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पानीपत

भगवान मेरा बेटा लौटा दे, नहीं चाहिए वाशिंग मशीन, रुला देगा ये हादसा

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भगवान मेरा बेटा लौटा दे, नहीं चाहिए वाशिंग मशीन, रुला देगा ये हादसा

 

देखो, तुम्हारे लिए वाशिंग मशीन लाया हूं। अब कपड़े हाथ से धोने नहीं पड़ेंगे। बेटियां भी परेशान नहीं होंगी। ये कहते हुए जिस वाशिंग मशीन को घर के अंदर लाया था, वही बेटा इसका कनेक्शन करते हुए बिजली करंट के कारण दम तोड़ गया। हादसा उस वक्त हुआ, जब परिवार के सदस्य पड़ोसियों के घर वाशिंग मशीन लाने की खुशी में मिठाई बांटने गए थे। घर लौटे तो बेटे की जान जा चुकी थी। जिन हाथों को कष्ट न पहुंचे, उन्हीं हाथों से मां खुद को झकझोर रही थी। कभी वाशिंग मशीन को कोसती तो कभी खुद को ताने देतीं।

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मासूम दोनों बेटियां साथ बैठीं कुछ बोल भी नहीं पा रही थीं। हादसा तहसील कैंप के देसराज कालोनी में हुआ।देसराज कालोनी का रिंकू आटो रिक्शा चलाता था। स्कूल के बच्चों को छोड़कर आता था। लाकडाउन के कारण काम बंद हो गया। अनलाक हुआ लेकिन स्कूल नहीं खुले। फिर भी आटो रिक्शा चलाकर गुजारा चलाने लगा। किराये के मकान में परिवार रहता है।

पानीपत में करंट से एक युवक की मौत हो गई।

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रिंकू की पत्नी कुछ वर्ष पहले छोड़कर चली गई थी। घर में मां और दो बेटियां हैं। हाथ से कपड़े धोते हुए मां को देखता तो मन ही मन सोचता था कि जल्द ही वाशिंग मशीन लाएगा। शनिवार को मशीन ले भी आया। घर में पहला कदम रखते ही कहा था, अब हाथ से कपड़े धोने का झंझट खत्म। बेटियां बार-बार मशीन को निहारती तो कहता, सोमवार को कनेक्शन जोड़ेंगे। तब आराम से कपड़े इसमें डालना। पर होनी को तो कुछ और ही मंजूर था। घर के एक कोने में मशीन को रखा। वहां बिजली का कनेक्शन नहीं था। सुबह के समय बिजली का बोर्ड लगाते समय करंट की चपेट में आ गया। पैरों में चप्पल नहीं पहनी थी, फर्श में सिलन थी। इस वजह से काफी देर तक तार से ही चिपका रह गया। जब तक स्वजनों ने आकर देखा, तब तक दम तोड़ चुका था। रिंकू की एक बेटी वंशु सातवीं और छोटी बेटी अंजली पांचवीं क्लास में पढ़ती है।

 

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भगवान ऐसा क्यों किया

तहसील कैंप में जिसने भी हादसे को सुना, वो यही बोला कि भगवान ऐसा क्यों किया। दो नन्ही बच्चियों को कौन संभालेगा। सांत्वना देने पहुंचते लोगों की आंखों से भी झरझर आंसू बह निकलते।

 

 

आप मदद करें, हमें बताएं

अगर आप इस परिवार की मदद करना चाहते हैं तो हमें बताएं। इस दुख की घड़ी में आपकी पहल से ही बड़ा सहयोग होगा। परिवार तक पहुंचने के लिए हमें फोन करें। बेटियों की पढ़ाई में भी मदद की जा सकती है।

 

 

Source : Jagran

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