दीपावली और आगामी त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में मिलावटखोरों और नकली खाद्य उत्पाद बनाने वालों के खिलाफ राज्य स्तरीय अभियान तेज हो गया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते (CM Flying Squad) और जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने जींद जिले के नरवाना स्थित एचआईडीसी (HIDC) इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित दो बड़े देशी घी निर्माण प्लांटों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस औचक कार्रवाई से इलाके के उद्योगपतियों और व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।
टीम ने औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट नंबर 111 और 177 पर एक साथ दबिश दी, जहाँ विभिन्न प्रसिद्ध और स्थानीय ब्रांडों के नाम पर भारी मात्रा में देशी घी व वनस्पति तैयार किया जा रहा था। मौके पर गुणवत्ता में भारी अनियमितता और संदिग्ध उत्पाद मिलने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लेते हुए 2205 किलोग्राम खाद्य उत्पाद सीज कर दिया। इसके अलावा खाद्य पदार्थों के मानक जांचने के लिए कुल 8 नमूने (सैंपल) एकत्रित कर राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
घटना का सिलसिलेवार विवरण और मौके की स्थिति
सीएम फ्लाइंग को गुप्त सूचना मिली थी कि नरवाना के एचआईडीसी क्षेत्र में त्यौहारी सीजन की मांग को भुनाने के लिए भारी मात्रा में मिलावटी व संदिग्ध देशी घी तैयार कर बाजार में खपाने की तैयारी चल रही है। सूचना के आधार पर सीएम फ्लाइंग के सब इंस्पेक्टर सतपाल के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें सब इंस्पेक्टर चरण सिंह और एएसआई कर्मबीर शामिल रहे। टीम ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. अमन प्रकाश और जीएसटी विभाग के अधिकारियों को साथ लेकर दोनों परिसरों पर छापा मारा।
जांच में सामने आया कि इन दोनों प्लांटों का संचालन कैथल जिले के गांव चौसाला निवासी संजीव द्वारा अपनी पत्नी सीमा के नाम पर किया जा रहा था। हालांकि इकाई का खाद्य संरक्षा लाइसेंस अक्टूबर 2029 तक वैध पाया गया, लेकिन मौके पर मौजूद तैयार माल और जीएसटी दस्तावेजों के स्थान में स्पष्ट भिन्नता देखने को मिली। प्लॉट नंबर 111 से टीम को 250 किलो भावनादीप, 915 किलो एसबी मधु फ्रेश वनस्पति, 694 किलो हरियाणा प्योर और 390 किलो खुला वनस्पति मिला। वहीं दूसरे प्लॉट नंबर 177 से 945 किलो मां अंजनी घी, 345 किलो अरविंद घी, 915 किलो loose घी तथा 200 किलो क्रीम बरामद हुई।
| प्लांट / स्थान | बरामद सामग्री एवं ब्रांड | मात्रा (किलोग्राम) | सैंपल संख्या |
|---|---|---|---|
| प्लांट नंबर 111 (HIDC नरवाना) | भावनादीप, एसबी मधु फ्रेश, हरियाणा प्योर व लूज वनस्पति | 2249 किग्रा (विभिन्न श्रेणियां) | 04 नमूने |
| प्लांट नंबर 177 (HIDC नरवाना) | मां अंजनी घी, अरविंद घी, लूज घी व क्रीम | 2405 किग्रा (उत्पाद व क्रीम) | 04 नमूने |
| कुल सीज सामग्री | सभी ब्रांडों का संदिग्ध देशी घी व खाद्य तेल | 2205 किलोग्राम सीज्ड | कुल 08 सैंपल लैब भेजे |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की भूमिका और बयान
छापेमारी की इस पूरी प्रक्रिया में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग और जीएसटी कराधान विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। अधिकारियों ने बताया कि त्योहारी सीजन में आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। प्लांट परिसर में पाई गई अनिमियताओं और जीएसटी पते में भिन्नता को लेकर आबकारी व कराधान विभाग अलग से कानूनी समीक्षा कर रहा है।
"सीएम फ्लाइंग के साथ नरवाना के दोनों प्लांटों पर संयुक्त कार्रवाई की गई है। मौके पर 2205 लीटर संदिग्ध देशी घी को सीज कर दिया गया है और कुल 8 सैंपल भरकर लैब जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।"
- डॉ. अमनप्रकाश, जिला खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव
दीपावली के दौरान बाजार में देशी घी, मावा, पनीर और मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में मिलावटखोरों द्वारा तैयार घटिया व नकली घी न केवल आम जनता की जेब पर डाका डालता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है। नरवाना में हुई इस बड़ी सीजर कार्रवाई से पूरे हरियाणा के व्यापारियों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को कड़ा संदेश गया है।
स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ता संरक्षण संगठनों ने सीएम फ्लाइंग की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। लोगों का कहना है कि पर्व-त्योहारों के दौरान बाजारों में मिलने वाली खाद्य सामग्रियों की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि कोई भी कारोबारी लोगों की सेहत के साथ समझौता न कर सके।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
सीएम फ्लाइंग की टीम ने छापेमारी से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय पंचकूला भेज दी है। सीज किए गए पूरे माल को विभागीय निगरानी में सुरक्षित रखवा दिया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, यदि प्रयोगशाला से आई लैब रिपोर्ट में सैंपलों के फेल होने या हानिकारक रसायन मिलने की पुष्टि होती है, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI Act) और भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।




