हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। प्रदेश के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की विदेश यात्राओं पर अब राज्य सरकार कड़ी निगरानी रखेगी। नई व्यवस्था के तहत आईएएस अधिकारियों से लेकर चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-डी) तक के कर्मचारियों की विदेश यात्रा से जुड़े सभी प्रस्तावों की समीक्षा के लिए एक बहुस्तरीय और जांच-परख वाली प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
इस नए नियम के अमल में आने के बाद अब कोई भी अधिकारी या विभाग विदेश यात्रा से संबंधित फाइल सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रेषित नहीं कर सकेगा। प्रशासनिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करते हुए सरकार ने अनिवार्य किया है कि प्रत्येक विदेशी दौरे का प्रस्ताव सबसे पहले मुख्य सचिव कार्यालय भेजा जाएगा। मुख्य सचिव कार्यालय में जांच के सभी मापदंडों पर खरा उतरने और आधिकारिक संस्तुति मिलने के बाद ही फाइल को अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
विदेश दौरे की फाइलों के लिए बनाई गई नई समीक्षा प्रक्रिया
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पूर्व में यह प्रवृत्ति देखने में आ रही थी कि विभिन्न विभागों के अधिकारी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों, अध्ययन दौरों (स्टडी टूर) अथवा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेने के नाम पर तैयार किए गए प्रस्तावों की फाइलें सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में भेज देते थे। इससे न केवल प्रशासनिक शृंखला का उल्लंघन हो रहा था, बल्कि यात्राओं की वास्तविक उपयोगिता और बजटीय व्यवस्था का पारदर्शी मूल्यांकन भी प्रभावित हो रहा था। इसी परिपाटी पर विराम लगाने के लिए वर्तमान सरकार ने प्रशासनिक नियमावली में यह महत्वपूर्ण सुधार किया है।
नई व्यवस्था के तहत मुख्य सचिव कार्यालय को प्राथमिक जांच एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है। यहाँ संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के सेवा अभिलेखों, यात्रा के वास्तविक उद्देश्य तथा विभाग के पास उपलब्ध वित्तीय संसाधनों की गहराई से समीक्षा की जाएगी। यदि मुख्य सचिव कार्यालय प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट होता है, तभी उस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की अंतिम स्वीकृति के लिए अग्रसारित किया जाएगा।
| जांच का मुख्य बिंदु | मूल्यांकन का दायरा व मापदंड | प्रशासनिक उद्देश्य |
|---|---|---|
| خدمत नियम व पात्रता | संबंधित कर्मचारी सेवा शर्तों व विदेश नीति के नियमों को पूरा करता है या नहीं। | कानूनी एवं प्रशासनिक पात्रता सुनिश्चित करना। |
| पूर्व यात्राओं का रिकॉर्ड | अधिकारी ने पूर्व में कितनी बार और किन कारणों से विदेशी दौरे किए हैं। | बार-बार अनावश्यक विदेश यात्राओं पर अंकुश लगाना। |
| प्रशासनिक आवश्यकता | अध्ययन दौरे या सम्मेलन का राज्य हित में कितना प्रत्यक्ष लाभ है। | सरकारी खर्च की सार्थकता का आकलन। |
| वित्तीय प्रावधान व बजट | संबंधित विभाग के स्वीकृत बजट में यात्रा खर्च हेतु उचित प्रावधान है या नहीं। | राजकोषीय अनुशासन व पारदर्शिता बनाए रखना। |
मुख्य सचिव कार्यालय की भूमिका और चार स्तरीय जांच व्यवस्था
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के विदेश गमन के प्रस्तावों का परीक्षण मुख्य रूप से चार निर्धारित मापदंडों पर किया जाएगा। सर्वप्रथम यह देखा जाएगा कि आवेदक अधिकारी या कर्मचारी विदेश यात्रा से संबंधित तय नियमों एवं सेवा शर्तों की पूर्ति कर रहा है अथवा नहीं। इसके पश्चात कर्मचारी के पिछले यात्रा इतिहास को खंगाला जाएगा कि उसने पहले कब-कब और किस उद्देश्य से विदेश यात्राएं की थीं तथा उन यात्राओं का रिकॉर्ड कैसा रहा है।
तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में प्रस्तावित विदेश यात्रा की प्रशासनिक अनिवार्यता का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इसमें यह परखा जाएगा कि स्टडी टूर या अंतरराष्ट्रीय सेमिनार से राज्य के प्रशासनिक सुधार में क्या ठोस लाभ मिलेगा। चौथे बिंदु के रूप में वित्तीय स्वीकृति का आकलन होगा, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित विभाग के वार्षिक बजट में इस यात्रा हेतु विधिवत वित्तीय आवंटन मौजूद है या नहीं।
"सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों की विदेश यात्राओं के प्रस्तावों को पारदर्शी और उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए मुख्य सचिव कार्यालय की भूमिका को केंद्रित किया गया है। सभी प्रशासनिक व वित्तीय पहलुओं की जांच के उपरांत ही मुख्यमंत्री स्तर से अंतिम मंजूरी दी जाएगी।" - प्रशासनिक सूत्र, हरियाणा सरकार
प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी खजाने पर इसका प्रभाव
हरियाणा सरकार के इस कड़े रुख का सीधा प्रभाव राज्य की प्रशासनिक कार्यशैली और वित्तीय प्रबंधन पर देखने को मिलेगा। अक्सर यह देखा जाता था कि विभिन्न विभागों में स्टडी टूर और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के नाम पर आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल गठित कर विदेश दौरे स्वीकृत करा लिए जाते थे। कई बार इन दौरों का कोई ठोस परिणाम या प्रशासनिक रिपोर्ट शासन को हासिल नहीं होती थी।
नई समीक्षा व्यवस्था लागू होने से वित्तीय संसाधनों का अपव्यय रुकेगा और केवल वही विदेश दौरे स्वीकृत हो सकेंगे जो जनहित व राज्य के विकास के दृष्टिकोण से अति आवश्यक होंगे। इससे विभागों में अनावश्यक यात्रा प्रस्ताव तैयार करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
प्रशासनिक कदम व भावी क्रियान्वयन की रूपरेखा
राज्य शासन द्वारा सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिला उपायुक्तों को नए निर्देशों का सख्ती से पालन करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। भविष्य में यदि कोई विभाग निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन कर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को फाइल भेजने का प्रयास करेगा, तो उस प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा और उसे वापस मूल विभाग को लौटा दिया जाएगा।
इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से हरियाणा में प्रशासनिक पारदर्शिता को बल मिलेगा। राज्य सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जनहित और प्रशासनिक दक्षता से जुड़े मामलों में वित्तीय अनुशासन सर्वोपरि रहेगा, और सरकारी व्यय पर होने वाली प्रत्येक विदेश यात्रा का ठोस औचित्य साबित करना अनिवार्य होगा।




