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पानीपत समेत हरियाणा के चार शहरों में कचरे से बनेगी बिजली, ऑयल इंडिया संग करार

हरियाणा के चार प्रमुख शहरों में ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और बिजली उत्पादन को लेकर सरकार ने ऑयल इंडिया लिमिटेड के साथ अहम करार किया है।

पानीपत लाइव ब्यूरो✓ वेरिफाइड ग्राउंड रिपोर्टर
पानीपत लाइव डिजिटल नेटवर्क
22 अक्टूबर 2026 को 08:52 am बजे2 मिनट पठन1 व्यूज
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पानीपत समेत हरियाणा के चार शहरों में कचरे से बनेगी बिजली, ऑयल इंडिया संग करार
फोटो: पानीपत लाइव ग्राउंड रिपोर्टिंग ब्यूरोpanipatlive.com

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •हरियाणा सरकार ने कचरे से बिजली बनाने के लिए ऑयल इंडिया के साथ किया आधिकारिक करार
  • •शुरुआती चरण में गुरुग्राम, हिसार, फरीदाबाद और अंबाला में लागू होगी यह अभिनव परियोजना
  • •स्वीडन के सफल अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल का किया जाएगा अध्ययन और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन
  • •प्रदेश के 84 शहरी निकायों में शत-प्रतिशत घरों से कचरा उठाने का कार्य हुआ सुनिश्चित

पानीपत लाइव ब्यूरो की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में कचरे के अंबार से मुक्ति पाने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब शहरों से निकलने वाले व्यर्थ कचरे को केवल डंप करने के बजाय उससे बिजली का उत्पादन किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम 'ऑयल इंडिया लिमिटेड' के साथ एक बड़ा करार किया है। इस पहल से न केवल शहरी इलाकों में सफाई व्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी, बल्कि ऊर्जा संकट से निपटने में भी मदद मिलेगी। पानीपत और आसपास के अन्य शहरी क्षेत्रों में भी इस तरह की तकनीकों की सफलता को लेकर नागरिकों और स्थानीय प्रशासन में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

प्रारंभिक चरण के तहत इस आधुनिक बिजली उत्पादन परियोजना को हरियाणा के चार बड़े शहरों—गुरुग्राम, हिसार, फरीदाबाद और अंबाला में शुरू करने का ब्लूचप्रिंट तैयार किया गया है। इन जिलों में योजना के क्रियान्वयन से संबंधित सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार कर ली है ताकि समयबद्ध तरीके से कचरे से ऊर्जा बनाने वाले संयंत्रों की स्थापना की जा सके। जानकारों का मानना है कि यदि यह मॉडल इन चार शहरों में सफल रहता है, तो आने वाले समय में पानीपत और अन्य औद्योगिक महानगरों में भी इसी तर्ज पर बड़े पैमाने पर अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र लगाए जा सकते हैं, जिससे स्थानीय रिहायशी और औद्योगिक कचरे का स्थायी समाधान हो सकेगा।

स्वीडन मॉडल की तर्ज पर होगा कचरे का आधुनिकीकृत निस्तारण

शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने इस परियोजना के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरकार कचरा प्रबंधन को लेकर किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। इस पूरी व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए यूरोपीय देश स्वीडन के उन्नत कचरा प्रबंधन तंत्र का बारीकी से अध्ययन किया गया है। स्वीडन में जिस प्रकार कचरे को रिसाइकिल करके उससे ऊर्जा और अन्य उपयोगी संसाधन बनाए जाते हैं, हूबहू उसी तर्ज पर हरियाणा के शहरी निकायों में भी कार्ययोजना को लागू किया जाएगा। इसके लिए अत्याधुनिक मशीनों और स्कैनिंग तकनीकों का सहारा लिया जाएगा, जिससे कचरे के वर्गीकरण से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रदेश के कुल 87 शहरी निकायों में से 84 ऐसे निकाय हैं जहां शत-प्रतिशत घरों से कचरा उठाने का टेंडर सफलतापूर्वक आवंटित किया जा चुका है। घर-घर कचरा संग्रहण प्रणाली में किसी भी तरह की लापरवाही को रोकने के लिए डिजिटल स्कैनर तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सफाई कर्मचारी हर घर तक पहुंचे हैं या नहीं और किस वार्ड से कितना कचरा एकत्रित हुआ है। इस डिजिटल निगरानी प्रणाली ने स्थानीय स्तर पर स्वच्छता व्यवस्था की जवाबदेही को काफी हद तक बढ़ा दिया है, जिसका सीधा फायदा शहरी निवासियों को मिल रहा है।

