आगामी दीवाली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने राज्य के चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप डी) कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी घोषणा की है। प्रदेश भर के सरकारी महकमों, स्वायत्त संस्थानों और विभिन्न बोर्ड-निगमों में अपनी सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों को अब त्योहारी खर्चों से निपटने के वास्ते आर्थिक संबल मिलने जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर लिए गए इस निर्णय के तहत पात्र कर्मचारियों को पंद्रह हजार रुपये तक की राशि अग्रिम वेतन के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपने परिवार के साथ हर्षोल्लास के साथ पर्व मना सकें।
राज्य सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि इस विशेष योजना का लाभ उठाने के इच्छुक कर्मचारियों को तय समयसीमा के भीतर अपने संबंधित कार्यालयों में औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसके लिए आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि चौबीस अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। निर्धारित तिथि तक प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों की संबंधित अधिकारियों द्वारा सूक्ष्मता से जांच की जाएगी और मंजूरी मिलने के बाद यह सहायता राशि सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी, जिससे समय पर उन्हें फेस्टिव सीजन का लाभ मिल सके।
ब्याजमुक्त ऋण और दस मासिक किस्तों में भुगतान की शर्त
इस पूरी योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली पंद्रह हजार रुपये की इस अग्रिम राशि पर किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं वसूला जाएगा। हालांकि, इस वित्तीय लाभ के दायरे में वही कर्मचारी आएंगे जिनकी सेवाएं अगले दस महीनों तक अनवरत रूप से जारी रहने की पूरी संभावना है। संवितरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों को यह पूरी राशि आगामी दस समान मासिक किस्तों के रूप में धीरे-धीरे वापस चुकानी होगी, जिससे उनके मासिक बजट पर किसी प्रकार का अत्यधिक वित्तीय दबाव न पड़े।
योजना के सुचारू संचालन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों के आहरण एवं वितरण अधिकारियों (डीडीओ) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। यदि कोई अस्थायी कर्मचारी इस योजना का लाभ लेना चाहता है, तो उसे विभाग के किसी स्थायी राज्य सरकारी कर्मचारी की जमानत प्रस्तुत करनी होगी। इसके अलावा, पति-पत्नी दोनों के ग्रुप डी सेवा में होने की स्थिति में परिवार में केवल एक ही सदस्य इस अग्रिम राशि का हकदार होगा, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक इसका दायरा पहुंच सके।
| योजना की मुख्य विशेषता | विवरण एवं नियम |
|---|---|
| पात्रता | सभी नियमित व अस्थायी ग्रुप डी कर्मचारी |
| अग्रिम राशि | ₹15,000 (ब्याजमुक्त) |
| अंतिम तिथि | 24 अक्टूबर 2026 |
| पुनर्भुगतान अवधि | 10 आसान मासिक किस्तें |
अपात्रता के नियम और गलत इस्तेमाल पर दंडात्मक कार्रवाई
प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट प्रतिबंध भी तय किए हैं। कार्यभारित, आकस्मिक वेतनभोगी, दैनिक वेतनभोगी और संविदा (कच्चे) कर्मचारियों को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। साथ ही, प्रतिनियुक्ति पर अन्य विभागों या स्थानीय निकायों में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मी भी इसका लाभ नहीं उठा सकेंगे। जिन कर्मचारियों पर हरियाणा सिविल सेवा नियम-2016 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, उनके आवेदन स्वतः खारिज कर दिए जाएंगे।
वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के कड़े निर्देश देते हुए सरकार ने चेताया है कि यदि कोई कर्मी इस अग्रिम राशि का दुरुपयोग करता पाया गया, तो उससे मूल राशि के साथ-साथ दस प्रतिशत की दर से दंडात्मक ब्याज वसूला जाएगा। सभी विभागों को नवंबर माह के अंत तक इस पूरी प्रक्रिया का विस्तृत लेखा-जोखा और उपयोगिता प्रमाण पत्र वित्त विभाग को अनिवार्य रूप से सौंपना होगा ताकि सरकारी धन के सदुपयोग की निगरानी की जा सके।
"त्योहारी सीजन के मद्देनजर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वित्तीय हितों को सुरक्षित रखते हुए सरकार ने बिना ब्याज के अग्रिम वेतन देने का यह जनहितैषी कदम उठाया है, जिससे हर घर में दीवाली की खुशियां और अधिक बढ़ सकें।" - प्रशासनिक प्रवक्ता
प्रशासनिक रिकॉर्ड और आगामी लेखा-जोखा प्रक्रिया
विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे वितरित की गई राशि और उसकी वसूली से जुड़ा पूरा डेटाबेस मेंटेन रखें। हर महीने प्रधान महालेखाकार कार्यालय के साथ खातों का मिलान करना अनिवार्य किया गया है ताकि किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता से बचा जा सके। वित्त विभाग इस पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग सीधे तौर पर करेगा।




