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पानीपत

जीटी रोड पर दिखी आंखों को नम कर देने वाली कहानी, अपने ही छोड़ गए साथ

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जीटी रोड पर दिखी आंखों को नम कर देने वाली कहानी, अपने ही छोड़ गए साथ

 

रात जितनी काली थी, उतना ही अंधेरा यहां फुटपाथ पर सोने वालों की जिंदगी में भी घुला था। इनके लिए दिन भी किसी स्‍याह रात से कम नहीं होती। पानीपत में रात का रिपोर्टर, जब इनसे मिलने पहुंचा तो आवाज से पहले आंसू निकले। एक पिता, जिसने अपने बच्‍चों को बड़ा किया, वही जब खुद को सयाने समझने लगे तो पिता को ही घर से निकाल दिया। एक युवक हाथ में रोटी दबाए सो रहा था। आवारा कुत्‍ता वो रोटी भी उठाकर ले गया। ठेकेदार था। काम छूट गया। ऐसे हालात में पत्‍नी भी छोड़कर चली गई। ऐसे बुजुर्गों और युवाओं को देखने, संभालने के लिए कोई नहीं है।

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रात के लगभग पौने 11 बजे थे। रेलवे रोड के पास जीटी रोड के फुटपाथ पर लगभग 32 साल के एक युवक के  तन के ऊपरी हिस्से पर कपड़े तक न थे। वहीं कट्टों को बिछौना बनाकर सो रहा था। तभी वहां आए एक कुत्ते ने दबे पांव उसके सिरहाने के पास रखी एक रोटी उठा ली। कुत्ता रोटी खा ही रहा था कि युवक की आंख खुल गई।

जीटी रोड पर दिखी आंखों को नम कर देने वाली कहानी, अपने ही छोड़ गए साथ

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कुत्ते को भगाकर बचे हुए दो निवाले सिर के नीचे रखे कपड़े के बीच में दबाकर रख लिए। बातचीत करने पर पता चला कि सुरेश नाम का ये युवक उप्र के एक शहर में कभी ठेकेदार था। काम नहीं चला तो पत्नी ने भी साथ छोड़ दिया।  तब से आज तक की जिंदगी सड़क पर ही बीता रहा है।

 

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उम्र ढली तो बच्चों ने छोड़ा साथ

मोडा। ये नाम ही अब लगभग 75 साल के बुजुर्ग की पहचान बन चुकी है। उम्र ढल गई तो जिन बच्चों को अपने हाथों से पाला था, उन्होंने भी घर में जगह नहीं दी। पांव शरीर का बोझ उठाने से जवाब देने लगे तो पेट पालने के लिए भीख मांगने के सिवाय कोई चारा नहीं दिखा। कहीं से व्हील चेयर मिल गई। इसी पर बैठकर लोगों के सामने हाथ फैलाना अब मजबूरी बन चुकी थी।

 

जब बिखर गए सिक्के

रात लगभग 11:30 बजे की बात है। भीख मांगने वाली एक महिला यहीं पर सेक्टर 11-12 मोड़ के पास फुटपाथ किनारे बैठकर सिक्के गिन रही थी। उम्र के साथ कंपकंपाते हाथों से कटोरा गिरा तो सिक्के सड़क पर बिखर गए। बुजुर्ग दिनभर कुर्सी पर बैठकर लोगों से पैसे मांगता, बूढ़ी महिला की मदद के लिए कमजोर पांवों पर जोर देकर वो भी खड़ा हो गया। शायद उसे जिंदगी का एक सबक आज भी याद है कि किसी की मदद से पीछे नहीं हटना चाहिए।

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