शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
हरियाणापानीपत ब्रेकिंग

हरियाणा में गन्ने के भाव पर बढ़ा किसानों का आक्रोश, 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग को लेकर 5 नवंबर को होगी बड़ी बैठक

हरियाणा सरकार द्वारा गन्ने के रेट में मामूली बढ़ोतरी किए जाने से किसान संगठनों में भारी रोष व्याप्त है, जिसे लेकर 5 नवंबर को रणनीति बनेगी।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
31 अक्टूबर 2026 को 06:01 am बजे2 मिनट पठन2 व्यूज
शेयर करें:
हरियाणा में गन्ने के भाव पर बढ़ा किसानों का आक्रोश, 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग को लेकर 5 नवंबर को होगी बड़ी बैठक
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •हरियाणा सरकार ने अगले दो वर्षों के लिए गन्ने का भाव क्रमशः 430 और 450 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
  • •भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने इस मामूली वृद्धि को नाकाफी बताते हुए इसे किसानों के साथ अन्याय करार दिया है।
  • •किसान संगठन खेती की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने पर अड़े हैं।
  • •इस गंभीर मसले पर आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए 5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में एक अहम पंचायत बुलाई गई है।

हरियाणा के कृषि क्षेत्र में गन्ने के समर्थन मूल्य को लेकर एक बार फिर सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव के बादल मंडराने लगे हैं। प्रदेश सरकार की ओर से अगले दो सत्रों के लिए गन्ने के खरीद मूल्य में की गई घोषणा से अन्नदाता वर्ग में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का भाव 430 रुपये और वर्ष 2027-28 के लिए 450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यानी दो वर्षों के अंतराल में कुल मिलाकर सिर्फ 35 रुपये प्रति क्विंटल की ही बढ़ोतरी की गई है। इस मामूली इजाफे को किसान संगठनों ने पूरी तरह खारिज कर दिया है और इसे किसानों की मेहनत के साथ सीधा खिलवाड़ बताया है।

बढ़ते असंतोष के बीच अब किसान नेताओं ने आर-पार की लड़ाई का मन बनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने आगामी 5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में एक विशेष बैठक बुलाई है, जिसमें सुबह 11 बजे से राज्यभर के प्रतिनिधि जुटेंगे। इस महापंचायत में सरकार के इस निर्णय के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराने और एक प्रभावी आंदोलन की रणनीति का ऐलान किया जाएगा। कृषि जानकारों और किसानों का मानना है कि मौजूदा महंगाई के दौर में यह मूल्य वृद्धि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है, जिससे खेती बचाए रखना बेहद कठिन होता जा रहा है।

खेती की बढ़ती लागत और किसानों का बढ़ता आर्थिक संकट

अन्नदाताओं का साफ तौर पर कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में खेती-किसानी से जुड़े हर एक संसाधन की कीमतों में बेतहाशा उछाल आया है। बुवाई से लेकर कटाई तक इस्तेमाल होने वाले डीजल, कीटनाशक दवाइयों, महंगे उर्वरकों, सिंचाई के साधनों और कृषि मजदूरी के दाम आसमान छू रहे हैं। इसके विपरीत फसल का जो मूल्य सरकार द्वारा तय किया जा रहा है, वह उत्पादन लागत का आधा हिस्सा भी बमुश्किल पूरा कर पाता है। कृषि क्षेत्र के जानकारों का भी यही मानना है कि यदि लागत मूल्य और बाजार भाव में इस तरह का भारी अंतर बना रहा, तो आने वाले समय में किसान गन्ने की खेती से पूरी तरह मुंह मोड़ सकते हैं, जिससे चीनी मिलों के सामने भी कच्चे माल का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि 600 रुपये प्रति क्विंटल से कम का कोई भी भाव किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा। नेताओं का तर्क है कि सरकार एक तरफ तो किसानों को नकदी फसल के रूप में गन्ने का रकबा बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है, लेकिन जब उचित मेहनताना देने की बारी आती है तो वह अपने कदम पीछे खींच लेती है। इस दोहरी नीति के कारण ग्रामीण इलाकों की आर्थिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और कर्ज के बोझ तले दबे किसानों का जीवन स्तर लगातार गिरता जा रहा है।

निर्धारित वर्षसरकार द्वारा घोषित भाव (प्रति क्विंटल)किसान संगठनों की मांगस्थिति व प्रतिक्रिया
वर्ष 2026-27₹430₹600किसानों द्वारा अस्वीकार, नाकाफी घोषित
वर्ष 2027-28₹450₹600आंदोलन की चेतावनी के साथ विरोध जारी

कृषि विशेषज्ञों और किसान नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं

विभिन्न कृषि संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों का भी कहना है कि किसानों की आय दोगुनी करने के दावों के उलट धरातल पर केवल खेती की लागत ही दोगुनी हुई है। उर्वरक कंपनियों से लेकर ईंधन सेक्टर तक हर तरफ से मुनाफा कमाया जा रहा है, परंतु पसीना बहाने वाला किसान अपने ही हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर है। यदि समय रहते इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश में गन्ने का कुल रकबा और उत्पादन दोनों में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिसका सीधा असर राज्य के चीनी उद्योगों की कार्यप्रणाली पर भी पड़ेगा।

5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक पर न केवल किसानों की बल्कि प्रशासनिक हलकों की भी पैनी नजरें टिकी हुई हैं। इस मंथन में यह तय होगा कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए किस प्रकार के विरोध प्रदर्शन या ज्ञापन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

"गन्ने के भाव में मात्र 15 से 20 रुपये की सालाना बढ़ोतरी करना अन्नदाताओं के साथ क्रूर मजाक है। खेती के तमाम उपकरणों, डीजल और मजदूरी के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं, ऐसे में 600 रुपये प्रति क्विंटल से कम का कोई भी समझौता किसानों को मंजूर नहीं होगा। आगामी 5 नवंबर को कुरुक्षेत्र की बैठक में सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा।" - भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी)

आगामी रणनीति और प्रशासनिक हलकों में सुगबुगाहट

जैसे-जैसे 5 नवंबर की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राज्य के विभिन्न जिलों में किसान संगठनों की गुप्त व खुली बैठकें तेज हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार मिल रहे समर्थन को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है। देखना यह होगा कि क्या किसान नेताओं के दबाव के आगे झुकते हुए शासन स्तर पर गन्ने के दामों में कोई पुनर्विचार किया जाता है या फिर अन्नदाताओं को अपनी मांगों के समर्थन में एक लंबे संघर्ष की राह चुननी पड़ती है।

इस खबर को अपने दोस्तों व ग्रुप्स में शेयर करें:
व्हाट्सएप

पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

पानीपत शहर, समालखा, मतलौडा, इसराना, सनौली व टेक्सटाइल हब की 24x7 ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम

पानीपत लाइव (panipatlive.com) पानीपत जिले का प्रमुख और स्वतंत्र हिंदी डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क है। हमारी संपादकीय टीम का मुख्य उद्देश्य पानीपत के नागरिकों, व्यापारियों, किसानों और युवाओं तक धरातल की हर प्रमाणित और निष्पक्ष खबर सबसे पहले पहुंचाना है।

हरियाणा में गन्ने के भाव पर बढ़ा किसानों का आक्रोश, 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग को लेकर 5 नवंबर को होगी बड़ी बैठक | पानीपत लाइव - Panipat Live