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बच्‍चों की चिंता छोड़ निभा रहीं चिकित्‍सा का फर्ज, परिवार की तरह संभाल रहीं कोविड मरीजों को

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बच्‍चों की चिंता छोड़ निभा रहीं चिकित्‍सा का फर्ज, परिवार की तरह संभाल रहीं कोविड मरीजों को

 

कोरोना महामारी में लोगों को बचाने में स्वास्थ्य कर्मी योद्धा बने हुए हैं। ऐसे में नर्सों की भूमिका सबसे महत्तवपूर्ण हैं, क्योंकि डाक्टर के साथ हमेशा मरीज की सेवा में वह तैनात रहती हैं। मरीज की काउंसलिंग करने से लेकर उसे दवाई व खाना तक देने में नर्स लगी हुई हैं। इन्हीं में बिलासपुर निवासी स्टाफ नर्स जसविंद्र कौर एक वर्ष से अधिक समय से कोविड वार्ड व अस्पताल में नर्सों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं।

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जसविंद्र कौर ने बताया कि इस महामारी में निश्चित रूप से ड्यूटी बढ़ गई है। स्वास्थ्य केंद्र को भी तीन रोस्टर में बांटा गया है। जिसमें तीन रोस्टर कोविड सेंटर, चार रोस्टर में सामान्य अस्पताल में बनाया गया है। सातों रोस्टर की तीनों शिफ्टों में नर्सों की ड्यूटी, कोविड वार्ड में सिलेंडर की उपलब्धता, खाली सिलेंडर को भरवाने का कार्य, मरीजों के डाइट प्लान, साफ सफाई आदि के प्रबंधन का कार्य वही देख रही है। कई बार ऐसा होता है कि कोई नर्स अचानक तबीयत खराब होने या फिर किसी अन्य वजह से छुट्टी पर चली गई, तो ऐसे में वह खुद ही व्यवस्था संभालती है।

बच्‍चों की चिंता छोड़ निभा रहीं चिकित्‍सा का फर्ज, परिवार की तरह संभाल रहीं कोविड मरीजों को

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कोरोना को लेकर मरीज भी घबराए हुए होते हैं। ऐसे में उनकी भी काउंसलिंग की जाती है। उन्हें समझाया जाता है कि कोई दिक्कत की बात नहीं है। जल्दी ही कोरोना से ठीक हो जाओगे। इसका सकारात्मक असर मरीज पर पड़ता है। इससे वह जल्दी रिकवरी करने लगता है। किसी मरीज को कई बार खाने को लेकर दिक्कत होती है, तो उसे भी समझाया जाता है। कोशिश रहती है कि मरीज अस्पताल में बिल्कुल घर की तरह रहे। जिससे उसकी सेहत जल्दी सुधरेगी।

परिवार तक को समय नहीं दे पा रही

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गत वर्ष जब कोरोना फैला, तो बिलासपुर में सबसे पहले मरीज जसविंद्र कौर के पति चमन लाल ही आए थे। हल्के लक्षण होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। इस दौरान पति होम आइसोलेशन में रहे। ऐसे में जसविंद्र ने पति व परिवार को संभाला। पति के ठीक होने के बाद फिर ड्यूटी पर डट गई। हालांकि इस महामारी में बच्चों को समय नहीं दे पाती है। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। उस ओर भी निगरानी नहीं रखी जाती। घर पर आने के बाद भी फोन बजता रहता है। कॉल अटैंड करना बेहद जरूरी है।

 

Source : Jagran

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