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ये अस्पताल है खास, लोगों को महज 30 रुपये में मिल रहा इलाज, दवाइयां भी मिलती हैं निशुल्क

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ये अस्पताल है खास, लोगों को महज 30 रुपये में मिल रहा इलाज, दवाइयां भी मिलती हैं निशुल्क

शहर जींद रोड पर बाइपास स्थित महाराजा अग्रेसन चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल मरीजों का तीमारदार बना हैं। इस अस्पताल में मरीजों को महज 30 रुपये की पर्ची पर इलाज किया जाता है। दवाइयां निशुल्क दी जाती हैं। अस्पताल में मुख्य रूप से नेत्र व दांत के रोगों की जांच की जाती है। मरीज द्वारा 30 रुपये की पर्ची कटवाने के बाद मरीज तीन दिन तक अपना इलाज करवाने के लिए अस्पताल पहुंच सकता है। यहीं नहीं, अस्पताल में नेत्र रोगों की जांच को लेकर विशेष सुविधा दी जा रही है। जिसके तहत आधे यानि आपरेशन पर खर्च होने वाले राशि का 50 प्रतिशत तक ही लिया जाता है। इसमें भी दवाइयां बिल्कुल निशुल्क दी जाती है। बता दें कि इस अस्पताल की स्थापना वर्ष 1995 में की गई थी। उस समय केवल दो कमरों में ही अस्पताल चलाया जाता था। उस समय पांच रुपये की पर्ची पर इलाज दिया जाता था।

ये अस्पताल है खास, लोगों को महज 30 रुपये में मिल रहा इलाज, दवाइयां भी मिलती हैं निशुल्क

50 हजार मरीजों का किया जा चुका है इलाज

ट्रस्ट के इस अस्पताल द्वारा 26 वर्षों में अब तक करीब 50 हजार मरीजों का इलाज किया जा चुका है। यहां पर प्रतिदिन 50 से 100 मरीज अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं। इस अस्पताल में केवल शहर ही नहीं, बल्कि आस-पास के गांवों से भी लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ मुक्ति पांडे द्वारा सुबह दस से शाम तीन बजे तक ओपीडी में आने वाले मरीजों की स्वास्थ्य की जांच की जाती है।

ऐसे हुई शुरुआत

संस्था के पदाधिकारी सुभाष गोयल ने बताया कि वर्ष 1995 में महाराजा अग्रसेन चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से संस्था का गठन किया गया था। जिसमें कुल सात सदस्य शामिल थे। संस्था शुरूआत में सामाजिक कार्य करती थी, परंतु कुछ समय बाद ट्रस्ट के नाम से लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्​देश्य अस्पताल स्थापित करने का निर्णय लिया गया। जिसके बाद इस अस्पताल की स्थापना हुई। गोयल ने कहा कि गरीब एवं जरूरतमंद लोग रुपयों के अभाव में अपना इलाज नहीं करा पाते हैं। उन्हीं की सहायता के लिए अस्पताल शुरू किया गया।  इसके साथ ही समाजहित को लेकर अन्य कार्य भी संस्था की तरफ से चलाए जा रहे हैं।

संस्था के सभी सदस्य आपस में सहयोग करते हुए राशि एकत्रित करते हैं। यहां कार्यरत चिकित्सक और स्टाफ सदस्यों का वेतन भी संस्था की तरफ से दिया जाता है। कभी भी चंदा नहीं मांगा जाता। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों में लोगों को इलाज लेने में काफी खर्च होता है। रजिस्ट्रेशन करवाने में ही 150 से 200 रुपये लिए जाते हैं। ऐसे में उनकी संस्था ने गरीब लोगों की सेवा के लिए अस्पताल चलाया जा रहा है।

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