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क्या सीसीटीवी फुटेज से खुलेगा SDVM स्कूल की लिफ्ट में लैब सहायक की मौत का राज

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लिफ्ट ने स्कूल के लैब सहायक की जान ले ली। सेक्टर 12 स्थित एसडी विद्या मंदिर स्कूल में 34 वर्षीय अंकित गुप्ता लिफ्ट में फंस गए। हादसे के पांच घंटे बाद उनका शव बाहर निकाला जा सका। मैकेनिकों को लिफ्ट के अंदर की स्लैब काटनी पड़ी। हादसे के साथ कई सवाल भी खड़े हो गए। लिफ्ट और दरवाजे के बहुत कम गेप में अंकित फंसा कैसे, उसे बचाया क्यों नहीं जा सका। स्कूल में लिफ्ट होने पर भी मैकेनिकों को जल्द क्यों नहीं बुलाया गया। स्वजनों के कहने पर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज क्यों नहीं दिखाई गई।

विलाप करती बहन मनीषा जैन।

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मृतक के भाई अमित के मुताबिक अंकित शुक्रवार को सुबह साढ़े सात बजे के करीब स्कूल के लिए घर से निकला था। हादसे की खबर लगते ही पिता संजय गुप्ता के साथ स्कूल पहुंचा तो पता चला की अंकित द्वितीय तल पर लिफ्ट में फंसा है। उन्होंने प्रबंधन से लिफ्ट में फंसे अंकित को निकालने बारे बात की तो उन्होंने दिल्ली से मैकेनिक आने की बात बोली। फिर उसने अपनी बहन मनीषा जैन व जीजा रङ्क्षवदर कुमार जैन को बुलाया। इसके बाद धीरे धीरे स्टाफ भी निकल गया। इस पर स्वजनों का पारा चढ़ गया और उन्होंने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगा हंगामा किया।

सात माह पहले हुई थी शादी

अंकित व अमित दोनों जुड़वा भाई थे। उनकी एक बहन मनीषा है। भाइयों का जन्म 29 अप्रैल 1987 को हुआ था। अमित की चार साल पहले शादी हो गई थी। अंकित की सात माह पहले 25 नवंबर 2020 को मीनाक्षी के साथ शादी हुई थी। अंकित वर्ष 2011 से उक्त स्कूल में लैब सहायक के तौर पर कार्यरत था। भाई के मुताबिक अंकित सुबह साढ़े सात बजे स्कूल के लिए निकलता था और शाम पांच तक घर लौटता था।

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सेक्टर 12 स्थित एसडी विद्या मंदिर स्कूल।

रोते हुए बहन ने कहा, मैं निकाल लूंगी भाई को

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करीब तीन बजे अंकित लिफ्ट में फंसा। पता लगने पर वो मौके पर पहुंचे और प्रबंधन से उसे निकलवाने की व्यवस्था करने के लिए कहा। उसकी सुनवाई नहीं हो रही थी। बहन मनीषा ने रोते हुए कहा, मैं अपने भाई को निकाल लूंगी। मुझे आगे आने दें। आखिर उसका शव निकालने में इतनी देर क्यों लग रही है। सेक्टर 11-12 चौकी इंचार्ज एसआइ जयवीर ने बताया कि अभी स्वजनों ने शिकायत नहीं दी है। शिकायत के बाद कार्रवाई की जाएगी।

लिफ्ट को खोलने का प्रयास करते मैकेनिक।

सवाल – क्या नक्शे में पास है, क्या मेनटेंस होती थी

स्वजनों ने सवाल उठाया है कि क्या लिफ़ट नक्शे में पास थी। क्या इसकी मेनटेंस होती थी। हालात को देखकर ऐसा लगता है कि प्रबंधन की लापरवाही से हादसा हुआ है। तीसरी मंजिल की इमारत पर भी सवाल उठाए गए।

इस वजह से हादसा हुआ होगा, अलग-अलग कयास

1- बिल्डिंग निर्माण करने वाले पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह का कहना है कि ऐसा संभव है कि अंकित दूसरी मंजिल पर आ रहा होगा। लिफ्ट बीच में ही रुक गई। वह तनाव में आ गया होगा। उसने हाथों से दरवाजा खोलने का प्रयास किया। इसी बीच, लिफ्ट चल पड़ी, और वह कैबिन और लैंडिंग डोर के बीच में फंस गया।

2- दरवाजे में तकनीकी गड़बड़ के कारण हादसा हो सकता है। जब दूसरी मंजिल आई तो अंकित बाहर निकलने लगा होगा, उसी समय उसका पैर फिसल गया। लिफ्ट पहले ही ऊपर चली गई, लेकिन दोबारा से अपनी जगह पर लौट आई। इसी बीच अंकित उसमें फंस गया। उसकी जान चली गई।

3- इतना तय है कि वो लिफ्ट के अंदर था, क्योंकि उसका चेहरा बाहर की ओर है। यानी बाहर निकलने की ओर है। इसी वजह से अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं कि हादसा कैसे हुआ होगा।

4- कैबिन और लैंडिंग डोर का गैप 28 से 32 एमएम तक होता है। इतनी तंग जगह में फंसना मुश्किल होता है। दरवाजों की तकनीकी खामी के कारण ऐसा हादसा हो सकता है।

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