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स्वच्छता रैंकिग में औंधे मुंह गिरा सोनीपत, 132 पायदान लुढ़का

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स्वच्छता रैंकिग में औंधे मुंह गिरा सोनीपत, 132 पायदान लुढ़का

सर्वेक्षण सर्वे में शहर को बेहतर बनाने के सारे दावे कूड़े में दब गए। रैंकिग में सुधार के बजाय सोनीपत 132 पायदान लुढ़क गया। पिछले साल 103वीं रैंकिग के बजाय सोनीपत को इस बार 235वीं रैंक मिली है, जो कि 2017 के बाद से सोनीपत का सबसे शर्मनाक प्रदर्शन है। इससे पहले सबसे खराब रैंकिग 2017 में मिली थी, जब शहर 243वें पायदान पर रहा था। उसमें बाद में सुधार तो हुआ, लेकिन निगम अधिकारी उसे बरकरार नहीं रख पाए।

शहर को 2018 में 156वीं, 2019 में 161वीं और 2020 में 103वीं रैंक मिली थी। इस बार पिछले साल की रैंकिग से बेहतर रैंक आने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन कागजों में ही शहर की सफाई होती रही, धरातल पर हालत बिगड़ गए। इसके चलते स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिग में सोनीपत नगर निगम औंधे मुंह गिरा है।

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स्वच्छता रैंकिग में औंधे मुंह गिरा सोनीपत, 132 पायदान लुढ़का

स्वच्छ भारत अभियान के तहत वर्ष 2017 में रैंकिग जारी की गई थी, जिस समय शहर में सफाई का खर्च हर महीने लगभग 26 लाख रुपये था और उस समय स्वच्छ भारत अभियान की रैंकिग में सोनीपत 243वें स्थान पर पहुंचा था। वर्ष 2018 में शहर में सफाई पर लगभग 80 लाख रुपये हर महीने खर्च किए जाने लगे तो सोनीपत को 156वें पायदान पर पहुंचा था। वर्ष 2019 में स्वच्छता सर्वेक्षण में सोनीपत शहर को देश में 161वां स्थान और पिछले वर्ष देश में सोनीपत को 103वां स्थान मिला था। इस बार अधिकारियों की अनदेखी के कारण सफाई व्यवस्था बिगड़ी रही। इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान शहर के लोगों का फीडबैक भी बेहतर नहीं रही। असर ये हुआ कि सोनीपत स्वच्छता के मामले में फिसड्डी साबित हो गया। कंपनी की मनमानी पर मौन रहे अधिकारी, अब खामियाजा भुगता :

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डीआरडीए हाल में 10 सितंबर को हुई निगम की हाउस की बैठक में मेयर निखिल मदान और पार्षदों ने सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। मेयर का कहना था कि निगम क्षेत्र से जेबीएम कंपनी की ओर से सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग नहीं किया जाता और न ही गीले कूड़े से खाद बनाई जाती। शहरी निकाय विभाग की शर्तों के अनुसार कंपनी को निगम की तरफ से किसी तरह के नियम का पालन नहीं कराया जाता। कालोनियों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन रोजाना नहीं होता, ऐसे में लोगों को कूड़े के निस्तारण को लेकर परेशानी हो रही है। शहर के वार्डों में सफाई तक नहीं होती। अधिकतर कालोनियों में कर्मचारी सफाई करने नहीं जाते। पूजा कंसल्टेंसी कंपनी को ठेका दिए जाने के बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। अधिकारी कार्रवाई की बजाय मौन रहे और ठेकेदार को संरक्षण देते रहे। अधिकारी मान रहे इस वजह से पिछड़े हम :

नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि कचरा प्लांट न होने की वजह से सोनीपत को सीधा 2500 अंकों का नुकसान हुआ। इसके चलते रैंकिग पर असर पड़ा है। हालांकि पिछले साल की रैंकिग का हवाला देने पर अधिकारी स्पष्ट रूप से कुछ कहने से बच रहे हैं। अधिकारी इस बात को भी मान रहे हैं कि सफाई टेंडर में मैनपावर और नियम-शर्तों में घालमेल होना भी एक बड़ा कारण है। अधिकारी कह रहे हैं कि भविष्य में सफाई टेंडरों में मैनपावर से संबंधित शर्तों के साथ ही टेंडर जारी किए जाएंगे, ताकि ठेकेदार एरिया के हिसाब से सफाई कर्मचारी नियुक्त करने पर विवश हो। जागरण पड़ताल, ये हैं पिछड़ने के कारण :

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– सफाई टेंडर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की संख्या तय न होना। इसके कारण ठेकेदार एक-एक किलोमीटर एरिया महज चंद कर्मचारियों के सहारे छोड़ देते हैं।

– कचरा उठान को लेकर कोई समय निर्धारित न होना। सड़कों से कचरा दोपहर तक नहीं उठ पाता। निगम क्षेत्र के सभी घरों से कचरा उठाया जाना था, उसमें भी असफल रहे।

– करोड़ों की लागत से बने शौचालय पर रखरखाव के अभाव में ताले लटका होना भी रहा कारण।

– पार्षद और आमजन की बार-बार शिकायत के बावजूद सफाई व्यवस्था संभाल रही कंपनी पर कार्रवाई न होना भी बड़ा कारण रहा।

कचरा प्लांट न होने की वजह से अच्छे अंक नहीं मिल पाए। अगले वर्ष होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के बाद सोनीपत शहर के बेहतर परिणाम होंगे। पूरे निगम क्षेत्र में डोर टू डोर सर्वे शुरू कर दिया जाएगा। कचरा प्वाइंट खत्म किए जाएंगे। कचरा सीधा गाड़ी से कचरा प्वाइंट पर जाएगा तो स्थिति में सुधार होगा।

– साहब सिंह, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम

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