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हरियाणा के 22 जिलों से कोरोना की मौतों का सच:अप्रैल में कोविड प्रोटोकॉल से 3814 संस्कार हुए, सरकारी रिकॉर्ड में कोरोना से 1225 मौतें ही दर्ज

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हरियाणा के 22 जिलों से कोरोना की मौतों का सच:अप्रैल में कोविड प्रोटोकॉल से 3814 संस्कार हुए, सरकारी रिकॉर्ड में कोरोना से 1225 मौतें ही दर्ज

हरियाणा कोरोना मरीजों की सबसे कम मृत्यु दर वाले राज्यों में शामिल है। यह दर करीब 0.9% है। लेकिन, क्या हकीकत यही है? यह जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर्स ने प्रदेश के 22 जिलों के मुख्य श्मशानों में अप्रैल में हुए अंतिम संस्कारों के आंकड़े जुटाए। इसमें चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

शमशान के बाहर अंतिम संस्कार करते हुए। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

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सरकारी रिकॉर्ड में अप्रैल में कोरोना से कुल 1225 मौतें दर्ज हैं। जबकि, श्मशानों में अंतिम संस्कार करने वाली संस्थाओं के मुताबिक पूरे महीने में 3814 लोगों का कोविड प्रोटोकोल के तहत अंतिम संस्कार किया गया है। यह संख्या सरकारी रिकॉर्ड से करीब तीन गुना अधिक है।

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सबसे ज्यादा गुरुग्राम में 1350 लोगों का कोविड प्रोटोकोल के तहत अंतिम संस्कार हुआ, जबकि वहां रिकॉर्ड में अप्रैल में सिर्फ 112 मौतें हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार हरियाणा में कोरोना संक्रमण से पिछले एक साल के दौरान करीब 4882 मौतें हुई हैं, जबकि श्मशानों में सिर्फ अप्रैल में ही 3814 अंतिम संस्कार हो गए। हालांकि, एक तथ्य यह भी है कि अप्रैल में दम तोड़ने वाले मरीजों में एक बड़ा आंकड़ा दिल्ली और यूपी से आने वालों का भी शामिल है।

श्मशान बढ़ाया, 2 बीघा जमीन की रिजर्व, लोगों ने जताया विरोध

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रोहतक में कोराेना से जान गंवाने वालों के अंतिम संस्कार के लिए 2 श्मशान बनाए गए थे। अप्रैल में मौत का आंकड़ा बढ़ने पर प्रशासन ने जींद रोड पर तीसरा श्मशान कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार के लिए रिजर्व कर दिया। वहीं, वैश्य कॉलेज रोड श्मशान घाट के पास भी प्रशासन ने 2 बीघा जमीन कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार के लिए रिजर्व की है।

इसी श्मशान में 9 कुंडों की संख्या बढ़ाकर 12 की गई है। जींद रोड के श्मशान को लेकर दो दिन पहले विवाद भी हुआ था। साथ लगती कॉलोनी के लोगों ने हंगामा किया। कोरोना मरीजों का शव लाई एंबुलेंस को भी अंदर नहीं जाने दिया। लोगों का कहना था कि कोरोना मरीजों के अंतिम संस्कार के कारण हवा में वायरस फैल रहा है।

बढ़ती संख्या: शवों की लग रही है लाइन

करनाल: मौतों के बढ़ते ग्राफ काे देख नगर निगम ने बलड़ी गांव के श्मशाम घाट का विस्तार किया। 45 कुंड बन चुके हैं। और कुंड बनाने का काम जारी है।
कुरुक्षेत्र: पहले एक शिवधाम में कोविड मृतकों के संस्कार हो रहे थे। कस्बों में भी एक-एक जगह संस्कार हो रहा था। बढ़ती मौतों को देखते हुए 27 श्मशान व कब्रिस्तान चिह्नित किए गए हैं।
सोनीपत: अंतिम संस्कार सीएनजी मशीन से होते थे। मौतें इतनी बढ़ी कि अब लकड़ियों से भी करने पड़ रहे हैं।
गुरुग्राम: जिले में अप्रैल माह मौतें इतनी तेजी से बढ़ी कि यहां शमशान घाटों के बाहर पार्किंग में भी शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
रेवाड़ी: मौतें बढ़ने से श्मशान भी बढाने शुरू कर दिए हैं। अभी तक सिर्फ एक श्मशान में कोविड मृतकों का अंतिम संस्कार हो रहा था। अब दो में हो रहा है और एक गैस आधारित तैयार हो रहा है।
हिसार: शहर के सभी चाराें शमशान घाट पर अब काेराेना शवाें के लिए अलग से कुंडाें के लिए व्यवस्था की जा रही है।

अधजले रह गए शव, खूंटियां भी पड़ी कम

अम्बाला सिटी के गोबिंदपुरी रामबाग श्मशान घाट में कोविड प्रोटोकॉल से संस्कार के लिए जगह कम पड़ गई तो जगह बनानी पड़ी। चिताएं जलाने के लिए शेड नहीं था। 29 अप्रैल शाम को बारिश की वजह से कई चिताएं बुझ गईं और शव अधजले रह गए। उसके बाद शेड बनाया जा रहा है। श्मशान घाट में अस्थियां रखने के कमरे में खूंटियां कम पड़ी गईं तो इसके लिए नया कमरा तैयार करना पड़ा।

मौतों की संख्या बढ़ती गई तो बढ़ाने पड़े कुंड

कैथल में शांति वन श्मशान घाट के पंडित यशपाल ने बताया कि अप्रैल माह में कोरोना से मौताें की संख्या बढ़ने के कारण श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए कुंड की संख्या बढ़ानी पड़ी। पहले मौजूद 11 कुंड में से 3 कोविड मरीजों के लिए अधिकृत किए गए थे। लेकिन मौतें बढ़ने पर कोविड मृतकों के लिए 5 कुंड करने पड़े।

 

 

 

 

source :BHASKAR

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