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रोज बढ़ने लगे पेट्रोल-डीजल के दाम, कीमतों का रिकॉर्ड

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दो साल में पेट्रोल खर्च 42% बढ़ा, फल, सब्जी और दूध महंगे करेगा डीजल

करीब 20 दिन तक स्थिर रहने के बाद एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया है। तेल कंपनियों ने शनिवार को भी पेट्रोल-डीजल के दाम क्रमश: 25 और 30 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए। बीते एक सप्ताह में दिल्ली में पेट्रोल 95 पैसे, तो डीजल 1.85 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है। इसकी दोहरी मार उपभोक्ता पर भारी पड़ रही है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, पेट्रोल सीधे हमारी वास्तविक आय को कम करता है। इससे बचत कम हो जाती है।

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वहीं, जिसके पास बचत नहीं है उसे जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ जाती है। बीते दो साल में पेट्रोल पर खर्च में 43% बढ़ोतरी हुई है। वहीं, डीजल का असर उन पर भी पड़ता है, जिनके पास वाहन नहीं है। दरअसल, डीजल का इस्तेमाल मुख्य रूप से ट्रांसपोर्ट में होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने से परिवहन महंगा होता है।

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इसमें फल-सब्जी, दूध और अनाज जैसी वस्तुएं भी शामिल हैं। अगस्त में महंगाई दर 5.3% थी, जबकि फ्यूल महंगाई 13% दर्ज हुई। हाल में आई एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि लोग पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों के चलते न सिर्फ ग्रॉसरी और यूटिलिटी सर्विसेज में कटौती कर रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य जैसी अहम मदों पर खर्च घटाने को मजबूर हो रहे हैं।

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खपत गिरेगी, ब्याज दरें बढ़ेंगी, यानी अर्थव्यवस्था को नुकसान
केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक, ‘ईधन महंगा होने पर दो ही विकल्प होते हैं: बचत घटाएं या जरूरी खर्चों में कटौती करें। ईंधन महंगे रहने से अर्थव्यवस्था में मांग व बचत दोनों घट सकती हैं।’ महंगाई का एक असर यह भी होगा कि रिजर्व बैंक इसे काबू करने के लिए नीतिगत दरों में वृद्धि कर सकता है। इससे कर्ज लेना महंगा हो जाएगा।

एक तिहाई ट्रक खड़े, 15% भाड़ा पहले ही बढ़ चुका, 10% और बढ़ेगा
ट्रांसपोर्टर्स के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रेसिडेंट कुलतरण सिंह के मुताबिक, ट्रक चलाने की लागत में 70% हिस्सेदारी डीजल की होती है। रेट बढ़ने से 30-35% ट्रक खड़े हो गए हैं। एक साल में भाड़ा 15% महंगा हो चुका है। हम चाहते हैं कि सरकार प्रति किलोमीटर रेट फिक्स कर दे या डीजल को जीएसटी में ले आए।

 

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