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कलेक्टर रेट में 20-50% की छूट के साथ शहरों में कब्जाधारी होंगे प्रॉपर्टी मालिक

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कलेक्टर रेट में 20-50% की छूट के साथ शहरों में कब्जाधारी होंगे प्रॉपर्टी मालिक

 

प्रदेश में अब 20 साल से ज्यादा समय से नगर निकाय प्रॉपर्टी पर काबिज लोगों को मलकियत मिलेगी। उन्हें यह प्रॉपर्टी कलेक्टर रेट पर 20 से 50 फीसदी तक की छूट पर दी जाएगी। इसके लिए सरकार की ओर से योजना तैयार कर ली है। यह योजना 1 जून से शुरू हो जाएगी।

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इसके दायरे में वही लोग आएंगे, जो 31 दिसंबर, 2001 से पहले से काबिज हैं। इसके अलावा अब जिन दुकानों या मकानों के पास निकायों का खाली कोई जमीन का टुकड़ा या जगह है, वह बेची जाएगी। इसके लिए रेट थर्ड पार्टी से तय कराए जाएंगे। इसके अलावा सरकार अब 3,700 करोड़ रुपए की राशि से माइक्रो इरीगेशन स्कीम के तहत में कच्चे रजवाहों को पक्का करेगी।

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वहीं, 20 वर्ष पुरानों की मरम्मत कराई जाएगी। इसके साथ 2019-20 के बजट सत्र की गांवों को जोड़ने वाली पांच करम के कच्चे रास्तों को पक्का किया जाएगा। ये घोषणाएं मुख्यमंत्री ने रविवार को ऑनलाइन पत्रकारवार्ता में की है।

जो जितने ज्यादा समय से काबिज, उतनी ज्यादा मिलेगी छूट

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निकायों की प्रॉपर्टी पर काबिज लोगों को मलकियत देने के लिए कलेक्टर रेट का स्लैब बनाया गया है। यदि कोई 20 साल से काबिज है तो उसे कलेक्टर रेट पर 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसी प्रकार 25 वर्ष वाले को 25, 30 वर्ष वाले को 30, 35 वर्ष वाले को 35, 40 वर्ष वाले को 40, 45 वर्ष वाले को 45 और 50 वर्ष से काबिज को 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। अधिकतम छूट 50 प्रतिशत ही रहेगी।

अधिकारियों द्वारा कब्जा सही पाए जाने पर संबंधित नगर निकाया 15 दिन में 25 प्रतिशत राशि जमा कराने का नोटिस जारी करेगी। बाकी 75 प्रतिशत राशि अगले तीन माह में जमा करानी होगी। यदि बहुमंजिला बिल्डिंग पर अलग-अलग व्यक्ति का कब्जा है तो उनके रेट अलग होंगे।

यदि किसी भवन पर एक मंजिल और है तो भूतल कब्जाधारी तो 60 तो पहली मंजिल वाले को 40 प्रतिशत कीमत भुगतान करनी होगी। यदि बिल्डिंग दो मंजिला है तो भूतल वाले को बेस रेट का 50 प्रतिशत, प्रथम तल 30 और दूसरी मंजिल के लिए बेस रेट का 20 प्रतिशत राशि तय किया गया है। छत का अधिकार ऊपरी मंजिल वाले का रहेगा। लेकिन वह उस पर निर्माण नहीं कर सकेगा।

अधिकार – अनुपयोगी भूमि को बेच सकेंगे

नगर निकाय की काफी जमीन अलग-अलग जगह टुकड़ों में हैं, जिसका उपयोग भी नहीं हो रहा। इसलिए यह जमीन बेची जाएगी। यह निकाय ही बेचेंगे। इस जमीन की कीमत थर्ड पार्टी से कराई जाएगी। यानी यह जमीन बाजार भाव में ही बेची जा सकती है, क्योंकि फिलहाल इस जमीन का कोई प्रयोग नहीं हो रहा था।

लक्ष्य – कच्चे रजवाहों पर 3,700 करोड़ होंगे खर्च

माइक्रो इरीगेशन को लेकर कच्चे रजवाहे पक्के किए जाएंगे। 15,006 रजवाहों में 3512 कच्चे व 11,494 पक्के हैं। यह कार्य 31 मार्च 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस कार्य पर 3,700 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी। उन रजवाहों की मैपिंग भी की जा रही है, जो 20 साल से अधिक पुराने हैं। इनको दोबारा पक्का किया जाएगा।

डेवलपमेंट – 5 करम के रास्ते किए जाएंगे पक्के

बजट सत्र 2019-20 के दौरान की गई घोषणा के तहत अब एक से दूसरे गांव से जोड़ने वाले पांच करम के सब कच्चे रास्तों को पक्का किया जाएगा। मार्केटिंग बोर्ड ने 1225 किलोमीटर लंबे 475 कच्चे रास्तों की पहचान की है। इन्हें पक्का करने पर 490 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इन रास्तों को वर्ष 2023-24 तक पक्का करने का लक्ष्य है।

 

Source :- Bhaskar

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