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आंदोलन खत्‍म, किसानों ने रिबन काट करनाल का बसताड़ा टोल प्‍लाजा किया शुरू, अभी इन्‍हें मिलेगी छूट

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आंदोलन खत्‍म, किसानों ने रिबन काट करनाल का बसताड़ा टोल प्‍लाजा किया शुरू, अभी इन्‍हें मिलेगी छूट

नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया के आदेश आने के बाद आखिरकार बसताड़ा टोल खोलने पर किसानों व टोल अधिकारियों में सहमति बन गई। पूर्वाह्न करीब 11 बजे नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वीरेंद्र कुमार की उपस्थिति में किसानों ने सकारात्मक माहौल में रिबन काटकर टोल पर कामकाज शुरू कराया। इसी के साथ वाहनों से टोल वसूली भी आरंभ हो गई। वहीं, किसानों ने स्पष्ट किया कि पंजाब की जत्थेबंदियों के लिए अभी कुछ समय टोल खुला रहेगा। अन्य वाहन टोल चुकाकर ही आवागमन करें। बसताड़ा टोल पर 15 दिसंबर तक लंगर भी जारी रहेगा। इसके अलावा अपनी विभिन्न मांगों के संदर्भ में उन्होंने टोल प्रबंधन को ज्ञापन भी दिया।

करनाल का बसताड़ा टोल प्‍लाजा शुरू हो गया है।

बता दें कि रविवार को आए एनएचएआइ के आदेशों के फलस्वरूप बसताड़ा टोल पर पाथ इंडिया कंपनी की ओर से काम शुरू करने की पुख्ता तैयारी कर ली गई थी। पहले तय हुआ था कि रविवार की मध्यरात्रि से ही टोल शुरू कर दिया जाए लेकिन दिल्ली बार्डरों से लगातार लौट रहे किसानों के वाहनों को देखते हुए टोल प्रबंधन ने यह फैसला टाल दिया। इस बीच स्थानीय किसान नेताओं से वार्ता की गई तो उन्होंने भरोसा दिलाया कि सोमवार दिन में सकारात्मक माहौल में वे खुद रिबन काटकर टोल शुरू करा देंगे। इसी आधार पर सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वीरेंद्र कुमार की उपस्थिति में किसान नेता जगदीप सिंह औलख, बहादुर मैहला व अन्य नेताओं ने रिबन काटकर टोल पर कामकाज शुरू करा दिया।

इस मौके पर किसान नेता जगदीप औलख ने बताया कि टोल की शुरुआत करा दी गई है। हालांकि, फिलहाल पंजाब लौट रही जत्थेबंदियां के लिए तीन-चार लेन खाली रखने के लिए टोल प्रबंधन को कहा गया है। इसी प्रकार अभी टोल पर 15 दिसंबर तक लंगर भी जारी रहेगा। यदि मंगलवार को भी आवश्यक हुआ तो दिल्ली बार्डरों से आ रहे किसानों के लिए लेन खाली रखवाए जाएंगे। वहीं, स्थानीय लोगों के लिए पहले की तरह लोकल आइडी के आधार पर टोल की एक लेन खाली रखने के लिए प्रबंधन को कहा गया है। इसके अलावा ज्ञापन में टोल पर अक्सर लगने वाले जाम की समस्या के दृष्टिगत प्रबंधन से लेन बढ़ाने और आसपास टूट चुकी सड़क की मरम्मत कराने की मांग भी की गई है। उन्होंने बताया कि बसताड़ा टोल पर किसानों ने लंबा संघर्ष किया। यहीं लाठीचार्ज हुआ तो सभी प्रमुख पर्व त्योहार भी मनाए गए। यहां से जुड़ी यादें हमेशा साथ रहेंगी। अन्य टोल भी जल्द शुरू हो जाएंगे।

नई दरें लागू

टोल अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष से लगातार बंद टोल पर अब वसूली आरंभ कर दी गई है। वाहन चालकों को नई दरों के आधार पर टोल देना होगा। उल्लेखनीय है कि जिले के बसताड़ा टोल पर रोजाना 30 से 35 हजार छोटे वाहनों का आवागमन होता है। इसके अलावा करीब दस हजार भारी वाहन भी हर दिन यहां से गुजरते हैं। इससे लगभग 70 लाख रुपये का राजस्व एकत्र होता रहा है लेकिन अब नई दरों के साथ इसमें करीब सात लाख रुपये प्रतिदिन की वृद्धि होने का अनुमान है। वाहनों में भी लगभग पांच प्रतिशत वृद्धि मानी जा रहर है। टोल पर भुगतान में रिटर्न यात्रा की छूट व मासिक भुगतान की सुविधा दी जाएगी लेकिन इसके लिए वाहन पर फास्टैग जरूरी होगा। जबकि टोल से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्र में वाहनों के लिए 150 रुपए और 20 किलोमीटर दायरे के लिए 300 रुपए के मासिक पास की सुविधा भी मिलेगी। वहीं, जींद स्टेट हाईवे स्थित जिले के प्योंत टोल पर पुरानी दरों से ही टोल लिया जाएगा।

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