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पानीपत: बेटे काे ढूंढ़ने के लिए काराेबार बंद कर 18 लाख रुपए खर्चे, वाहन तक बेचने पड़े

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बेटे काे ढूंढ़ने के लिए काराेबार बंद कर 18 लाख रुपए खर्चे वाहन तक बेचने पड़े
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पानीपत में बच्चाें के अपहरण की वारदातें आज से नहीं, बल्कि दशकों से हाेती आ रही हैं, लेकिन गैंग नहीं पकड़े जाते। पिछले साढ़े 4 साल में गुम हुए 1682 बच्चाें में से 214 बच्चे आज तक नहीं मिले। इससे पहले भी सैकड़ाें बच्चाें की फाइलें बंद कर दी गई, जिन्हें ढूंढने में पुलिस नाकाम रही।

आज हम ऐसे दाे परिवाराें के दर्द काे लेकर आए हैं, जाे शहर के चर्चित मामले थे। जिनके केस कई महीनाें तक कष्ट निवारण समिति की बैठक में चले। एक की जांच क्राइम ब्रांच काे दी गई। दूसरे की जांच सीबीआई काे देने के आदेश हुए। क्राइम ब्रांच बच्चे काे नहीं ढूंढ पाई और दूसरे केस की सीबीआई जांच ही शुरू नहीं हाे पाई।

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पानीपत. दीपक 4 साल से लापता है। केंद्रीय मंत्री का पत्र दिखाते दीपक के पिता सुभाष व लापता बेटे की फाेटाे दिखाती मां रेशमा। - Dainik Bhaskar

पिता ने कहा- जब बेटा मिलेगा, वाे दिन मेरे लिए सबसे बड़ा त्योहार हाेगा

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29 जून 2017 की शाम मेरे लिए काल की तरह थी। घर से खेलने गया 16 साल का बेटा दीपक आज तक नहीं लाैटा। काेई कहे पढ़ने की वजह से गया ताे 10वीं में उसकी मेरिट आई थी। या ये कहे कि घर से भागा है ताे उसकी पैकेट मनी 1200 रुपए स्कूल बैग में मिली। माेबाइल नहीं रखता था। पुलिस ने हमारे घर के माेबाइल की काॅल हिस्ट्री निकाली। जांच की, पर कुछ नहीं मिला।

मेरा दावा है कि उसका अपहरण हुआ है। तब मैं किराए पर गाेदाम लेकर बिल्डिंग मटेरियल का काम करता था। गुम हाेने के बाद काराेबार बंद कर दिया। 3 साल तक सिर्फ दीपक काे ही ढूंढ़ा। दाे ट्रैक्टर और 3 ट्राॅली बेच दी। तब तक करीब 18 लाख रुपए उसे ढूंढ़ने में खर्च कर दिए। पुलिस कहीं भी जाती थी ताे मुझे ही गाड़ी करनी पड़ती थी। उनके रहने के लिए हाेटल और खाना पीना। सारा खर्च मुझे देना पड़ता था।

हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी समेत अन्य राज्याें में पंपलेट चिपकाए। अगस्त 2018 में अज्ञात नंबर से काॅल आया और बाेला कि बेटा चाहिए ताे एक लाख रुपए लेकर शिमला आओ। पुलिस के साथ शिमला गया। युवक पकड़ा गया। पूछने पर बताया कि उसने पंपलेट से नंबर देखकर रुपए ठगने के लिए काॅल लगाया था, उसे दीपक के बारे में कुछ नहीं पता।

करीब 7 माह तक कष्ट निवारण समिति में मामला चला। वहां से क्राइम ब्रांच काे दिया। उन्हाेंने भी कुछ नहीं किया। अब दाेबारा अक्टूबर 2020 से काराेबार शुरू किया हैं, लेकिन बच्चे की तलाश जारी है। सरकार सीबीआई जांच कराए। एक पिता के लिए बच्चे से बड़ा कुछ नहीं हाेता। इसलिए हमने उसे ढूंढ़ने की पुरजाेर काेशिश की। जब बेटा मिलेगा, वाे दिन मेरे लिए सबसे बड़ा त्योहार हाेगा। -(जाटल राेड पर आरके पुरम निवासी लापता दीपक के पिता सुभाष गाेस्वामी की जुबानी)

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