पानीपत के प्रतिष्ठित डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल परिसर में शुक्रवार को रचनात्मकता और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। विद्यालय स्तर पर अंतरसदनीय थाली सजावट और रंगोली निर्माण प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न सदनों के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। दीपावली के पावन पर्व के नजदीक आते ही इस प्रकार की गतिविधियों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया, जहां हर तरफ पारंपरिक भारतीय संस्कृति की महक महसूस की जा रही थी।
प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई वे मनमोहक रंगोलियां और सजाई गई थालियां थीं, जो न केवल देखने में सुंदर थीं बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भी कहानी कह रही थीं। विभिन्न सदनों के विद्यार्थियों ने अपने वैचारिक कौशल और रंगों के सटीक संयोजन से फर्श पर कला के जीवंत नमूने उकेरे। पारंपरिक दीपों, ताजे फूलों की पंखुड़ियों और प्राकृतिक रंगों के प्रयोग से बनाई गई इन कलाकृतियों की भव्यता ने उपस्थित सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रचनात्मकता का कड़ा मुकाबला और सदनों का शानदार प्रदर्शन
इस अंतरसदनीय मुकाबले में सभी प्रतिभागियों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी, लेकिन अपनी उत्कृष्ट फिनिशिंग और मौलिक सोच के बल पर आर्यभट्ट सदन ने बाजी मारते हुए प्रथम स्थान पर कब्जा जमाया। वहीं, कलाम सदन के विद्यार्थियों ने भी अपनी कल्पनाशीलता का बेहतरीन परिचय देते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। विद्यार्थियों ने पारंपरिक थालियों को कुमकुम, चावल, दीयों और फूलों से इस प्रकार सजाया कि भारतीय संस्कारों की सुंदर तस्वीर उभर कर सामने आई। प्रत्येक सदन की टीम ने अपनी प्रस्तुति में अनुशासन, समयबद्धता और कलात्मक उत्कृष्टता का अनूठा समन्वय दिखाया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यालय का पूरा माहौल उत्सवधर्मिता से सराबोर रहा। रंग-बिरंगे रंगों के बीच खड़े मुस्कुराते चेहरों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। निर्णायक मंडल के लिए भी विजेता का चयन करना आसान नहीं था, क्योंकि हर सदन की ओर से प्रस्तुत की गई कलाकृति अपने आप में अनूठी और उच्चकोटि की थी। विद्यार्थियों ने न केवल अपनी छिपी हुई प्रतिभा को मंच पर उतारा, बल्कि टीम वर्क और आपसी सहयोग का भी बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया।
| स्थान / पुरस्कार | सदन का नाम | मुख्य प्रस्तुति / थीम |
|---|---|---|
| प्रथम स्थान | आर्यभट्ट सदन | दीपावली थीम आधारित रंगोली व पारंपरिक थाली सजावट |
| द्वितीय स्थान | कलाम सदन | सांस्कृतिक विरासत और फूलों की कलात्मक डिजाइन |
प्रधानाचार्या सुमिता अरोड़ा ने की सराहना, विद्यार्थियों को दिए प्रेरक संदेश
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्रधानाचार्या सुमिता अरोड़ा ने विजेता विद्यार्थियों के साथ-साथ सभी प्रतिभागियों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की सह-शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद आवश्यक हैं। किताबें ज्ञान देती हैं, लेकिन इस तरह के रचनात्मक मंच विद्यार्थियों के भीतर छिपी हुई असली प्रतिभा को निखारने का काम करते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से मजबूती से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
प्रधानाचार्या ने सभी विजयी सदनों के बच्चों को पीठ थपथपाते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा का उद्देश्य केवल जीतना नहीं होता, बल्कि आपसी सीख और कला के प्रति समर्पण को आगे बढ़ाना होता है। इस अवसर पर विद्यालय के अन्य शिक्षक और शिक्षिकाएं भी मौजूद रहे, जिन्होंने सभी बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
"ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा निखारने के साथ उन्हें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से मजबूती से जोड़ती हैं। बच्चों का ऐसा उत्साह देखकर गर्व महसूस होता है।" - सुमिता अरोड़ा, प्रधानाचार्या, डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल
सांस्कृतिक धरोहर और युवा पीढ़ी का जुड़ाव
इस तरह के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य आधुनिक चकाचौंध से दूर युवा पीढ़ी को अपनी मिट्टी और परंपराओं के करीब लाना है। पानीपत के शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की पहल लगातार यह साबित कर रही हैं कि किताबी शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक और सांस्कृतिक ज्ञान भी बच्चों के मानसिक विकास के लिए कितना जरूरी है। दीपावली जैसे बड़े त्योहारों से पहले स्कूल स्तर पर हुए इन आयोजनों ने बच्चों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है, जो उन्हें अकादमिक मोर्चे पर भी बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा।




