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पानीपत

पांच हजार बच्चों में एक को होती है ये बीमारी, पानीपत में जिंदगी बचाने की लड़ी जंग

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पांच हजार बच्चों में एक को होती है ये बीमारी, पानीपत में जिंदगी बचाने की लड़ी जंग

 

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पांच हजार बच्चों में से किसी एक बच्चे को होती है मेनिंगोमाइलोसील। नाम जितना कठिन है, बीमारी भी उतनी ही बड़ी है। जन्म लेते ही बच्चे की पीठ पर एक ट्यूमर बन जाता है, जिसका अगर जल्द इलाज न हो तो बच्चे की जान भी जा सकती है। या जीवनभर के लिए बच्चा चल नहीं पाता। पानीपत में ऐसा ही एक मामला सामने आया। सिविल अस्पताल में जन्मे बच्चे को इस रोग ने जकड़ लिया। महज एक दिन के बच्चे को पचास से ज्यादा टांके लगाए गए। आखिरकार डाक्टरों ने उसकी जिंदगी बचा ली। सर्जरी के बाद बच्चे ने जब रोते हुए आवाज निकाली तो मां-बाप के साथ डाक्टरों के चेहरे पर हंसते हुए मुस्कुराहट बिखर गई। जानिये, क्या होती है ये बीमारी, कैसे इससे बचा जा सकता है।

उरलाना के रहने वाले प्रदीप और रितू की शादी के ठीक एक साल बाद नवजात शिशु ने जन्म लिया।  मां और नवजात दोनों स्वस्थ थे। जन्म के समय डाक्टर ने चेकअप किया तो पता चला कि शिशु की रीढ़ की हड्डी में फोड़ा है। सिविल अस्पताल के डाक्टर ने कहा की बच्चे का तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा। यहां पर सर्जरी नहीं हो पाएगी। बच्चे को उसी समय माडल टाउन स्थित रेनबो अस्पताल लाया गया। तीन स्पेशलिस्ट डाक्टरों ने उसी समय बच्चे का इलाज शुरू कर दिया। सीनीयर पीडीऐट्रिक सर्जन डा.प्रशांत केदारी ने  बच्चे का आपरेशन किया। पचास टांके लगे। आखिरकार, सफलता मिल ही गई। फोड़े को निकाल दिया गया।

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जागरूकता का अभाव

रेनबो अस्पताल के चीफ़ नियोनेटोलोजिस्ट डा. गिरीश अरोड़ा का कहना है कि ऐसी बीमारियां मुख्यतः जागरूकता के अभाव में होती हैं। अगर गर्भावस्था में ही फोलिक एसिड की गोलियां ली हों तो ऐसी बीमारी की आशंका नहीं रह जाती। ये गोलियां हर सरकारी अस्पताल, प्राथमिक उपचार केंद्र पर फ्री में उपलब्ध हैं।

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क्या होती है ये बीमारी

इस बीमारी में बच्चे की रीढ़ की हड्डी की नसें और पानी एक जगह एकत्र हो जाता है। इससे एक फोड़ा बन जाता है। अगर फोड़ा दबाव की वजह से फूटता है तो बच्चे को इन्फेक्शन हो सकता है। जीवनभर के लिए बच्चा अपंग हो सकता है। यहां तक की जान भी जा सकती है।

 

Source : Jagran

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