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हरियाणा रोडवेज का हिसार डिपो ठप: मांगों पर वार्ता विफल होने के बाद बसों का चक्का जाम

हिसार में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते आज बसों के पहिए थम गए हैं और सौ से अधिक बसें बंद रहने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
31 अक्टूबर 2026 को 02:29 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा रोडवेज का हिसार डिपो ठप: मांगों पर वार्ता विफल होने के बाद बसों का चक्का जाम
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •हिसार रोडवेज डिपो में अनिश्चितकालीन चक्का जाम और धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है।
  • •लंबे और लोकल रूटों की 100 से ज्यादा बसों का रात्रि ठहराव और संचालन बंद किया गया है।
  • •एसडीएम ज्योति मित्तल के साथ हुई प्रशासनिक वार्ता विफल रहने से गतिरोध बना हुआ है।
  • •रात्रि भत्ता, टीए और समय पर ओवरटाइम भुगतान न मिलने से कर्मचारियों में गहरा रोष है।

सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक जरूरी अपडेट सामने आया है। राज्य के प्रमुख परिवहन केंद्रों में शुमार हिसार रोडवेज डिपो में आज कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। बीते कुछ दिनों से लगातार जारी विरोध प्रदर्शन के बाद अब स्थिति पूरी तरह से चक्का जाम में बदल चुकी है, जिससे आम जनता को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परिवहन निगम के कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही वित्तीय और प्रशासनिक मांगों को लेकर प्रशासन और यूनિયनों के बीच चल रहा गतिरोध अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है।

प्रदेशभर में पांच और छह नवंबर को सभी डिपो पर प्रस्तावित पूर्ण चक्का जाम के ऐलान से पहले ही हिसार डिपो के कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए अपने वाहनों के पहिए थाम दिए हैं। पिछले दो दिनों से डिपो परिसर में लगातार धरने पर बैठे कर्मचारी अब अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन की ओर से भी लगातार सुलह के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी भी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन पाई है। इस अप्रत्याशित हड़ताल के कारण डिपो से जुड़े विभिन्न रूटों पर यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासनिक वार्ताओं के विफल होने के बाद बिगड़े हालात

हिसार डिपो के अंतर्गत आने वाले विभिन्न लंबे और स्थानीय मार्गों पर असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। रोडवेज यूनियन के पदाधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के बीच चले बैठकों के दौर का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है। हालात को संभालने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों से बातचीत की पहल की थी, ताकि यात्रियों की परेशानियों को कम किया जा सके। हालांकि, कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों पर ठोस आश्वासन और तत्काल समाधान की जिद के चलते बातचीत किसी मुकाम तक नहीं पहुंच सकी।

डिपो की कार्यप्रणाली पर नजर डालें तो रोजाना करीब 83 बसें विभिन्न लंबी दूरियों के साथ-साथ लोकल रूटों पर रात्रि ठहराव के लिए रवाना होती हैं। शुक्रवार को इन सभी निर्धारित बसों को नाइट स्टे के लिए उनके गंतव्य स्थलों की ओर नहीं भेजा गया। इनमें राजधानी दिल्ली, चंडीगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शहर आगरा, राजस्थान के खाटूश्याम, जोधपुर, बीकानेर, अजमेर और जयपुर जैसे बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण लंबे रूट पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही लोकल स्तर पर आदमपुर, किरमारा, उकलाना, चौधरीवास, बालसमंद और भादरा जाने वाली बसों का संचालन भी रोक दिया गया है।

विवरणस्थिति / आंकड़े
प्रभावित डिपोहिसार रोडवेज डिपो
बंद बसों की कुल संख्या100 से अधिक
प्रभावित लंबे रूटदिल्ली, चंडीगढ़, आगरा, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर आदि
प्रभावित लोकल रूटआदमपुर, उकलाना, भादरा, बालसमंद आदि
प्रमुख मांगेंरात्रि भत्ता, टीए और ओवरटाइम का समय पर भुगतान

कर्मचारियों का वित्तीय असंतोष और तीखे तेवर

परिवहन कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि वे लंबे अर्से से अपनी वैध मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा केवल मौखिक आश्वासन ही दिए जाते हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उनका रात्रि भत्ता (Night Allowance), यात्रा भत्ता (TA) और ओवरटाइम का बकाया भुगतान समयबद्ध तरीके से नहीं किया जा रहा है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। महंगाई के इस दौर में लगातार वित्तीय लाभों के रुकने से जमीनी स्तर के कर्मचारियों का धैर्य अब पूरी तरह से जवाब दे चुका है।

यूनियन के प्रमुख नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी लंबित मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, हिसार डिपो के साथ-साथ हांसी डिपो की भी करीब 15 ऐसी बसें जो अन्य स्थानों पर रात्रि ठहराव करती हैं, वे भी शुक्रवार को अपने गंतव्य के लिए रवाना नहीं हो पाईं। इससे न केवल रोडवेज विभाग को बड़े पैमाने पर प्रतिदिन के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि आम नागरिकों का जनजीवन भी बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

"कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित रात्रि भत्ते, टीए और ओवरटाइम के भुगतान को लेकर विभाग उदासीन बना हुआ है। बार-बार के आश्वासनों के बावजूद जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब हमें यह कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, संघर्ष जारी रहेगा।" - स्थानीय रोडवेज यूनियन नेतृत्व

आगे की प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियां

इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासन की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। एसडीएम ज्योति मित्तल के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने देर शाम तक रोडवेज यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ मैराथन बैठकें कीं, ताकि जनता को हो रही भारी परेशानियों का कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। हालांकि, यूनियन अपनी मांगों पर पूरी तरह अड़ी हुई है, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर अब वैकल्पिक परिवहन व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है ताकि आम यात्रियों को कुछ राहत दी जा सके।

आगामी दिनों में यदि पूरे हरियाणा स्तर पर होने वाले चक्का जाम का यह सिलसिला अन्य डिपो में भी इसी तरह फैल गया, तो राज्यभर में परिवहन व्यवस्था चरमरा सकती है। पानीपत लाइव की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, हिसार डिपो में पैदा हुआ यह गतिरोध आने वाले समय में एक बड़े राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है, जिस पर सरकार और परिवहन विभाग की उच्चस्तरीय बैठकों में लगातार पैनी नजर रखी जा रही है।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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