हरियाणा में ठंड की आहट के साथ ही प्रदूषण का स्तर (AQI) चिंताजनक स्थिति में पहुंचने लगा है। पिछले 24 घंटों के भीतर वायु गुणवत्ता सूचकांक में भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप सुबह के समय प्रदेश के कई हिस्सों में स्मॉग की गहरी चादर छाई रही। हालांकि, प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में पिछले साल के मुकाबले उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन बदलते मौसम और हवा की गति धीमी होने के कारण वायुमंडल में प्रदूषकों का जमाव बढ़ता जा रहा है।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को प्रदेश का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 247 दर्ज किया गया, जबकि शनिवार को यह मात्र 69 के स्तर पर था। विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में गिरावट और हवा की रफ्तार कम होने की वजह से धूल और धुएं के कण जमीन के करीब जमा हो रहे हैं, जिससे दृश्यता (Visibility) भी प्रभावित हो रही है। पिछले वर्ष एक नवंबर को यही सूचकांक 326 के स्तर पर था, जो वर्तमान स्थिति से अधिक गंभीर था।
पराली जलाने पर प्रशासनिक कार्रवाई और तुलनात्मक आंकड़े
प्रशासन पराली जलाने की घटनाओं को शून्य पर लाने के लिए उपग्रह निगरानी (Satellite Monitoring) का सहारा ले रहा है। इस सीजन में अब तक लगभग पौने छह एकड़ भूमि पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है, जिसके आधार पर तीन किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके विपरीत, पिछले वर्ष इसी अवधि तक 25 एकड़ में पराली जलाने के मामले सामने आए थे और 12 किसानों पर कानूनी कार्रवाई की गई थी।
| विवरण | वर्ष 2023 (1 नवंबर तक) | वर्ष 2024 (वर्तमान स्थिति) |
|---|---|---|
| औसत AQI स्तर | 326 (बहुत खराब) | 247 (खराब) |
| दर्ज एफआईआर की संख्या | 12 | 03 |
| प्रभावित कृषि क्षेत्र | 25 एकड़ | 5.75 एकड़ |
| मुख्य कारण | फसल अवशेष दहन | धीमी हवा व स्मॉग |
कृषि विभाग की सक्रियता और उपग्रह निगरानी
हरियाणा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (HARSAC) द्वारा लगातार संदिग्ध स्थानों की लोकेशन कृषि विभाग को भेजी जा रही है। रविवार को मालसरी खेड़ा गांव से पराली जलाने की लोकेशन प्राप्त हुई, जिसके बाद विभाग की विशेष टीम को मौके पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के लिए भेजा गया है। यदि वहां पराली जलाने के साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित भू-स्वामी के खिलाफ भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
"हमारा प्राथमिक उद्देश्य किसानों को दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। हमने गांवों में निगरानी टीमें तैनात की हैं और बेलर मशीनों के माध्यम से पराली प्रबंधन की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। जो किसान नियमों का उल्लंघन करेंगे, उन पर नियमानुसार कार्रवाई अनिवार्य है।" - डॉ. सुखदेव कंबोज, जिला कृषि उप निदेशक।
जनजीवन और स्वास्थ्य पर स्मॉग का प्रभाव
बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर आम जनजीवन पर दिखने लगा है। सुबह की सैर पर निकलने वाले बुजुर्गों और सांस के रोगियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक सुबह के समय बाहर निकलने से परहेज करें। स्मॉग के कारण राजमार्गों पर भी वाहन चालकों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि धुंध और धुएं के मिश्रण से विजिबिलिटी कम हो गई है।
प्रशासनिक रणनीति और आगामी कदम
प्रशासन ने प्रत्येक गांव में विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है जो न केवल खेतों की निगरानी कर रहे हैं, बल्कि किसानों को फसल अवशेष जलाने के नुकसान भी समझा रहे हैं। सरकार द्वारा पराली की गांठें बनाने के लिए अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि किसान इन्हें औद्योगिक इकाइयों को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। आने वाले दिनों में यदि हवा की गति में सुधार नहीं होता, तो ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के अगले चरणों को लागू किया जा सकता है।




