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एक ऐसी मां की दास्तां, पांच औलादें फिर भी चंदा मिलाकर गैरों ने किया अंतिम संस्कार

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कहते हैं , दर्द का अहसास अपनों को ही होता है। पर जब दर्द ही अपने दें तो अहसास कौन करे। कुछ ऐसी ही कहानी थी यमुनानगर के फर्कपुर थाना क्षेत्र की नंदा कालोनी में जिंदगी के एक-एक दिन काट रही पांच संतानों की बेसहारा मां 90 वर्षीय हरबंस कौर की, जिसे मरते वक्त तक बुढ़ापे ने कम, अपनों के परायापन ने ज्यादा जख्म दिए।

शुक्रवार देर रात हरबंस कौर व उसके 55 वर्षीय बेटे रणजीत का शव कमरे में मिला है। डाक्टर ने दोनों की मौत जहर से होने का अंदेशा जताया है। अपनों की संवेदनहीनता का आलम यह है कि भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद बेसहारा बुजुर्ग को मरने के बाद भी अपनों का कंधा नसीब नहीं हुआ और लोगों ने चंदा कर मां-बेटे का अंतिम संस्कार कराया, जबकि उसी शहर बुजुर्ग की अपनी बेटी रहती है।

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90 वर्षीय हरबंस कौर तीन बच्चों और दो बेटियों की मां थी। बड़े ही अरमानों से पालन-पोषण करने के बाद उन्होंने दो बेटियों और दो बेटों की शादी कराई लेकिन बुढ़ापे में शादीशुदा संतानें सहारा नहीं बन सकीं। सबसे छोटे बेटे राजू को मां से लगाव था। वह उसे नहीं छोड़ सका और जीवनभर उसके साथ ही रहा। बाद में दुनिया से मां के साथ में ही चला गया।

मौत की सूचना मिलने के बाद भी नहीं पहुंचे बेटे  

मृतका हरबंस कौर मूल रूप से पंजाब के अमृतसर के छहरटा की रहने वाली थी। उसके पति गरीब सिंह पहले शुगर मिल में नौकरी करते थे। उनकी मौत हो चुकी है। संपत्ति के नाम पर उन्होंने एक मकान बनाया था। उनके पास दो बेटियां व तीन बेटे हैं। बेटियों में केवल बलविंद्र कौर जीवित है। वह भी बुजुर्ग हो चुकी है। बेटे अवतार सिंह, अजीत सिंह व राजू थे। इनमें से राजू अपनी मां हरबंस कौर के साथ ही रहता था। बलविंद्र कौर ने बताया कि अवतार व अजीत सिंह ने उनकी मां हरबंस कौर व भाई राजू को मकान का बंटवारा कर घर से बाहर निकाल दिया था। उन दोनों की शादी हो चुकी है। इनमें से अवतार सिंह अमृतसर में ही रहता है, जबकि अजीत सिंह उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के स्योहारा में रहता है। दोनों प्राइवेट नौकरी करते हैं। अब उनकी मौत होने पर अजीत व अवतार को भी सूचना दी गई, लेकिन उन्होंने आने से इंकार कर दिया।

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बड़ी उम्मीद से बेटी की चौखट पहुंची थी बुजुर्ग, नहीं मिला सहारा 

बेटों से धोखा मिलने के बाद बुजुर्ग मां छोटे बेटे राजू के साथ यमुनानगर आ गई। यहां उसकी बेटी रहती थी लेकिन यहां भी उसे निराश होना पड़ा। दामाद ने घर में आश्रय तो नहीं ही दिया, बेटी को भी कभी न मिलने की सख्त हिदायत दे दी। रहने को कोई ठिकाना नहीं मिला तो रेलवे स्टेशन के पीछे ही खाली पड़ी जगह में खुले में मां-बेटा रहने लगे। बेटा राजू दिहाड़ी मजदूरी करता था। मां को भी रेलवे स्टेशन के पास कोई खाने को दे देता था। करीब दो साल तक उन्होंने ऐसे ही दिन गुजारे। इस बीच नंदा कालोनी निवासी मोनू ने मानवता दिखाते हुए उन्हें सहारा दिया। कालोनी के लोग भी इनके प्रति सहानुभूति रखते थे।

यमुनानगर में कमरे में मृत मिले हरबंस कौर और उसके बेटे रणजीत सिंह की फाइल फोटो।

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रेलवे से सेवानिवृत्त रघुबीर सिंह से कमरा किराये पर लिया

मोनू ने बताया कि उन्हें किसी ने बताया कि एक बुढिय़ा और अपने बेटे के साथ रेलवे स्टेशन के पास रहती है। बेचारे बेहद गरीब हैं। खुले में दिन गुजार रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर जाकर देखा तो दया आ गई। उनके पास सामान के नाम पर एक एक बैग, रजाई, कुछ कपड़े व बर्तन थे। हमारे अनुरोध पर रेलवे से सेवानिवृत्त रघुबीर ङ्क्षसह ने 1500 रुपये किराये पर कमरा दे दिया।  किराया भी मोनू ने ही देने की बात स्वीकार ली। मकान मालिक को कहा-इनसे कुछ भी लेने की जरूरत नहीं है। करीब एक माह पहले ही यह दोनों यहां कमरे में रहने लगे थे।

खाने के सामान से आ रही थी दुर्गंध

इस कमरे में दो चारपाई थी। एक चारपाई की रस्सियां टूट चुकी थीं। कमरे में पॉलीथिन में सामान है। गैस के चूल्हे पर चाय बनाने का बर्तन रखा हुआ था। सीन ऑफ क्राइम की टीम ने भी घटनास्थल का दौरा किया। जो भी खाने का सामान वहां पर मिला। उसमें दुर्गंध हो रही थी। राजू के मुंह व कान से खून भी निकल रहा था। आशंका है कि जहर से दोनों की मौत हुई है।

बुढ़ापा पेंशन मिलती थी वृद्धा को

वृद्धा को बुढापा पेंशन मिलती थी। अमृतसर से ही वह पेंशन लेकर आती थी। मोनू ने बताया कि वृद्धा को शुगर व अन्य बीमारी थी। कई दिन पहले राजू से बात हुई थी तो उसने कहा था कि मां की पेंशन लेने के लिए अमृतसर जाना है जिस पर बस का टिकट कराकर देने का आश्वासन हमने दिया था। अब इनकी मौत हो चुकी है।

source Jagran

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