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24 घंटे में बदला हवा का रुख, अब पड़ेगी कड़ाके की ठंड, जानिए मौसम पूर्वानुमान

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24 घंटे में बदला हवा का रुख, अब पड़ेगी कड़ाके की ठंड, जानिए मौसम पूर्वानुमान

पिछले कुछ दिनों से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ तथा अरब सागर में बने हुए निम्न दबाव से पश्चिमी मध्य प्रदेश तक आने वाली निम्न दबाव की रेखा के प्रभाव से उत्तर भारत में दक्षिण पूर्व तथा पूर्व दिशा से नव हवाएं चल रही थी। आद्रता बढ़ने के कारण बादल भी छाए हुए थे जिससे उत्तर भारत के न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की वृद्धि देखी गई थी, लेकिन पिछले 24 घंटों के दौरान हवाओं की दिशा एक बार फिर बदल गई है तथा उत्तर पश्चिम दिशा से ठंडी और शुष्क हवाएं चलने लगी है। न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट देखी गई है तथा कई जिलों में सुबह के तापमान एकल इकाई में आ गए हैं। अगले लगभग एक सप्ताह तक कोई भी बड़ा पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय क्षेत्रों को प्रभावित नहीं करेगा। इस कारण उत्तर पश्चिम दिशा ठंडी हवाएं बिना अवरोध के चलती रहेंगी। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान सहित मध्य प्रदेश के कई जिलों में अगले 2 या 4 दिनों के दौरान तापमान और अधिक गिरेंगे।

अब कड़ाके की ठंड के लिए तैयार हो जाइए।

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राजस्थान तथा हरियाणा के कुछ जिलों में शीतलहर भी चलने की संभावना नजर आ रही है जिससे सुबह के समय कड़ाके की सर्दी देखी जाएगी। दिन के तापमान सामान्य के आसपास या सामान्य से कुछ नीचे रहेंगे। पश्चिमी विक्षोभ के अभाव के कारण उत्तर भारत में अगले कई दिनों तक बारिश की संभावना नहीं है।

बरसात नहीं होने से नहीं बढ़ेगी नमी

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साथ ही पहाड़ों पर बर्फबारी की संभावना भी कम है। बरसात ना होने के कारण वातावरण में नमी नहीं बढ़ेगी तथा घना कोहरा नहीं छाएगा इसलिए दिन के तापमान अभी फिलहाल अधिक नहीं गिरेंगे। दिन में धूप रहेगी तथा मौसम सुहावना बना रहेगा।

देश भर में बने मौसमी सिस्टम

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मौसम विभाग के मुताबिक इस समय पूर्व मध्य अरब सागर के ऊपर एक गहरा निम्न दबाव का क्षेत्र है और संबंधित चक्रवाती परिसंचरण औसत समुद्र स्तर के बारे में 5.8 किमी तक फैला हुआ है। एक टर्फ रेखा पूर्वी मध्य अरब सागर के ऊपर कम दबाव वाले क्षेत्र से जुड़े चक्रवाती परिसंचरण से गुजरात होते हुए दक्षिणपूर्व राजस्थान तक फैली हुई है। एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और आसपास के क्षेत्र में है, यह औसत समुद्र तल से 5.8 किमी तक फैला हुआ है।

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