वाहनों के दस्तावेज बनवाने से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस तक के लिए एसडीएम कार्यालय में पैसा लिया जा रहा था। यह पैसा अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक में बंट रहा था। पहले लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 500 रुपये और स्थायी लाइसेंस के लिए 900 रुपये लिए जा रहे थे। आरसी क्लर्क सुभाष लांबा 200 से 250 रुपये प्रति फाइल ले रहा था। यह पैसा सरल केंद्र के मानिटरिंग इंचार्ज अमित, मोटर व्हीकल क्लर्क राजेंद्र डांगी व सुभाष लांबा आपस में बांट लेते थे।

जब राजेंद्र डांगी ने डीलरों से नीलामी के वाहनों के फर्जी दस्तावेजों पर आरसी तैयार करने की सेटिंग की, तो यह पैसा बढ़ गया। तत्कालीन एसडीएम पूजा चांवरिया व दर्शन सिंह को भी इसके लिए ढाई लाख रुपये प्रति सप्ताह देने की सेटिंग अमित व राजेंद्र डांगी ने की थी। इसके बाद अमित, राजेंद्र डांगी व सुभाष लांबा के बीच बातचीत हुई। इसमें तय हुआ कि जो फाइल मोटर रजिस्ट्रेशन क्लर्क राजेंद्र मार्क करेगा। उसके आठ हजार रुपये प्रति फाइल और जो फाइल मोटर रजिस्ट्रेशन क्लर्क संजीव सैनी मार्क करेगा। उसके छह हजार रुपये प्रति फाइल लिए जाएंगे। यह पैसा डीलर से लेकर अमित ही बांटता था। इस तरह से करीब 1500 फाइलों का फर्जी रजिस्ट्रेशन किया गया था। इस पैसे में कंप्यूटर आपरेटर गगनदीप, कुनाल व शुभम के पास भी हिस्सा जाता था। उन्हें भी इस फर्जीवाड़े की पूरी जानकारी थी। इस फर्जीवाड़े में आरोपित अमित, राजेंद्र डांगी व डीलर सुनील चिटकारा को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब कोर्ट में दिए चालान में यह तथ्य सामने आए हैं।

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नीलामी की गाडिय़ों की बनाते थे आरसी

आरसी फर्जीवाड़े में सबसे पहले डीलर सुनील चिटकारा गिरफ्तार किया गया था। वह इस समय जेल में है। सुनील चिटकारा बैंकों से उन गाडिय़ों को नीलामी में खरीदता था जिनकी किस्तें जमा नहीं होती थीं। इन गाडिय़ों की वह एनओसी नहीं लेता था। इस बीच उसकी मुलाकात जगाधरी में मोटर व्हीकल क्लर्क राजेंद्र डांगी से हुई थी। जिसने नीलामी में छुड़वाई गई गाडिय़ों का बहुत कम टैक्स व बिना पासिंग और एनओसी के नया रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा। राजेंद्र ने ही सुनील की मुलाकात सरल केंद्र जगाधरी में मानिटरिंग इंचार्ज अमित कुमार से कराई थी। मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर का भी फर्जी प्रमाण पत्र यही तैयार करके देते थे। उनके बीच बात तय हुई कि एमवीआइ की फर्जी पासिंग रिपोर्ट देने के 40 हजार रुपये प्रति गाड़ी और एमवीआइ पासिंग प्रमाण पत्र देने पर 50 हजार रुपये प्रति गाड़ी देने होंगे। बाद में उनका सौदा साढ़े 27 हजार रुपये प्रति फाइल का तय हुआ। यह पैसा अमित लेता था। यहां पर रजिस्टर्ड कराई गई गाडिय़ों को रोहतक, सोनीपत, झज्जर, भिवानी, बहादुरगढ़ समेत अलग-अलग जगहों पर बेचा गया है। इस फर्जीवाड़े में कार डीलर नितिन, अमित कुमार व शुभम के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि बाद में एमवीआइ की फर्जी पासिंग रिपोर्ट सुनील चिटकारा ही तैयार करने लगा। नीलामी वाली फाइलों में बैंक का फर्जी सेल लेटर भी वहीं लेकर आता था। जिसमें गाड़ी की कम कीमत लिखवाई जाती थी। जिससे टैक्स कम हो जाता था। स्थानीय आइडी का इंतजाम सरल केंद्र से अमित ही करता था।

अधिकारियों ने दबा दी थी शिकायतें

गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आरोपितों ने अपने कबूलनामे में तत्कालीन एसडीएम पूजा चांवरिया व दर्शन सिंह के शामिल होने की बात कही है। जिस पर एसआइटी ने दोनों अफसरों को पूछताछ के लिए तलब कर लिया है। पुलिस ने भी कोर्ट में जो चालान दिया। उसमें भी दोनों एसडीएम का नाम है। इस फर्जीवाड़े की पहले भी कई बार शिकायतें अधिकारियों तक पहुंची थी, लेकिन इन अधिकारियों ने जांच कराने के बजाय मामले को दबा दिया था। करीब 11 माह पहले चरखी-दादरी निवासी जितेंद्र कुमार ने आरटीआइ लगाकर वर्ष 2018 से 2020 तक दर्ज की गई गाडिय़ों की जानकारी मांगी थी। उन वाहनों की भी जानकारी मांगी गई थी। जिनकी सरकारी फीस 50 हजार रुपये से कम काटी गई है। यह जानकारी उन्हें नहीं मिली। जुलाई 2020 में भी चरखी-दादरी के ही अमरदीप ने आरसी फर्जीवाड़ा होने की शिकायत की, लेकिन यह सभी शिकायतें एसडीएम ने दबा दी थी। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने भी शिकायत पर एसडीएम से रिपोर्ट मांगी थी। वह भी रिपोर्ट गोलमोल कर दी गई थी।