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करनाल

थाने से महज 300 मीटर दूर चोरी की कोशिश, बैंक को कई घंटे तक खंगालते रहे चोर

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थाने से महज 300 मीटर दूर चोरी की कोशिश, बैंक को कई घंटे तक खंगालते रहे चोर

सिटी थाना व सदर बाजार पुलिस चौकी से महज 300 मीटर दूर पुरानी अनाजमंडी स्थित एसबीआइ शाखा को चोर कई घंटे तक खंगालते रहे, लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं। छत का दरवाजा तोड़ शाखा में घुसे चोरों ने चैस्ट तोड़कर कैश चोरी करने का प्रयास किया, लेकिन इसमें वे सफल नहीं हो पाए। चोरों ने वारदात से पहले शाखा में लगे आधा दर्जन सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए तो कई कैमरे का एंगल ही छत की ओर कर दिया, जिसके बाद वारदात को अंजाम दिया।

थाने से महज 300 मीटर दूर चोरी की कोशिश, बैंक को कई घंटे तक खंगालते रहे चोर

बैंक शाखा में डेढ़ दर्जन सीसीटीवी कैमरे, फिर भी कैद नहीं हुए चोर

बैंक शाखा में प्रबंधन की ओर से हालांकि करीब डेढ़ दर्जन सीसीटीवी कैमरे लगाए हुए हैं, लेकिन चोर इनमें कैद नहीं हो पाए। चादर ओढ़े हुए एक चोर कुछ सेंकेंड ही दिखाई पड़ा, लेकिन वह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा। बैंक अधिकारी व पुलिस करीब दो घंटे तक सीसीटीवी कैमरे खंगालती रही। चोरों ने आधा दर्जन कैमरे तोड़ दिए तो कई के एंगल ही बदल दिए, जिससे वे कैमरे में आने से बच गए।

तीन गेट तोड़कर की वारदात : प्रबंधक

शाखा प्रबंधक राजेश साहू का कहना है कि चोरों ने छत से शाखा में प्रवेश किया है। इसके लिए उन्होंने कैंची गेट का ताला तोड़ा तो इसके बाद तीन अन्य दरवाजे तोड़े। हालांकि चैस्ट में रखा कैश वे चुरा नहीं पाए, लेकिन स्वैप मशीन, कैश डिपोजिट मशीन व सीसीटीवी कैमरे आदि तोड़ गए। एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई कुछ तस्वीरों के अनुसार चोरों ने सुबह दो बजकर 55 मिनट पर दरवाजा तोड़ कर प्रवेश किया। वारदात को देख आशंका है कि इसमें पांच से छह आरोपित शामिल रहे हैं।

 

पुलिस की गश्त तक नहीं, लगातार हो रही वारदातें

पुरानी अनाजमंडी व आसपास का क्षेत्र भले ही सिटी थाना व सदर बाजार पुलिस चौकी के करीब 300 मीटर दायरे में हैं, लेकिन यहां पुलिस की गश्त तक नहीं। इसी का फायदा उठा चोर व बदमाश वारदातों को लगातार अंजाम दे रहे हैं। करीब एक माह पहले ही सिटी ट्रेडिंग कंपनी  से भी चोरों ने दो लाख से अधिक की नकदी व चैकबुक आदि चुरा ली थी। इसके बाद यहीं पर एक अन्य प्रतिष्ठान पर भी चोरों ने वारदात कर हजारों की नकदी व सामान चोरी कर लिया था। एसबीआइ शाखा प्रबंधक राजेश साहू का कहना है कि छह माह के दौरान तीन बार पुलिस को गश्त के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसे चलते लगातार वारदातें हो रही हैं।

 

 

Source : Jagran