी बुआ करती है। कुछ वर्ष पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया था, उसी दौरान रामरति के इलाज के कागज गुम हो गए। ग्राम सरपंच : मेरा घर दूर है। रामरति को टायलेट में बंधक बनाकर रखने की जानकारी नहीं थी। 13 अक्टूबर को टीम उसे मुक्त कराने पहुंची तब पता चला। ग्रामीण महिलाएं : रामरति को बंधक बनाकर रखने की घटना शर्मनाक है। यह पूरे महिला समाज को बंधक रखने के जैसा है। ईश्वर भला करे उस व्यक्ति का जिसने जिला महिला संरक्षण अधिकारी को सूचना दी।

 

Source : Jagran

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