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पानीपत

तीन बच्‍चों की मौत मामले में धीमी जांच पर भड़के गृहमंत्री, लाठीचार्ज पर भी मांगी रिपोर्ट

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तीन बच्‍चों की मौत मामले में धीमी जांच पर भड़के गृहमंत्री, लाठीचार्ज पर भी मांगी रिपोर्ट]

 

तीन बच्चों की मौत और ग्रामीणों पर लाठीचार्ज के मामले में गृहमंत्री अनिल विज ने नाराजगी जताई है। जांच अब करनाल के एसपी एसएस भौरिया को सौंप दी गई है। भौरिया ने पहले ही दिन नई एसआटी का गठन कर लिया। पानीपत के दोनों इन्वेस्टिगेशन इंचार्ज को बुलाकर पूरा मामला समझा। उधर, एक दिन पहले जीटी रोड जाम करने और पथराव करने के आरोपित 14 लोगों को पुलिस ने अदालत में पेश कर जेल भेज दिया।

तीन बच्‍चों की मौत मामले में धीमी जांच पर भड़के गृहमंत्री, लाठीचार्ज पर भी मांगी रिपोर्ट

पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने से गृहमंत्री अनिल विज काफी नाराज दिखे। उन्होंने ही इस पूरे मामले की जांच जिम्मा करनाल एसपी को सौंपा है। दो दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, डीएसपी हेडक्वार्टर सतीश कुमार वत्स ने बताया कि एसपी ने फोरेंसिक सैंपल लैब (एफएसएल) के डायरेक्टर को रिमाइंडर डाला है। जल्द से जल्द विसरा रिपोर्ट मंगाकर मामले का पटाक्षेप किया जाएगा।

 

बीती 7 जुलाई को बिंझौल गांव का 10 वर्षीय लक्ष्य, 12 वर्षीय अरुण, 10 वर्षीय वंश, 12 वर्षीय सागर, 8 वर्षीय सचिन और 8 वर्षीय सावन गांव के पास स्थित हरिओम गुप्ता के ब्लीच हाउस में पतंग के लिए धागा लेने गए थे। 8 जुलाई की अलसुबह ब्लीच हाउस के पास लक्ष्य, अरुण और वंश के शव रजवाहे में मिले। स्वजनों ने आरोप लगाया कि हरिओम गुप्ता, उसके मुनीम पवन बंसल, जमीन के मालिक बिंझौल के अश्वनी उर्फ आशु, आशु की मां और अन्य आठ श्रमिकों ने लक्ष्य, अरुण और वंश को पकड़ कर पीटा। तीनों को केमिकल के टैंक में डुबोकर मारा डाला। फिर शवों को रजवाहे में फेंक दिया। थाना मॉडल टाउन पुलिस ने उक्त आरोपितों के खिलाफ दर्ज कर रखा है। सांसद संजय भाटिया के कहने पर एसपी मनीषा चौधरी ने इस मामले में एसआइटी (स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम) गठित कर रखी थी।  शुक्रवार को स्वजनों ने पंचायत संग मिलकर धरना देने की कोशिश की थी। पुलिस ने वहां लाठीचार्ज कर दिया था। पुलिस ने 39 नामजद सहित 500 अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। बाकि आरोपितों की अब पुलिस तलाश कर रही है।

नई एसआइटी में ये शामिल

पानीपत में एसआइटी इस मामले की जांच कर रही थी। अब करनाल के डीएसपी जगदीप दून के नेतृत्व में एसआइटी गठित की गई है। उनके साथ मधुबन थाने के इंस्पेक्टर तरसेम चंद, एक महिला इंस्पेक्टर, साइबर सेल के इंस्पेक्टर कर्मबीर हैं। ग्रामीणों ने मांग की थी कि इस मामले की जांच दूसरे जिले की पुलिस से कराई जाए। इस मांग को मान लिया गया।