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पानीपत कपड़ा बाजार में खुशहाली, त्‍योहार से ज्‍यादा वैवाहिक सीजन में कारोबारियों को फायदा

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पानीपत कपड़ा बाजार में खुशहाली, त्‍योहार से ज्‍यादा वैवाहिक सीजन में कारोबारियों को फायदा

बाजार विशेषकर कपड़ा बाजार की नजरें वैवाहिक सीजन पर हैं। 13 नवंबर से लेकर 14 दिसंबर के बीच वर्ष के अंतिम महीने में हजारों शादी होने जा रही है। बाजारों में रेडीमेड गारमेंट की दुकानों से लेकर साड़ी सूट, कपड़े, ज्वैलरी शाप पर रौनक छायी हुई है।

चातुर्मास चार महीने (बरसाती सीजन) में व्यापारी बैठकर गुजारा करते हैं। 14 नवंबर को दे उठनी एकादशी के साथ ही शुभ कार्य शुरु हो जाते हैं। इस दिन से भगवान श्री हरि विष्णु पाताल में विश्राम का कार्यकाल पूरा करके सृष्टी का संचालन शुरु करते हैं।

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पानीपत में कपड़ा कारोबारियों को शादी के सीजन से उम्‍मीद।

कपड़ा कारोबारी दर्शन बवेजा के अनुसार कपड़ा कारोबार के लिए वैवाहिक सीजन से बढ़ कर कोई सीजन नहीं होता। विवाह शादियों में सर्वाधिक खर्च सोने-चांदी की ज्वेलरी, फिर केटर्स मंडप तथा रिसार्ट होटल मैरिज गार्डन उसके बाद ट्रांसपोर्टेशन आदि पर व इसके पश्चात सर्वाधिक खर्च कपड़ों पर होता है। कारण जिस घर में शादी होती हैं वहां नवजात शिशु से लेकर बुजुर्ग तक के नए कपड़े जरूर लिए जाते हैं। साथ ही दूल्हे, दुल्हन के जो वेडिंग कास्ट्यूम हैं व नए नए तरह के डिजाइनर कपड़े हैं उनपर बहुत बड़ी राशि खर्च होती है। कपड़े में दूल्हे की शेरवानी, सूट या फिर दुल्हन का घाघरा, ओढनी का वेश किराए पर विकल्प स्वरूप मिलता है। किराए का प्रचलन ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। जहां तक शादी में पडऩे वाले टोटल खर्च का अनुपात लगाएं तो अमीर परिवार के विवाह शादियों में लहंगे वेश आदि तैयार करवाने पर लाखों, करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। अमीर घरानों में कपड़ों पर 15 से 20 प्रतिशत के आसपास खर्च होता है। गरीब मध्यम वर्ग 10-15 प्रतिशत शादी का खर्च कपड़े पर करता है।

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पानीपत में 5000 से अधिक शादियां

इस दौरान पानीपत में 5000 से अधिक शादियां होने जा रही है। सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट का कहना है किसी भी साल इतने अधिक शादी के कार्ड नहीं मिले है। दो साल कोविड में खुलकर विवाह न होने के कारण बहुत सी शादियां देरी से हो रही है।

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जीएसटी पड़ रही भारी

सीए भूपेंद्र दीक्षित का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बाद सरकारी गाइड लाइन के मुताबिक शादियों में मेेहमानों की संख्या बढ़ाने से सुकून जरूर मिला है। लेकिन शादियों पर जीएसटी का भार भारी लगने लगा है। बुकिंग करवाते समय जीएसटी अलग से बतायी जाती है। शादी विवाह करे वालों को मैरिज गार्डन, केटरिंग, ब्यूटी पार्लर, टेंट, फोटो, वीडियो ग्राफी, बैंड डीजे से लेकर शादियों के कार्डस में भी जीएसटी के रेट 12 से लेकर 18 होने से काफी जीएसटी लग जाता है। शादी विवाह पर भारी पड़ रहे जीएसटी की दर सरकार को कम करनी चाहिए।

 

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