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हरियाणा में प्रदूषण पर प्रशासन की सख्ती: तय समय पर ही चलेंगे ग्रीन पटाखे, ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक

हरियाणा के जींद जिला प्रशासन ने सर्दियों के बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पटाखों की बिक्री और उनके चलाने पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
6 नवंबर 2026 को 01:10 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा में प्रदूषण पर प्रशासन की सख्ती: तय समय पर ही चलेंगे ग्रीन पटाखे, ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •दिवाली के अवसर पर 7 और 8 नवंबर को केवल दो घंटे (रात 8 से 10 बजे) ही ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी गई है।
  • •ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए गैर-अनुमोदित और ऑनलाइन पटाखों की खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
  • •अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और वृद्धाश्रमों के 300 मीटर के दायरे को 'नो-क्रैकर जोन' घोषित किया गया है।
  • •नियमों के पालन के लिए एसडीएम और डीएसपी के नेतृत्व में संयुक्त निरीक्षण व गश्त टीमों का गठन किया गया है।

सर्दियों के आगमन के साथ ही उत्तर भारत में वायु प्रदूषण का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ने लगा है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की चिंताएं भी गहरी होने लगी हैं। इसी बीच, त्योहारी सीजन के दौरान आतिशबाजी से हवा की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा के जींद जिला प्रशासन ने अत्यंत सख्त कदम उठाए हैं। प्रशासन की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत अब पटाखों के भंडारण, ऑनलाइन बिक्री और उनके उपयोग पर कड़ा पहरा बिठा दिया गया है, ताकि बढ़ते वायु प्रदूषण और जहरीली हवा के संकट से शहरवासियों को बचाया जा सके।

जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है। सर्दियों के इस दौर में (विशेषकर अक्टूबर से जनवरी तक) पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे अति सूक्ष्म कणों का स्तर खतरनाक सीमा तक बढ़ जाता है। इन हानिकारक तत्वों के कारण छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 और विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों को कड़ाई से लागू किया गया है।

केवल सीएसआईआर-नीरी प्रमाणित ग्रीन क्रैकर्स की होगी अनुमति

प्रशासनिक आदेशों के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जिले की सीमाओं के भीतर केवल उन्हीं पटाखों की बिक्री और उपयोग की छूट होगी, जिन्हें सीएसआईआर-नीरी (CSIR-NEERI) द्वारा प्रमाणित किया गया हो और जो पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से लाइसेंस प्राप्त हों। बाजार में बिकने वाले प्रत्येक आतिशबाजी बॉक्स पर सील बंद होना और एक विशिष्ट नॉन-ट्रान्सफरबल क्यूआर कोड का होना अनिवार्य किया गया है। खरीदार इस क्यूआर कोड को स्कैन करके निर्माता कंपनी, नीरी पंजीकरण और संबंधित लाइसेंस की प्रामाणिकता की पूरी जानकारी स्वयं जांच सकते हैं।

त्योहारों के विशेष संदर्भ में ग्रीन क्रैकर्स का उपयोग करने के लिए 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद यानी 9 नवंबर से जिले में किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री और उन्हें फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी हो जाएगा। बेरियम लवण युक्त आतिशबाजी, नीरी द्वारा गैर-अनुमोदित सामग्री और एक साथ जुड़ी लड़ियों वाले पटाखों के निर्माण, परिवहन और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

दिशा-निर्देश श्रेणीप्रशासनिक नियम एवं समय-सारणी
अनुमत अवधि (7-8 नवंबर)सुबह 6:00 से 7:00 बजे और रात्रि 8:00 से 10:00 बजे तक
पूर्ण प्रतिबंध की तिथि9 नवंबर से पटाखों की खरीद-फरोख्त और चलाने पर पूर्ण रोक
मान्य पटाखेकेवल सीएसआईआर-नीरी प्रमाणित और क्यूआर कोड वाले ग्रीन क्रैकर्स
निषिद्ध क्षेत्र (No-Cracker Zone)अस्पताल, नर्सिंग होम, शिक्षण संस्थान व वृद्धाश्रम के 300 मीटर दायरे में

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर पैनी नजर और 'नो-क्रैकर जोन' की घोषणा

बदलते दौर में ई-कॉमर्स वेबसाइट्स के जरिए घरों तक आसानी से पहुंचने वाले पटाखों के अवैध व्यापार पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की गतिविधियों पर भी शिकंजा कस दिया है। इंटरनेट के माध्यम से किसी भी गैर-अनुमोदित या प्रतिबंधित आतिशबाजी की आपूर्ति को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए अस्पतालों, नर्सिंग होम, शैक्षणिक संस्थानों, वृद्धाश्रमों और अन्य संवेदनशील शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे को आधिकारिक तौर पर 'नो-क्रैकर जोन' घोषित किया गया है, जहां किसी भी परिस्थिति में आतिशबाजी की अनुमति नहीं होगी।

इन कड़े नियमों के धरातल पर क्रियान्वयन और अनुपालन की निगरानी के लिए उपमंडल स्तर पर विशेष प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है। संबंधित उपमंडलों के एसडीएम और डीएसपी के नेतृत्व में संयुक्त निरीक्षण एवं गश्त टीमों का गठन किया गया है, जो बाजारों और दुकानों का औचक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि केवल क्यूआर कोड वाले प्रमाणित उत्पाद ही बिकें। इसके अतिरिक्त, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी दीवाली से पहले, दीवाली के दिन और उसके बाद की वायु गुणवत्ता (AQI) के आंकड़ों की नियमित वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, ताकि पर्यावरण की स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा सके।

"बढ़ता वायु प्रदूषण हमारे बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए प्रशासन ने केवल प्रमाणित ग्रीन क्रैकर्स के सीमित उपयोग की अनुमति दी है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" - जिला प्रशासन, हरियाणा

प्रशासनिक टीमों का कड़ा पहरा और भविष्य की कार्ययोजना

मैदानी स्तर पर नियमों की पालना सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है। संयुक्त गश्त टीमें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन न हो और प्रतिबंधित श्रेणी के उत्पाद बाजार में अपनी पैठ न बना सकें। प्रशासन ने शहरवासियों से भी अपील की है कि वे इस त्योहारी सीजन में पर्यावरण के प्रति अपनी नागरिक जिम्मेदारी निभाएं, प्रशासनिक गाइडलाइंस का पालन करें और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से परहेज कर स्वस्थ समाज के निर्माण में अपना सकारात्मक योगदान दें।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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