पानीपत जिले के समालखा क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा सेवा में लापरवाही और ग्राहकों के अधिकारों की अनदेखी करने पर कड़ी कार्रवाई की है। कार चोरी होने के बाद पॉलिसी के अनुसार पूरी बीमित राशि का भुगतान न करने पर आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता की सेवा में गंभीर कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने बीमा कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह पीड़ित उपभोक्ता को कार की पूर्ण बीमित राशि का भुगतान करे, साथ ही मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे और कानूनी लड़ाई के खर्च की भरपाई भी करे।
यह निर्णय जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की संयुक्त पीठ ने सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को फैसले की तामील के लिए 45 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की है। यदि निर्धारित समय के भीतर कंपनी उपभोक्ता को पूरी राशि का भुगतान नहीं करती है, तो उसे शिकायत दर्ज कराने की तिथि से लेकर पूरी रकम के भुगतान तक 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी चुकाना पड़ेगा।
कार चोरी और बीमा क्लेम का पूरा मामला
मामले की पृष्ठभूमि समालखा के शास्त्री नगर (भापरा रोड) निवासी दिनेश कुमार की शिकायत पर आधारित है। दिनेश कुमार ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत याचिका दायर की थी। दिनेश कुमार के पास हुंडई ग्रैंड आई10 नियोस कार थी, जिसका बीमा 27 फरवरी 2024 से 26 फरवरी 2025 तक के लिए वैध था। 25 फरवरी 2025 की शाम को दिल्ली के नरेला स्थित माता मनसा मंदिर मार्ग पर सड़क किनारे खड़ी यह कार अचानक चोरी हो गई थी।
घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने स्थानीय नरेला पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई और साथ ही बीमा कंपनी को भी चोरी की औपचारिक सूचना दी। इसके पश्चात बीमा कंपनी ने जांच के लिए सर्वेयर की नियुक्ति की। सर्वेयर और कंपनी की ओर से उपभोक्ता को 4 लाख 14 हजार 861 रुपये के दावे की स्वीकृति का ईमेल तो प्राप्त हुआ, लेकिन उपभोक्ता ने पूरी बीमित रकम (रिटर्न टू इनवॉइस) की मांग की। उपभोक्ता का कहना था कि उन्होंने पॉलिसी लेते समय अतिरिक्त प्रीमियम देकर 'रिटर्न टू इनवॉइस' कवर हासिल किया था।
| विवरण | तथ्य एवं जानकारी |
|---|---|
| शिकायतकर्ता | दिनेश कुमार, निवासी शास्त्री नगर (भापरा रोड), समालखा |
| वाहन विवरण | हुंडई ग्रैंड आई10 नियोस (चोरी तिथि: 25 फरवरी 2025) |
| बीमा कंपनी | ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी (पॉलिसी वैध: 2024-2025) |
| अतिरिक्त कवर | रिटर्न टू इनवॉइस (RTI) कवर (प्रीमियम: ₹2,495) |
| आयोग का अंतिम निर्णय | ₹4,15,861 बीमित राशि + ₹11,000 मुआवजा + ₹5,500 वाद व्यय |
| समय सीमा व ब्याज | 45 दिन के भीतर भुगतान बाध्यकारी, देरी पर 12% वार्षिक ब्याज |
अतिरिक्त प्रीमियम भुगतान के बावजूद कंपनी का टालमटोल
शिकायतकर्ता दिनेश कुमार ने उपभोक्ता मंच के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि बीमा पॉलिसी लेते समय उन्होंने 'रिटर्न टू इनवॉइस' (RTI) ऐड-ऑन कवर के लिए विशेष रूप से 2,495 रुपये का अतिरिक्त प्रीमियम दिया था। इस नियम के तहत वाहन चोरी या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर उपभोक्ता को वाहन की पूरी बीमित राशि अथवा नई गाड़ी की ऑन-रोड कीमत प्राप्त करने का कानूनी अधिकार होता है। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने पूर्ण राशि जारी करने में आनाकानी की और उपभोक्ता को कम क्लेम स्वीकार करने पर विवश करने का प्रयास किया।
बीमा कंपनी की इस मनमानी से तंग आकर शिकायतकर्ता ने पहले 24 नवंबर 2025 को एक कानूनी नोटिस भिजवाया। जब इसके बाद भी कंपनी का रवैया नकारात्मक बना रहा, तब उन्होंने पानीपत स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में इंसाफ के लिए शरण ली। पीड़ित ने आयोग से पूरी बीमित राशि, 18 प्रतिशत ब्याज, मानसिक संताप के लिए 1 लाख रुपये क्षतिपूर्ति और कानूनी कार्यवाही के व्यय के रूप में 33 हजार रुपये दिलवाने की गुहार लगाई थी।
"उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत जब ग्राहक अतिरिक्त प्रीमियम देकर विशेष कवर प्राप्त करता है, तब बीमा कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकतीं। नोटिस के बावजूद प्रस्तुत न होना और क्लेम रोकना सेवा में स्पष्ट लापरवाही दर्शाता है।"
उपभोक्ता आयोग का कड़ा रुख और एकतरफा फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए नियमानुसार समन और नोटिस जारी किए। इसके बावजूद कंपनी की ओर से कोई भी प्रतिनिधि अथवा अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। कंपनी के इस ढुलमुल रवैये को गंभीरता से लेते हुए आयोग की पीठ ने 19 मार्च 2026 को ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ एकतरफा (Ex-Parte) कार्यवाही अमल में लाने का आदेश जारी कर दिया।
कंपनी के अनुपस्थित रहने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों, पुलिस एफआईआर, इंश्योरेंस पॉलिसी कॉपी और प्रीमियम रसीदों का किसी प्रकार से खंडन नहीं हो सका। आयोग ने प्रस्तुत सभी साक्ष्यों और अभिलेखों का गहनता से अवलोकन करने के उपरांत माना कि शिकायतकर्ता 4 लाख 15 हजार 861 रुपये की पूर्ण बीमित राशि प्राप्त करने का विधिवत हकदार है। आयोग ने फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी के इस रवैये को उपभोक्ता सेवा में गंभीर त्रुटि करार दिया।
स्थानीय नागरिकों पर फैसले का प्रभाव और कानूनी संदेश
यह फैसला पानीपत और समालखा क्षेत्र के उन तमाम वाहन मालिकों और उपभोक्ताओं के लिए एक नजीर साबित होगा, जो अक्सर दुर्घटना या चोरी के समय बीमा कंपनियों की लालफीताशाही का शिकार बनते हैं। अक्सर देखा जाता है कि बीमा कंपनियां ऐड-ऑन कवर बेचते समय भारी-भरकम दावे करती हैं, लेकिन क्लेम पास करने के समय उपभोक्ताओं को नियमों के जाल में उलझा देती हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जिला उपभोक्ता आयोग का यह सख्त रुख आम जनता में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा। यदि बीमा कंपनियां निर्धारित 45 दिनों की अवधि में 4,15,861 रुपये की मूल राशि, 11 हजार रुपये मुआवजा और 5500 रुपये केस का खर्च नहीं चुकाती हैं, तो उन्हें याचिका दायर करने की तिथि से 12 फीसदी की भारी ब्याज दर का भुगतान करना होगा, जो कंपनियों की मनमानी पर बड़ा अंकुश लगाएगा।




