हरियाणा की आम जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। प्रदेश के भरोसेमंद डेयरी ब्रांड 'वीटा' (Vita) ने अपने देसी घी की कीमतों में एक बार फिर इजाफा कर दिया है। हरियाणा डेयरी विकास सहकारी प्रसंघ द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं को अपनी रसोई के लिए घी खरीदने पर पहले से अधिक जेब ढीली करनी होगी। यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम आदमी के मासिक बजट को प्रभावित करने वाली है, क्योंकि वीटा हरियाणा के घर-घर में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख ब्रांड है।
ताजा जानकारी के अनुसार, वीटा ने अपने विभिन्न पैकिंग साइज वाले देसी घी की कीमतों में 10 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि की है। अंबाला सिटी स्थित वीटा प्लांट और प्रदेश के अन्य वितरण केंद्रों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, यह नई दरें 30 अक्टूबर से प्रभावी कर दी गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2026 के शुरुआती महीनों से लेकर अब तक वीटा घी के दामों में कुल मिलाकर 50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जो बाजार की अस्थिरता और बढ़ती लागत की ओर इशारा करती है।
उत्पादन लागत में वृद्धि और दूध के बढ़ते दामों का असर
बाजार विशेषज्ञों और डेयरी फेडरेशन के अधिकारियों का मानना है कि घी की कीमतों में इस उछाल का मुख्य कारण कच्चे माल यानी दूध की कीमतों में आई भारी तेजी है। पिछले कुछ महीनों में खुले बाजार में दूध के दाम लगातार बढ़े हैं, जिसका सीधा असर डेयरी उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर पड़ा है। जब घी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले दूध की इनपुट कॉस्ट बढ़ती है, तो सहकारी संस्थाओं के पास अंतिम उत्पाद की कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
| पैकिंग का प्रकार (Packaging) | नया अनुमानित रेट (₹) |
|---|---|
| 15 लीटर टिन (15L Tin) | ₹10,100 |
| 5 लीटर टिन (5L Tin) | ₹3,450 |
| 2 लीटर टिन (2L Tin) | ₹1,400 |
| 1 लीटर टिन (1L Tin) | ₹710 |
| 1 लीटर सेका पैक (Ceka Pack) | ₹700 |
| 1 लीटर पीपी (PP Pack) | ₹700 |
अधिकारियों का पक्ष और बाजार की मौजूदा स्थिति
इस मूल्य वृद्धि पर स्पष्टीकरण देते हुए वीटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में खुले बाजार में दूध के दाम 85 रुपये प्रति लीटर के स्तर को छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूध की कीमतों में इस निरंतर तेजी के कारण देसी घी तैयार करने की प्रक्रिया काफी महंगी हो गई है। संस्था लंबे समय तक बढ़ी हुई लागत को स्वयं वहन करने का प्रयास करती रही, लेकिन अंततः परिचालन घाटे से बचने के लिए कीमतों में मामूली वृद्धि का निर्णय लेना पड़ा।
"दूध की खरीद कीमतों में निरंतर हो रही वृद्धि के कारण घी की उत्पादन लागत में काफी इजाफा हुआ है। सहकारी हितों और उत्पादन की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए कीमतों में यह आंशिक संशोधन अनिवार्य था। हम उपभोक्ताओं को शुद्धता का भरोसा देते हैं।" - राजेश कुमार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (वीटा)
स्थानीय जनजीवन और उपभोक्ताओं पर आर्थिक प्रभाव
पानीपत समेत हरियाणा के तमाम जिलों में वीटा घी की खपत काफी अधिक है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। स्थानीय किराना व्यापारियों का कहना है कि घी के दाम बढ़ने से मांग में अस्थायी कमी आ सकती है, लेकिन चूंकि वीटा एक विश्वसनीय नाम है, इसलिए लोग इसे प्राथमिकता देते रहेंगे। हालांकि, त्यौहारों और शादी-ब्याह के सीजन में इस प्रकार की मूल्य वृद्धि हलवाइयों और कैटरिंग व्यवसायियों के गणित को भी बिगाड़ देती है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि एक तरफ रसोई गैस, तेल और दालों के दाम पहले से ही ऊंचे हैं, वहीं अब घी जैसी बुनियादी जरूरत की वस्तु का महंगा होना चिंताजनक है। आम नागरिकों की मांग है कि सरकार को चारा (Fodder) और डेयरी फीड की कीमतों पर नियंत्रण करना चाहिए ताकि दूध और उससे जुड़े उत्पादों के दाम स्थिर रह सकें।
आगामी कदम और बाजार का रुझान
आने वाले समय में यदि दूध की कीमतों में स्थिरता नहीं आई, तो अन्य डेयरी उत्पादों जैसे पनीर, मक्खन और क्रीम की कीमतों में भी संशोधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, वीटा के रिटेल काउंटरों और वितरकों को नए रेट कार्ड जारी कर दिए गए हैं। प्रशासन और डेयरी विभाग की ओर से बाजार की निगरानी की जा रही है ताकि कोई भी कालाबाजारी या निर्धारित एमआरपी से अधिक वसूली न कर सके।




