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‘गोल्डन ब्वॉय’ के गांव खंडरा में खंडहर होती खेल सुविधाएं

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नीरज के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने पर सरकार ने गांव में 6 करोड़ से स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी, अब वहां तालाब और घास

 

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पानीपत के खंडरा गांव निवासी जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर गांव और देश का नाम दुनिया में रोशन किया है। एथलेटिक्स में देश को पहला ओलिंपिक गोल्ड मेडल दिलाने वाले नीरज चोपड़ा के गांव खंडरा में ही खेल सुविधाओं का टोटा है।

स्टेडियम तक आने वाले कच्चे रास्ते पर भरा पानी।

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स्टेडियम तक आने वाले कच्चे रास्ते पर भरा पानी।

2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद हरियाणा सरकार ने नीरज चोपड़ा के गांव में 6 करोड़ की लागत से स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी। गांव में जमीन तो चिन्हित कर ली गई, लेकिन वहां न तो चार दीवारी हुई और न ही देखरेख की गई। आज गांव का स्टेडियम तालाब बन चुका है, जहां घुटनों तक घास खड़ी है। ऐसे में नीरज के भाई-बहनों समेत अन्य युवाओं को अभ्यास का पूरा अवसर नहीं मिल पा रहा है।

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रिंकू।

रिंकू।

खुद युवाओं ने तैयार किया मैदान

खंडरा गांव निवासी रिंकू ने बताया कि स्टेडियम के लिए जमीन चिन्हित होने के बाद काफी समय तक काम शुरू न होने के कारण गांव के युवाओं ने ही रेस ट्रैक, क्रिकेट पिच और लांग जंप के लिए मैदान तैयार किया। तीन साल बाद भी स्टेडियम की चार दीवारी नहीं हो पाई, जिस कारण पशु मैदान को खराब करते रहे। अब बरसात के बाद मैदान तालाब बन चुका है। घास अधिक होने के कारण गांव के बच्चे खेलने से डरते हैं।

दीपक।

दीपक।

सरपंच के रूचि न लेने के कारण स्टेडियम से वंचित है गांव

नीरज चोपड़ा के पड़ोसी दीपक ने बताया कि सरकार की ओर से 6 करोड़ की लागत से स्टेडियम की घोषणा होने के बाद भी गांव को स्टेडियम नहीं मिला। उनका आरोप है कि गांव के सरपंच ने स्टेडियम बनाने में रूचि नहीं दिखाई। स्टेडियम के लिए चिन्हित जमीन भी विवादित है। उन्होंने बताया कि गांव में स्टेडियम के लिए काफी पंचायती जमीन है। सरकार चाहे तो पंचायती जमीन पर स्टेडियम बनाकर गांव और आसपास के युवाओं के बेहतर खेल सुविधा दे सकती है।

अमन।

प्राइवेट स्कूल में करने जाते हैं प्रैक्टिस

गोल्डन ब्वॉय के दूसरे पड़ोसी अमन ने बताया कि नीरज की दो सगी बहनों समेत 10 चचेरे भाई-बहन रोजाना गांव के प्राइवेट स्कूल के मैदान पर अभ्यास करने जाते हैं। गांव से करीब 30 युवा अलग-अलग खेलों का अभ्यास करते हैं। नीरज चोपड़ा के जेवलिन में गोल्ड मेडल मिलने के बाद खेल के प्रति और युवा प्रेरित हुए हैं, लेकिन संसाधनों का अभाव उन्हें पीछे खींच रहा है।

बजट न मिलने के कारण अटका स्टेडियम का निर्माण

खंडरा गांव के सरपंच सुलेंद्र ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज द्वारा गोल्ड मेडल जीतने के बाद पानीपत के DC ने उन्हें बुलाकर गांव में पांच करोड़ रुपए के विकास कार्य कराने का एस्टिमेट मांगा था। नीरज चोपड़ा के परिजनों से बात करने के बाद गांव में स्टेडियम निर्माण के साथ अन्य विकास कार्यों का एस्टिमेट बनाकर जिला प्रशासन को सौंपा गया, लेकिन अभी तक कोई बजट प्राप्त नहीं हुआ। इस वजह से स्टेडियम का काम अटका हुआ है।

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