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करनाल

बसताड़ा टोल प्लाजा पर तैनात कर्मी वाहन चालकों से बिना टोल पर्ची, चालकों से सेटिंग कर 50 रु. ले क्राॅस करा रहे टोल

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बसताड़ा टोल प्लाजा पर तैनात कर्मी वाहन चालकों से बिना टोल पर्ची, चालकों से सेटिंग कर 50 रु. ले क्राॅस करा रहे टोल

 

राष्ट्रीय राजमार्ग 44 के बसताड़ा टोल प्लाजा पर टोल टैक्स कलेक्शन में भारी गड़बड़ी हो रही है। टोल कंपनी बदले जाने के बाद से इस टोल पर नकद टोल भुगतान से होने वाली कलेक्शन में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट हुई है। टोल पर तैनात कर्मचारी वाहन चालकों से बिना टोल पर्ची कटवाए टोल क्राॅस करने की सेटिंग करते हैं। हालांकि टोल अधिकारियों का तर्क है कि किसान आंदोलन के कारण टोल पर फ्री क्राॅसिंग के मामले बढ़े हैं।

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जिस वजह से कलेक्शन कम हो रही है। 5 दिसंबर को एनएचएआई ने टोल संभाल रही कंपनी सोमा रोडीज के खिलाफ बड़ा एक्शन लेते हुए कंपनी को सस्पेंड कर दिया था। टोल कलेक्शन का जिम्मा ईगल कंपनी को दे दिया था। 4 दिसंबर को टोल का संचालन सोमा रोडीज के पास था। इस दिन चौबीस घंटे के अंतराल में 43 हजार 516 छोटे बड़े वाहनों की क्राॅसिंग टोल से हुई थी। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सोमा रोडीज ने चार दिसंबर को टोल पर 17 लाख 46 हजार 435 रुपए नकद टोल टैक्स एकत्र किया गया था।

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ईगल कंपनी के पास टोल का संचालन आने के बाद से टोल पर होने वाले नकद टोल कलेक्शन में लगातार गिरावट हो रही है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 16 दिसंबर को टोल से 45 हजार 594 वाहन क्राॅस हुए जिनसे नकद टोल टैक्स के कुल 9 लाख 34 हजार 805 रुपए मिले। आंकड़ों के फर्क से साफ होता है कि टोल पर ट्रैफिक बढ़ने के बावजूद नकद टोल कलेक्शन में करीब 50 फीसदी की कमी हुई।

टीसी रकम लेकर भागा, टोल पर सेटिंग का खेल
टोल पर गुरुवार को उस वक्त हंगामा हो गया जब एक टोल कलेक्शन कर्मचारी बूथ से 15 हजार रुपए की नकदी लेकर फरार हो गया। टोल सुरक्षाकर्मी फरार हुए कर्मचारी को पकड़ने के लिए खेतों की तरफ दौड़े, लेकिन तब तक वो कर्मचारी रकम लेकर फरार हो चुका था। वहीं, टोल पर तैनात कर्मचारी वाहन चालकों से सेटिंग करके टोल क्राॅस करवाते हैं। एक वायरल हुई वीडियो से खुलासा हुआ कि टोल लेन पर खड़े कर्मी कार व जीप चालकों से 50 रुपए लेकर टोल क्राॅस करवाते हैं जबकि कार, जीप के लिए 125 रुपए टोल लगता है। टोल कंपनी ईगल के अधिकारी ईरा यादव ने बताया कि किसान आंदोलन के कारण टोल कलेक्शन में कमी आई है, क्योंकि जिन गाड़ियों पर किसानों का झंडा लगा होता है वे टोल टैक्स का भुगतान नहीं करते। कर्मचारियों की सेटिंग जैसी कोई बात नहीं है।

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Source : Bhaskar

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