परियोजना के प्रमुख बिंदुविवरण एवं तथ्य
साझेदार उपक्रमऑयल इंडिया लिमिटेड
लक्ष्यित शहरगुरुग्राम, हिसार, फरीदाबाद और अंबाला
प्रेरणा स्रोतस्वीडन का उन्नत अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल
कवर किए गए निकाय87 में से 84 शहरी निकायों में डोर-टू-डोर कलेक्शन
निगरानी तकनीकडिजिटल स्कैनर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम

प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय निकायों की बढ़ी जिम्मेदारी

इस वृहद स्वच्छता और ऊर्जा परियोजना के आने के बाद स्थानीय नगर निगमों और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कचरा संग्रहण केंद्रों की क्षमता का आकलन करें और ऑयल इंडिया के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित करें। कचरा पृथक्करण (Segregation at source) यानी गीले और सूखे कचरे को घरों से ही अलग-अलग कर के संयंत्र तक पहुंचाने के लिए नागरिकों को भी जागरूक किया जा रहा है। स्थानीय आरडब्ल्यूए (Resident Welfare Associations) और सामाजिक संगठनों की मदद से पानीपत समेत पूरे प्रदेश में लोगों को यह समझाया जा रहा है कि कचरे का सही प्रबंधन शहर के पर्यावरण और भविष्य के लिए कितना अनिवार्य है।

नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस परियोजना के दायरे को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। कचरे से बिजली बनाने के इस संयंत्र के स्थापित हो जाने से लैंडफिल साइट्स (कूड़े के बड़े पहाड़ों) पर लगने वाली आग की घटनाओं और जहरीले धुएं से भी शहरवासियों को निजात मिलेगी। पानीपत जैसे घनी आबादी वाले और टेक्सटाइल हब वाले शहर में जहां औद्योगिक और घरेलू कचरा दोनों की बड़ी मात्रा निकलती है, वहां इस तरह के प्रोजेक्ट्स के आने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। प्रशासन अब इस बात पर भी मंथन कर रहा है कि स्थानीय स्तर पर निकलने वाले बायो-वेस्ट और सॉलिड वेस्ट को किस प्रकार इन बड़ी परियोजनाओं के साथ जोड़ा जाए।

"कचरा प्रबंधन अब हमारे शहरों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका था, जिसका स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। ऑयल इंडिया के साथ हुआ यह करार न केवल शहरों को साफ-सुथरा रखेगा, बल्कि पर्यावरण अनुकूल बिजली उत्पादन में मील का पत्थर साबित होगा। स्वीडन मॉडल को अपनाकर हम प्रदेश को स्वच्छता के मामले में देश में अग्रणी बनाएंगे।" — विपुल गोयल, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री, हरियाणा सरकार

नागरिकों की सहभागिता और भविष्य की कार्ययोजना

इस पूरी परियोजना की सफलता अंततः आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। प्रशासन का मुख्य जोर इस बात पर है कि लोग अपने घरों में ही कचरे को अलग करना शुरू करें ताकि रीसाइक्लिंग यूनिट्स और बिजली संयंत्रों तक कचरा अपनी मूल अवस्था में पहुंचे। पानीपत लाइव की ग्राउंड पड़ताल के अनुसार, स्थानीय लोग सरकार की इस पहल का स्वागत कर रहे हैं, बशर्ते जमीनी स्तर पर घर-घर से कचरा उठाने वाली गाड़ियां नियमित रूप से आएं और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक ढिलाई न बरती जाए।

आगामी महीनों में शहरी स्थानीय निकाय विभाग इन चारों चयनित शहरों में जमीनी स्तर पर निर्माण कार्यों की शुरुआत करेगा। इसके साथ ही, अन्य जिलों में भी कचरे से ऊर्जा बनाने वाले संयंत्र लगाने की संभावनाओं पर डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जा रही है। पानीपत और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि सरकार अब पारंपरिक कचरा निस्तारण की विधियों से आगे बढ़कर आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को अपना रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास दोनों के लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सके।

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पानीपत लाइव ग्राउंड न्यूज़रूम ब्यूरोPanipatLive.com

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