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अभिभावकों को राहत, स्‍कूलों ने निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाईं तो होगी कार्रवाई

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अभिभावकों को राहत, स्‍कूलों ने निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाईं तो होगी कार्रवाई

नए सत्र से प्राइवेट स्कूलों में एनसीईआरटी की ही किताबें लगेंगी। वहीं जिन निजी स्कूल संचालकों ने फार्म छह नहीं भरा है, वह भी अपनी फीस नहीं बढ़ा पाएंगे। ऐसे में अभिभावकों को काफी राहत मिल सकती है। प्राइवेट स्कूल संचालक मुनाफे के चक्कर में निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाते थे। अगर कोई स्कूल संचालक अगले सत्र से निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाएगा तो उसके शिक्षा विभाग कार्रवाई करेगा। जिले में 300 से ज्यादा निजी स्कूल हैं, जिनमें डेढ लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग के यह आदेश अभिभावकों की जेब ढीली होने से बचा सकते हैं, लेकिन इसके लिए शिक्षा विभाग को धरातल पर काम करना होगा।

अभिभावकों को राहत, स्‍कूलों ने निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाईं तो होगी कार्रवाई

जब भी नया सत्र शुरू होता है तो निजी प्रकाशक प्राइवेट स्कूल संचालकों के पास पहुंच जाते हैं। मुनाफ के चक्कर में स्कूल संचालक अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए दवाब बनाते हैं। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए अभिभावकों को स्कूल संचालकों द्वारा बताई गई किताबें खरीदनी पड़ती है। इस कारण अभिभावकों पर किताबों के नाम पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। वहीं शिक्षा विभाग ने चार मार्च तक निजी स्कूल संचालकों को फार्म छह भरने के निर्देश दिए हैं।

निजी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें नए सत्र से लगेंगी। सरकारी स्कूलों में तो एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई करवाई जाती है। लेेकिन कुछ निजी स्कूल संचालक निजी प्रकाशकों की किताबें लगवा देते हैं। शिक्षा विभाग ऐसे स्कूल संचालकों पर निखरानी रखेगा। शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे स्कूलों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

-सुशील कुमार जैन, खंड शिक्षा अधिकारी, जींद।

 

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